ये कैसे कैसे तारे जमीन पर
तारे भी तो अनगिनत हैं, कुछ अच्छे हैं तो कुछ सच्चे, कुछ प्यारे हैं तो कुछ न्यारे। लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिनके लिये कोई भी शायद नही कहना चाहे तारे जमीन पर। लेकिन चाहने से अगर कुछ होता तो हम भी बहुत कुछ चाहने लगते।
आप जरूर सोच रहे होंगे कि इतने दिन तक गायब रहने के बाद अचानक आकर मैं ये किस तरह की बातें करने लगा हूँ। क्या करूँ आना तो नही था लेकिन बोले बिना रहा भी नही गया अभी जब ईमेल चेक कर रहा था तो इस खबर के लिंक पर नजर गयी, जाकर देखा तो पता चला ८-९ साल के थर्ड ग्रेडरस अपनी टीचर का बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी करके आये थे। ज्यादा आप खुद जाकर पढ़ लें।
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This post has 6 comments
April 2nd, 2008
जमीन पर सिर्फ तारे ही नहीं - कूड़ा-करकट भी होता है!
April 2nd, 2008
haha, it happens only in US….
April 2nd, 2008
ज्ञानजी से पूर्णतः सहमत.
April 3rd, 2008
hmmm sahi bola bhaiyya…apne yahaan to kurshi pe kya class main khada bhi kar diya to pent gili hoo jaati thi 3rd class main..aur 3-4 din tak dar ke maare hawa kharaab…..kya jamana aa gaya hai Tarun bhai… abhi inko taarey kahein ya blackholes… kuch nai pata….chalo bhagwaan Georgia ke school teachers ko bachchon se bachaye…dhanyawaad itne dino baad chatpati khabar ke liye
April 4th, 2008
oiiiijyaaaa
April 4th, 2008
और एक हमारे हिन्दुस्तानी बच्चे हैं - डरपोक। अरे कुछ सीखो… दस साल की उम्र में भी मुँह में अंगूठा चूसते हुए तुतला कर बोलते हैं, ये नहीं कि चक्कू छूरी चलाना सीखें.
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