मैं हूँ असली मनोज बाजपेयी
हम हिंदी ब्लोग जगत के चिट्ठाकार नामक प्राणी भी जबरदस्त हैं जिसके होने में संशय हैं उसे जोरशोर से पढ़े जा रहे हैं, दबाकर टिप्पणी कर रहे हैं और टॉम डिक हैरी (हिंदी अनुवाद ईर बीर फत्ते पढ़ें) जिनका होना तय है वहाँ जाकर कोई झांकता तक नही।
कोई जुमा जुमा दो पोस्ट पुराने हिंदी ब्लोगर चीख चीख कर “नाम में क्या रखा है” की दुहाई देकर कहे जा रहे हैं कि मैं मनोज बाजपेयी हूँ “सत्या” वाला यहाँ तक कि सबूत के तौर पर अपने फोटुओं के दो-चार “अक्स” भी टांगे हुए हैं लेकिन कुछ लोग हैं कि अपनी सोच को “पिंजर” में जकड़ कर मानने को तैयार ही नही अब भला इससे किसी के दिल में “शूल” चूभे तो उन्हें इससे क्या।
नाम में क्या रखा है इस बात पर मनोज ने दो-चार मजेदार लाईनें भी लिखीं अब चाहे वो माने ना माने लेकिन सच यही हैं कि नाम में बहुत कुछ रखा है। अब अगर वो अपने नाम के पीछे बाजपेयी ना लगाते, या अपने कुछ साथी बंधु उनके होने का प्रचार ना करते तो क्या उनके ब्लोग को वैसी ही प्रतिक्रिया मिलती, बिल्कुल नही।
दरअसल गलती मनोज की ही है, उन्होंने लीक से हटकर जो कुछ किया। जरा जुर्रत तो देखिये उनकी सीधे पहले हिंदी में अपने ब्लोग को शुरू किया। अब आप ही बताओ कोई आम मनोज वाला काम करे और फिर कहे मैं खास वाला मनोज हूँ कोई मानेगा, नही ना। वो ही उनके साथ हुआ जनता हत्थे से ही उखड़ गयी और मानने में ना नुकुर करने लगी कि ये कैसे मनोज बाजपेयी हो सकते हैं। हिंदी फिल्म के स्टार होने के बावजूद अंग्रेजी में ना काहे शुरूआत करी, मनोज बाजपेयी फिलहाल मनी और हनी दोनों को भूलकर अपने होने की दुहाई दे रहे हैं, उनको कहना पढ़ रहा है विश्वास हो ना हो लेकिन मैं मैं ही हूँ। रील लाईफ में तो अनुपम खेर ने गुनगुनाया था रियल लाईफ में मनोज को गुनगुनाना पढ़ रहा हैं - आईना ब्लोगरस मूझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे, मेरे अपने (हिंदी बेल्ट वाले) मेरे होने की निशानी मांगे।
अगर अभी भी किसी को शक है तो हम सोच रहे हैं खुलासा कर ही देते हैं कि दरअसल असली मनोज बाजपेयी हम हैं, बहुत सालों पहले हमने अंग्रेजी में ब्लोग शुरू किया था फिर चुपके से हिंदी में आ गये। नाम में क्या रखा है सोचकर हमने तरूण के नाम से लिखने की शुरूआत की। लेकिन लिखते लिखते जब ये सज्जन आये और आते ही इनको मिली टिप्पणियां देखीं तो ये ऐहसास हो गया कि नाम में बहुत कुछ रखा है इसलिये आज अपनी असलियत सबके सामने रख रहे हैं। मेरी फिल्म अक्स की कहानी यहाँ खुलेआम दोहरायी जा रही है फिर भी किसी की समझ कुछ नही आ रहा। इसलिये सारे संशय का ईलाज ये हैं कि जिन्हें उनके मनोज बाजपेयी होने पर संदेह हैं वो हमें मनोज बाजपेयी समझकर पढ़े और जिन्हें हमारे मनोज बाजपेयी होने पर संदेह हैं वो उन्हें। लेकिन ये इतनी बढ़ी समस्या नही जिसे और आगे बढ़ाया जाय इसलिये इस बात को यहीं विराम दिया जाय।
जम्मू जल रहा तो हमको क्या
सिंह इज किंग तो हमको क्या
स्टिंग आपरेशन हमको क्या
सांसद खाये पैसा हमको क्या
भूखे बच्चे हमको क्या
गरीब पीस रहा हमको क्या
नारी पर अत्याचार हमको क्या
महंगाई की मार हमको क्या
एक दूसरे की तारीफ से उबरेंगे तो सोचेंगे
तब तक दुनिया में क्या चल रहा हमको क्या




Bahoot Khoob
Agree liked the line
भूखे बच्चे हमको क्या
गरीब पीस रहा हमको क्या
अजी मान लिया कि आप ही मनोज बाजपेई है, आप हॊ कल अमिताभ आमिर और ना जाने कौन कौन होंगे (लालू से लेकर भालू तक)
सही किया जो बात को यहीं विराम दे दिया. आभार. हा हा!!
ha ha bilkul durusta farmaya aapne..
bahut maza aaya…ham to aapko hi manoj baajpeyi maan lete hain aaj se….ha ha ha ha
बहुत बढिया,
अच्छा व्यंग है
प्रियवर - नाम तरुण बहुत अच्छा है - और निठल्ला उससे भी अच्छा है - और चिंतन के क्या कहने - हम आपकी तारीफ़ ज़्यादा करेंगे [
- कुछ दिनों नदारद रहने के बाद वापस ] - साभार - मनीष
अरे भैया कैसे शुक्रिया अदा करूं, आपने तो यह सब खुलासा कर के बचा ही लिया मुझे।

मै तो “उन” मनोज से कहने वाला था सरकार हमका भी फिलम इंडस्ट्री मा काम दिलाए देओ,
अब आपै असली हो तो आपै से कहूंगा न, भैया हमका भी एकाध “ब्रेक” दिलाए देओ न।
जम्मू जल रहा तो हमको क्या
सिंह इज किंग तो हमको क्या
स्टिंग आपरेशन हमको क्या
सांसद खाये पैसा हमको क्या
भूखे बच्चे हमको क्या
गरीब पीस रहा हमको क्या
नारी पर अत्याचार हमको क्याबहुत सुन्दर लिखा है। बधाई स्वीकारें।
लग रहा है आप ही है……
priy manoj ji,namaskar,apka blog padha.content se lekar shaili(style of writing)dono hi behatrin hai.lagta hi nahi ki kisi professinal ne nahi likha.dil se badhai.
वाह, क्या बात है। व्यंग्य पढ़कर मजा आ गया। आभार।
हर निठल्ला अपने को मनोज बाजपेयी बता रहा है। कल को कोई मनोज बाजपेयी बतायेगा- हम ही असली तरुण हैं जी।
चलिये एक टिप्पणी से दो ब्लाग पोस्ट निकलीं एक से बढ़्कर एक…सब खुश हुये हम खुस हुये
असली नकली के चक्कर में अबैई दिमाग घूम रहा है, थोड़ा और सबूत दो ऊ के मनोज न होने का। ……॥:)