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जिस रोज मुझे भगवान मिले: अंतिम भाग

अब तक आप ने पढ़ा भाग १ नेताओं की तरह तुरंत पाला बदलते हुए अपना आत्म सम्मान, अपना दिल-दिमाग सब कुछ अपनी जेब में रख हाथ जोड़ के हम बोल पड़े, “बस भगवन बस सब समझ गया। लेकिन शक का इलाज तो किसी वैध के पास है नही मन अभी भी शक कर रहा था [...]

जिस रोज मुझे भगवान मिले

‘ना माया से ना शक्ति से भगवन मिलते हैं भक्ति से’, एक खुबसूरत गीत है और इसको सुनने के बाद लगा कि अगर मिलते होते तो भी प्रभु हमको मिलने से रहते। क्योंकि माया हमे वैसे ही नही आती, शक्ति हममें इतनी है नही और भक्ति हम करते नही, तो कुल जमा अपना चांस हुआ [...]

प्रेम कविता

जिन्हें अब तक नही मालूम उन्हें बता दें कि यदा कदा हम भी कविता जैसे शब्द कागज में उड़ेल लेते हैं। ये अलग बात है कि उसमें प्रेम या श्रृंगार रस नही के बराबर पाया जाता है। लेकिन ऐसा नही है कि हम शब्दों को प्रेमरस या श्रृंगार रस की चासनी में भिगोने का प्रयास [...]

[ More ] August 27th, 2008 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं?

मैंने कई बार इस देश और इस देश के वाशिंदो (हमें भी गिना जाये) पर संशय किया है, उनके धर्मनिरपेक्ष होने और उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये। लेकिन आज इस खबर को पढ़कर मुझे लगा कि मेरी इस सोच को पुनर्विचार की जरूरत है। क्या अब हम वाकई सही मायनों में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहे [...]

[ More ] August 26th, 2008 | 11 Comments | Posted in धर्म, बस यूँ ही |

उजाला

हर तरफ फैला उजाला, हर कली खिलने लगी आई सूरज की किरण, रात घर चलने लगी। पंछी जो सब चुप थे अब तक, सहसा चहचहाने लगे कहीं शोर बच्चों का है तो, कहीं गीत बजने लगे। अब भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहाँ रहता हरदम अंधेरा गोलियों के शोर के बीच, सिसकियाँ लेता सवेरा। पंछी [...]

[ More ] August 25th, 2008 | 6 Comments | Posted in शायरी और गजल |

शबाना जी, तेरा मेरा दर्द ना जाने कोई

शबाना आजमी और इनके हमनिवाला और हमप्याला शौहर जावेद अख्तर किसी परिचय के मोहताज नही, ना ही इनके साहेबजादे लख्ते-जिगर फरहान अख्तर को इसकी जरूरत है। इसलिये बजाय इनका परिचय देने के सीधे मुदद्दे पर आते हैं। शबाना आजमी पूर्व सांसद तो हैं ही, साथ में अच्छी अदाकारा भी हैं और समाज सेवी भी, ये [...]

गीत-संगीतः तेरे नैना तलाश करे जिसे

[ये गीत है फुरसतिया के नाम जिनके नैना शनिवार के दिन चिट्ठाचर्चा जरूर तलाश रहे होंगे।] 1969 में एक फिल्म आयी थी जिसका नाम था तलाश, मन्ना दा का गाया हुआ इस फिल्म का एक खुबसूरत गीत है – तेरे नैना तलाश करे जिसे, वो है तूझी में कहीं दिवाने। ये गीत मेरे पसंदीदा गीतों [...]

[ More ] August 19th, 2008 | 5 Comments | Posted in गीत संगीत |

भस्मासुर को मिला वरदान है धर्मनिरपेक्षता

आप लोगों ने भस्मासुर का नाम तो सुना होगा अगर नही तो मैं बता दूँ भस्मासुर एक राक्षस था जिसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या की। शिव के प्रसन्न होने पर उसने वरदान माँगा कि वो यानि भस्मासुर जिसके सिर पर भी हाथ रखे वो भस्म हो जाये। शिव तो ठेरे [...]

मैं हूँ असली मनोज बाजपेयी

हम हिंदी ब्लोग जगत के चिट्ठाकार नामक प्राणी भी जबरदस्त हैं जिसके होने में संशय हैं उसे जोरशोर से पढ़े जा रहे हैं, दबाकर टिप्पणी कर रहे हैं और टॉम डिक हैरी (हिंदी अनुवाद ईर बीर फत्ते पढ़ें) जिनका होना तय है वहाँ जाकर कोई झांकता तक नही। कोई जुमा जुमा दो पोस्ट पुराने हिंदी [...]

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