18 Mar
Posted as खालीपीली
Tags:Bear Stearns, Investment bank, j. p. morgan, jpmorgan, stock, sub prime, subprimeअगर आप सोच रहे हैं ये किसी व्यक्ति के लिये है तो गलत, आज ये कहावत मैं वास्तव में एक कम्पनी के लिये यूज कर रहा हूँ, कम्पनी जो है अमेरिका का पांचवां सबसे बड़ा Investment बैंक। वो बैंक जो शुक्रवार की सुबह तक अर्श पर था और आज सोमवार की सुबह फर्श पर, वो बैंक जो एक दिन पहले तक Investment का राजा था और एक दिन बाद रंक यानि कण कण का मोहताज।
ये बैंक है Bear Stearns, जिसका शेयर भाव बृहस्पतिवार के दिन $60 के आसपास था, शुक्रवार की सुबह भी $60 के आसपास ही उसने आंखें खोली लेकिन उसके बाद जो हुआ शायद ही किसी ने सोचा होगा। शुक्रवार के दिन मार्केट बंद होने तक उसका भाव $30 के पास और सोमावर की सुबह मार्केट खुलते ही $2 के पास। बैंक जो लगभग ताश के पत्तों की मानिंद ढह गया। गौरतलब है Bear Stearns का शेयर पिछले साल मार्केट में अपने अधिकतम भाव $159 पर भी बिका था।
5 Responses
ज्ञान दत्त पाण्डेय
March 18th, 2008 at 10:04 am
1जब तेज लहर हो तो डक करना की उचित है।
रहिमन चुप हो बैठिये, देख दिनन के फेर।
फिर नीके दिन आयेंगे, बनत न लागे देर।
RA
March 18th, 2008 at 5:42 pm
2तरुण , अभी अभी Bloomberg में Bear Sterns के stock से प्रभावित share holders का हाल (बेहाल) सुना था कि तुम्हारा लिखा यह लेख रीडर में नज़र आया । Wall Street के लोभ की आगे न जानें कितनी और कहानियाँ हो ।
जानकारी का धन्यवाद।
दिनेशराय द्विवेदी
March 18th, 2008 at 8:00 pm
3यह वित्तीय-पूँजीवाद का युग है जिस में पूंजी को माल का दर्जा दे दिया गया है। इस के भाव केवल कंपनी के खुद के परफोरमेंस के आधार पर ही नहीं दूसरी कंपनियो, और बाजार में निवेशकों के व्यवहार पर भी निर्भर करते हैं। निवेशक जो अक्सर ही भीड़ की तरह व्यवहार करता है वह मिनटों में मूल्यवान वस्तु को मिट्टी में मिला सकता है।
खुशी के सदमे से एक ब्लोगर की मौत by निठल्ला चिन्तन
March 19th, 2008 at 7:57 am
4[…] ये साहेब फिर भी बोले, “हम तो अजदक समझकर ही रहेंगे, जो अजदक ना समझे वो हिंदी ब्लोगर ही नही। हमें बीच में टोकना पड़ा, अमाँ मियाँ शुभ-शुभ बोलो अगर ऐसा हो जाय तो हिंदी ब्लोग जगत का हाल भी Bear Stearns जैसा हो जायेगा जहाँ मुश्किल से ढूँढे से कोई ब्लोगर मिलेगा। […]
हिन्दी ब्लागिंग पर सोमरस ठाकुर की ये कविता सुनिये. « लल्लू
March 19th, 2008 at 3:35 pm
5[…] अर्श फर्श पे पटका मारें तरुण निठल्लौ चिन्तन, चंद औरतों के खुतूत कूं शोध रह्यो लिंकित मन बोधिसत्व आभा कौ मानस समझें मां की चुप्पी हथरिक्शा की सुनें विदाई, बरसे अन्तस: नीर; सौ सौ नमन करू मैं भईया सौ सौ नमन करूं; […]
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