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चंद शब्द चुनके लाया हूँ

July 18th, 2008 | 13 Comments | Posted in शायरी और गजल

कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, यहाँ हर शब्द दिल को भाता है।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
शब्दों के फूल तुम चुनो, और मैं उन से माला बुन लूँ।

ऊपर की इन लाईनों को छापने से पहले थोड़ा दुरस्त किया गया है, वैसे ये कई हफ्तों से किसी लावारिस पेपर में लिखी घर के किसी कोने में पड़ी थी, आज नजर गयी तो जैसे इनको भी इनका खोया चांद मिल गया। दुरस्त करने से पहले का ड्राफ्ट वर्जन कुछ ऐसे था -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
बहुतों ने करी कोशिश, सीधी ना कर पाये कुत्ते की दुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।

सस्ते शेर का सफर तय करता हुआ आज ये शेर धीमे-धीमे यहाँ आ पहुँचा।

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13 Responses to “चंद शब्द चुनके लाया हूँ”

  1. mahendra mishra Says:

    चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
    सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम.

    bahut badhiya sher hai . dhanyawaad.

  2. परमजीत बाली Says:

    बिना दुरुस्त किए भी बेहतरीन लिखा है।बहुत बढिया लिखा है-

    कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
    ‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।

  3. Sameer Lal Says:

    क्या बात है! आप तो शायर हो लिये, बन्धु!! भूल न जाना!!

  4. अजित वडनेरकर Says:

    अत्यंत रमणीय रचना है बंधुवर। इसमें प्रसाद गुण है :)

  5. अनूप शुक्ल Says:

    गजब के शायर हो लिये आप तो जी। :)

  6. जीतू Says:

    मियां सही जा रहे हो…. और सफ़ाई करो घर/अलमारी की कुछ शेर/गज़ले पड़ी मिल जाएं तो सबको सुनाओ।

  7. Dr.anurag Says:

    lage raho……..

  8. vipin jain Says:

    चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
    सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।

    achcha hai

  9. vipin jain Says:

    चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
    सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।
    achcha hai

    http://vipinkizindagi.blogspot.com

  10. Dr. Chandra Kumar Jain Says:

    अच्छी प्रस्तुति.
    =============
    बधाई
    डा.चन्द्रकुमार जैन

  11. pallavi trivedi Says:

    badhiya hain…

  12. महामंत्री- तस्लीम Says:

    जो भी कहा, अच्छा कहा। शेर दिल को छू गया।

  13. Jitendra Kumar Batham Says:

    Most attractive…….

    vah kaisa kaisa kalyug aya hai
    vah kaisa kaisa kalyug aya hai
    kya kya roop laya hai
    kahi par bajte dhol tamase
    to kahi par nagane bajte hai
    charo aor logon ke
    jay jay kare bajte hai
    vah kaisa kalyug aya hai…..

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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