सोच रहा हूँ इन्हे अबला कहूँ या सबला या बेवकूफों का पागलपन
हाईस्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की क्या उम्र हो सकती है १५-१६ या १७? क्या इस उम्र तक आते आते अक्ल आ जाती है, शायद हाँ, शायद ना। लग रहा हूँ ना कन्फ्यूज क्या करूँ जहाँ एक और भारत ये पेक्ट कराने के पीछे पढ़ा है कि हर कोई देश ये कहे कि वो पहले परमाणु हमला नही करेंगे वहीं यहाँ अमेरिका में हाईस्कूल की १७ लड़कियों नें ये पेक्ट किया कि वो एक साथ गर्भवती होंगी (विडियो लिंक,आलेख/खबर लिंक) । जब एक को इस पेक्ट को पूरा करने के लिये कोई नही मिला तो उसने एक होमलैस को जा पकड़ा, होमलैस हुआ तो क्या उन १७ लड़कियों का पेक्ट तो पूरा हो गया ना इक साथ गर्भवती होने का। ये सब तब हुआ जब स्कूल में गर्भवती होने से रोकने का सारा सामान प्रोवाइड किया जाता है।
अब आप ही बताओ अबला कहूँ या सबला या बेवकूफों का पागलपन, वैसे जिस देश की लड़कियों के ब्रिटनी स्पेयरस की बहिन जैसे रोल मॉडल हों वहाँ कुछ ऐसा ही होगा। गौरतलब है कि खबरों के मुताबिक स्पेयरस सिस्टर ने अभी १७ साल की उम्र में एक लड़की को जन्म दिया है। और क्या ये हालीवुड में बनने वाली जूनो टाईप फिल्म का असर है।
अपने विचारों से जरूर अवगत करायें देखें तो सही आप अबला कहते हैं या सबला और या आपका कुछ और ही कहना है।


June 21st, 2008 at 8:00 pm
ये लेमिंगों की नई जमात है!
June 21st, 2008 at 8:06 pm
अरे ईश्वर ने गर्भ दिया ही है, गर्भधारण के लिये ?
कम उम्र और पकी उम्र का क्या, क्या भारत में लड़कियाँ 15-16 की आयु में माँ नहीं बना दी जातीं ?
उनका समाज जब उन्हें नहीं दुत्कार रहा तो हम अपने चश्में को उतार कर ही रख लें तो बेहतर रहेगा !
June 22nd, 2008 at 6:45 am
इसका अबला ,सबला से कोई लेना-देना नहीं है। जब कुछ सार्थक करने के लिये प्रेरित करने वाले तत्व न होंगे तो इसी तरह की ऊल-जलूल बातों में ऊर्जा लगेगी।
June 23rd, 2008 at 10:18 am
उस दिन तो हमने आपकी पोस्ट नही पढ़ी थी पर ये ख़बर देखी और पढ़ी है ।और मेरे ख़्याल से ये पागलपन से कम नही है।बल्कि पागलपन की हद है। आख़िर इससे वो क्या साबित करना चाहती है।