Motilium No Prescription Antabuse For Sale Elimite Generic Buy Nexium Online Propecia Without Prescription Nizoral No Prescription Aldactone For Sale Hoodia Generic Buy Acomplia Online Clarinex Without Prescription

कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, यहाँ हर शब्द दिल को भाता है।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
शब्दों के फूल तुम चुनो, और मैं उन से माला बुन लूँ।

ऊपर की इन लाईनों को छापने से पहले थोड़ा दुरस्त किया गया है, वैसे ये कई हफ्तों से किसी लावारिस पेपर में लिखी घर के किसी कोने में पड़ी थी, आज नजर गयी तो जैसे इनको भी इनका खोया चांद मिल गया। दुरस्त करने से पहले का ड्राफ्ट वर्जन कुछ ऐसे था -

शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
बहुतों ने करी कोशिश, सीधी ना कर पाये कुत्ते की दुम।

कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये सुखनवरों की बस्ती है, आ तू भी अपना आशियाँ यहाँ बुन।

चलो तुम मीर बन जाओ, गालिब का तख्ल्लुस मैं ले लूँ
सस्ते शेरों की ये दुनिया सही, यहाँ शायर कभी नही होते गुम।

सस्ते शेर का सफर तय करता हुआ आज ये शेर धीमे-धीमे यहाँ आ पहुँचा।

Share and Enjoy:
  • E-mail this story to a friend!
  • Google
  • Technorati
  • del.icio.us
  • Facebook
  • Live
  • StumbleUpon
  • Tumblr
  • Digg
  • YahooMyWeb
Send to Twitter and Follow me on Twitter