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मुंगेरी की वापसी

March 21st, 2008 | 6 Comments | Posted in खालीपीली

अगर आप ३ साल पहले हिंदी चिट्ठाजगत से वाकिफ नही थे तो मुंगेरी को भी नही जानते होंगे। मुंगेरी जब आया था तब हिंदी चिट्ठाजगत में मुट्ठीभर लोग थे जो खुद ही चिट्ठा लिखते और खुद ही आपस में एक-दूसरे का चिट्ठा बांचते। हिंदी चिट्ठे पढ़ने वालों का भी अकाल था उन दिनों, हमने भी अपना नया नया ही हिंदी चिट्ठा शुरू किया। हिंदी भी ठीक से लिखनी नही आती थी, और हम ले आये थे मुंगेरी को हिंदी चिट्ठाजगत में जो हमारी तीसरी या चौथी पोस्ट थी। हालांकि उस समय हमारी पोस्टों को मिली सारी टिप्पणियां हम खो चुके हैं लेकिन कुछ महीनों पहले एक दिन हमारे पास आशीष की एक ईमेल आयी जिसमें पूछा था, “आगे कब लिखोगे?”

अब पहले आप लोगों को बता दूँ, मुंगेरी वास्तव में एक कहानी थी जो हमने अपने शुरू के दिनों में लिखी थी जब हम कहानियाँ पहले पेपर पर लिखते थे फिर आराम से टाईप करते थे। ३ भाग लिखने के बाद हमारे वो पेपर गुम हो गये जिसमें कहानी लिखी थी, इसलिये आगे लिखना बंद कर दिया।

आज जब अपना मेल बॉक्स साफ कर रहे थे तो वो मेल दिख गयी, हमने सोचा क्यों ना फिर से उस कहानी को खत्म करने की कोशिश की जाय। एक ऐसी कहानी जो ३ साल पहले छुट गयी थी जिसे पूरा करना है इसलिये हम मुंगेरी को वापस बुलाने की सोच रहे हैं। अगर आप लोग मुंगेरी की अब तक की कहानी जानना चाहते हैं तो ये रहे लिंक।

मुंगेरीभाग १, भाग २, भाग ३

कहानियों पर अन्य प्रयोगः
जब हिन्दी चिट्ठाजगत का कुनबा बहुत छोटा था तब एक प्रयोगात्मक चिट्ठा शुरू किया गया था जिसका नाम था बूनो कहानी। जिसमें कहानी कोई लिखता था, उसे परवान कोई दूसरा चढ़ाता था और खत्म कोई तीसरा। इस तरह से इस प्रयोगात्मक चिट्ठे में कई कहानियां भी लिखी गयीं। इन्हीं में एक अनाम कहानी थी, जिसका दूसरा भाग हमने भी लिखना शुरू किया था लेकिन आधा लिखने के बाद पता चला कि गोविंदजी ने इसी कहानी का दूसरा भाग लिख कहानी भी समाप्त कर दी है।

और एक कहानी हमने शुरू की थी अपराध बोध, और इसको पूरा मीनाक्षीजी ने किया, यहाँ आप इस पूरी कहानी को पढ़ सकते हैं

इस बूनो कहानी में, अपने जीतू भाई द्वारा शुरू की गयी कवर स्टोरी: घासीराम की भैंस अपने पूरे होने का बाट जोह रही है। आप में से अगर कोई इच्छुक हो तो उसे पूरा कर सकता है।

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6 Responses to “मुंगेरी की वापसी”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    हम पढ़े हैं मुंगरी को। आगे लिखा जाये।

  2. Aashish Says:

    Woh mail humne hi bheji thi, ab to puri kar hi daaliye.

  3. परमजीत बाली Says:

    आप उसे अवश्य पूरा करे।बुनो कहानी की कुछ कहानियां तो हम पहल्र पढ़ चुके हैं।

  4. Gyan Dutt Pandey Says:

    अच्छा लगा यह जान कर।

  5. amit Says:

    आनंदम, यह बात जान बहुत खुशी हुई, साधूवाद। :) यह मेरे हिन्दी ब्लॉगजगत में पधारने से कुछ मास पहले की बात है, मैं अभी इस किस्से को पढ़ा नहीं हूँ, पढ़ते ही एकाध टिप्पणी ठेलता हूँ, साधू साधू। :D

  6. ashish pathak Says:

    bahut khoob

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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