चंद शब्द चुनके लाया हूँ
कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें -
शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम।कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, यहाँ हर शब्द दिल को भाता है।चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
शब्दों के फूल तुम चुनो, और मैं उन से माला बुन लूँ।
ऊपर की इन लाईनों को छापने से पहले थोड़ा दुरस्त किया गया है, वैसे ये कई हफ्तों से किसी लावारिस पेपर में लिखी घर के किसी कोने में पड़ी थी, आज नजर गयी तो जैसे इनको भी इनका खोया चांद मिल गया। दुरस्त करने से पहले का ड्राफ्ट वर्जन कुछ ऐसे था -
शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
बहुतों ने करी कोशिश, सीधी ना कर पाये कुत्ते की दुम।कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।
सस्ते शेर का सफर तय करता हुआ आज ये शेर धीमे-धीमे यहाँ आ पहुँचा।
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This post has 13 comments
July 18th, 2008
चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम.
bahut badhiya sher hai . dhanyawaad.
July 18th, 2008
बिना दुरुस्त किए भी बेहतरीन लिखा है।बहुत बढिया लिखा है-
कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।
July 19th, 2008
क्या बात है! आप तो शायर हो लिये, बन्धु!! भूल न जाना!!
July 19th, 2008
अत्यंत रमणीय रचना है बंधुवर। इसमें प्रसाद गुण है
July 19th, 2008
गजब के शायर हो लिये आप तो जी।
July 19th, 2008
मियां सही जा रहे हो…. और सफ़ाई करो घर/अलमारी की कुछ शेर/गज़ले पड़ी मिल जाएं तो सबको सुनाओ।
July 19th, 2008
lage raho……..
July 19th, 2008
चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।
achcha hai
July 19th, 2008
चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।
achcha hai
http://vipinkizindagi.blogspot.com
July 19th, 2008
अच्छी प्रस्तुति.
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बधाई
डा.चन्द्रकुमार जैन
July 19th, 2008
badhiya hain…
July 21st, 2008
जो भी कहा, अच्छा कहा। शेर दिल को छू गया।
January 31st, 2010
Most attractive…….
vah kaisa kaisa kalyug aya hai
vah kaisa kaisa kalyug aya hai
kya kya roop laya hai
kahi par bajte dhol tamase
to kahi par nagane bajte hai
charo aor logon ke
jay jay kare bajte hai
vah kaisa kalyug aya hai…..
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