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समीर यानि ठंडी हवा का झोंका

June 21st, 2008 | 7 Comments | Posted in खालीपीली

आपने ये तो पढ़ा सुना होगा कि हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी ना किसी स्त्री (या महिला) का हाथ होता है और अगर ये बात बिल्कुल सही है तो गौर करने लायक बात ये है कि अंबानी बंधुओं की सफलता के पीछे कितनी ज्यादा महिलाओं का हाथ होगा। अब इसका तो हम कुछ ठीक से नही कह सकते लेकिन इतना बता सकते हैं कि समीर की अति सफलता के पीछे जरूर बहुत सारी महिलाओं का हाथ है।

ये हम नही कह रहे यदा-कदा वो ही बताते रहते हैं क्योंकि उनकी ज्यादातर मजेदार पोस्टों के पीछे ट्रैन में उनके आजू-बाजू बैठी महिलायें या उन महिलाओं की हरकतों का हाथ जरूर होता है। अब ये तो समीर जी ही बता सकते हैं कि महिलायें हरकतें उन्हें देख कर करती हैं या समीर जी जानबूझ कर ऐसी जगह जा बैठते हैं जहाँ से उन्हें लिखने की कुछ प्रेरणा मिलती रहे।

लगता है इंडिया में गरमी कुछ ज्यादा हो रही है तभी तो जिधर देखो उधर ठंडी हवा के झोंके की चर्चा चल रही है, हमें लगा कि गर्मी का मौसम तो यहाँ भी है तो हम क्यों पीछे रहें। इससे पहले की आप कुछ भी समझ ना पाने का हवाला देते हुइ यहाँ से कन्नी काटने का सोचे हम आपको बताये देते हैं कि ये टेस्ट पोस्ट है

test दरअसल, मुद्दतों बाद जब हम नींद से जागे तो पता चला कि दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच चुकी है, इंडिया में कोई कुत्ता खोकर मिल भी चुका है, ब्लोगजगत में बहुत सारे नये लिक्खाड़ आ गये हैं। वर्डप्रैस का नया वर्जन भी आ चुका है, ये पता चलने के बाद हमें लगा कि दुबारा सुप्तावस्था में जाने से पहले अपग्रैड कर लिया जाय। वो ही करके जब उठे तो उसके बाद इसे टेस्ट करना लाजिमी था।

‘ये टेस्ट पोस्ट है’ करके पोस्ट ठेलने का चलन काफी पुराना और ऊबाउ किस्म का लगा इसलिये सोचा कि अच्छी टेस्टिंग के लिये भारी भरकम डेटा की दरकार होती है तभी सब कुछ ठीक से टेस्ट हो पाता है। अब पोस्ट लिखकर उसे भारी भरकम करना तो अपने बस की बात नही इसलिये ‘हरि से बड़ा हरि का नाम’ को सत्य वचन मान हमने भारी भरकम नाम यानि समीर को पकड़ लिया और ठेल मारी ये टेस्ट पोस्ट।

क्या जमाना है साहब, जहाँ एक तरफ कोई उनकी सचिन तेंदुलकर से तुलना कर पोस्ट लिख रहा है कोई एलियन बताईयेके महाराज नाम का चक्का घुमाई दिये रहा है वहाँ हम जैसे भी नादान हैं जो उन्हें टेस्ट पोस्ट का विषय बनाये दे रहे हैं। अब इससे पहले कि उनके पंखे, पंख फड़ फड़ाकर टमाटर, चप्पल मारने लगे हम यहाँ से फुर्र हो लेते हैं।

हम जब तक अब नये अपग्रैड का टेस्ट करते हैं तब तक आप इस गाने का मजा लीजिये, सिर्फ म्यूजिक है वो भी बड़ा हवादार (ठंडी हवा काली घटा), बंदे की तारीफ करनी पड़ेगी कि एक हाथ से बगैर कुछ इधर-उधर किये क्या गजब का बजाया है।



[समीरजी उर्फ उड़नतश्तरी से क्षमा याचना सहित]

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7 Responses to “समीर यानि ठंडी हवा का झोंका”

  1. Raj Says:

    Is this testing done?

  2. अरूण Says:

    धुन बढिया है , मजा आगया जी सुनाते रहिये

  3. SHUAIB Says:

    अभी धुन सुनने की औकात नहीं अपनी क्योंकि इस वक़्त दफ्तर मे बैठे हैं। मैं भी सोचूं कि ये पुराने चिट्ठाकार कहां गायब होजाते हैं?। खुशी हुई कि आप तो वापस आए।

  4. Gyan Dutt Pandey Says:

    बड़ी टेस्टी पोस्ट है जी!

  5. समीर लाल Says:

    पंछी बनो उड़ते फिरो…क्गूब झूम कर सुना महाराज…यकीनन आपने ही बजाया हो गया.

    समीरजी उर्फ उड़नतश्तरी से क्षमा याचना सहित—इस डिसक्लेमर की आपको कब जरुरत आन पड़ी महाराज हा हा-दूरी बनाने के चक्कर में हो क्या??

    अब नियमित लिखो भाई. अनेकों शुभकामनाऐं.

    वो ट्रेन ने तो मुझे बड़ा तगड़ा आत्म विश्वास दिया है-जहाँ बैठता हूँ वहीं..कुछ न कुछ मसाला मिल ही जाता है.

  6. Tarun Says:

    @समीरजी, नही वो मैने नही बजाया है लेकिन एक दिन अपना बजाया भी लगाऊँगा जिसमें सुर कहीं और ताल कहीं ;)

    डिस्क्लेमर तो दूसरों के लिये लगाया है जिससे उन्हें याद रहे इस तरह का कुछ लगाना होता है इस तरह के लेख में ;)

    नियमित लिखने की शुभकामनाओं के लिये धन्यवाद लेकिन अगले ६ महीनों में लगता है ऐसे ही छुटपुट बारिश होती रहेगी ऐसा प्रतीत होता है।

    आपकी देखादेखी ट्रैन में मसाले की खोज में एक दिन हमने भी सोचा २-३ डब्बों तक चला जाय शायद कुछ मिल जाय, मसाले की चक्कर में सीट भी ना मिली ;)

  7. Tarun Says:

    @ज्ञानदद्दा हम तो टेस्ट समझे थे टेस्टी होने का तो ख्याल ही नही आया, अच्छा हुआ वरना कहीं सारी हम ही ना हजम कर जाते।

    @अरूण धुन वाकई में बढ़िया है

    @शुएब, पुराने चिट्ठाकार लगता है इंटिक पीस बनने की तैयारी कर रहे हैं, इन चीजों का भाव ज्यादा है ना मार्केट में। सोच रहे हैं ऐसे ना सही क्या पता वैसे ही कुछ कमाई हो जाये ;) । अच्छा लगा आप को यहाँ देखकर, इंडिया में सबकुछ ठीक से जम गया ना।

    @Raj, Almost that’s why the image Tested.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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