हिंदुस्तानी की डायरी, मनमोहन सिंह, हिंदी और गुगल की चंपी
हिंदुस्तानी की डायरी वाले अनिल रघुराज ने कल एक बढ़िया लेख लिखा था (गुरमुख सिंह के पुत्तर मोहना को हिंदी नहीं आती?) जिसमें मनमोहन सिंह को अंग्रेजी में बोलने पर काफी कोसा था। अनिलजी ने अपने ब्लोग पर गुगल देव को अंग्रेजी अनुवाद के लिये बैठा के रखा हुआ है तो हमने सोचा क्यों ना देखा जाय कि आखिर इस लेख का कैसा अनुवाद होता है और वो कितना समझ में आ सकता है। अंग्रेजी में अनुवादित लेख पढ़ा तो समझ नही आया हँसे या रोयें। संक्षेप में कहूँ तो ये है किस्सा-ए-लास्ट इन ट्रांस्लेशन
आप भी पढ़कर देखिये और मजे लीजिये, लिंक के काम ना करने पर मूल लेख पर जाकर गुगल अनुवाद का बटन क्लिकयायें।
फिलहाल तो मुझे इस अनुवाद करने वाले बटन का कोई औचित्य नही आता ब्लोग में दिखाने का लेकिन मनोरंजन के लिये गालिब ये ख्याल अच्छा है।
कल की लाश का रोना अभी थमा नही है, जिस हिसाब से सूरत में बम मिल रहे हैं उससे वो ही लगता है जो ज्ञान दद्दा फरमा के गये।
It comes to the Punjabi, Hindi How then does not come?
यह सबसे अच्छा लगा
ये तो एक अच्छा खासा मज़ाक बन गया! शायद इसीलिये मनमोहन सिर्फ अंगरेजी में बोलना पसंद करते हैं!
हा हा हा
काफ़ी रोचक चीज खोज कर लायें है.
अभी तो शुरुवात है भाई-थोड़ा समय लगेगा स्तरीय होते..तब तक कलने दो, कम से कम लोगों की जानकारी में रहेगा कि इस दिशा में काम चल रहा है.
रोचक। मेरे मन में प्रधानमन्त्री जी के लिये बहुत आदर है - और वह उनकी हिन्दी-अंग्रेजी से बदलता नहीं।
अरे क्या बात हे, मस्त चीज लाये धन्यवाद
waah waah tarun ji ekdam dilchasp khabar laaye aap…hihi
aur wo video to aur bhi mast tha..
thnx