टिप्पणियों से क्या अपेक्षाएं हैं
पिछली पोस्ट में काफी लोगों ने अपने विचार रखे और पूनम ने एक अच्छा सवाल उठाया जिससे ये चर्चा थोड़ा और आगे बडे।
टिप्पणियों को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएं होती हैं, जाहिर सी बात है टिप्पणियाँ किसे नही अच्छी लगती। लेकिन कई बार होता है कि आप अपनी समझ के अनुसार सोचते हैं अहा ये तो अच्छी पोस्ट लिखी है, ऐसी टिप्पणियाँ आ सकती हैं या वैसी आ सकती हैं लेकिन अंत में पता चलता है कि अरे इसमें तो बडी कम टिप्पणियाँ आयीं और जो आयीं उस तरह की टिप्पणियों की अपेक्षा आपने की ही नही थी।
कई बार जिस पोस्ट में सबसे कम अपेक्षा होती है उस में टिप्पणियाँ आ जाती हैं। आप क्या हमेशा तारीफ वाली टिप्पणियों की अपेक्षा करते हैं या चाहते हैं कि कोई आपकी गल्तियों की तरफ भी ध्यान दिलायें। कैसा लगता है जब जिस तरह की टिप्पणियों की आपने अपेक्षा करी होती है उस तरह की नही आतीं।
मेरे लिये तो यही कहूँगा कि कैसी भी मिले अच्छा है लेकिन जिसमें बात को थोडा विस्तार से रखा हुआ हो या देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर टाईप टिप्पणियों हों वो ज्यादा भाती हैं। कभी कभी ऐसा भी लगता है कि कोई गल्तियों से भी अवगत कराये, और कई बार जब कोई हमारे विचारों के विपरीत टिप्पणी करता है तो उन्हें आत्मसात करने में थोड़ा वक्त लगता है।
साथ ही मुझे कई बार ये भी अपेक्षा रहती है कि जिनके पोस्ट या ब्लोग में जाकर मैं टिप्पणी करता हूँ, अच्छा है, छा गये टाईप नही बल्कि बहस का हिस्टा टाईप टिप्पणी करता हूँ वो भी आकर मेरे लिखे पर अपने विचार रखे। अब ये जरूरी नही कि वो आयें और टिप्पणी करें लेकिन अपेक्षा का क्या? वो तो रहती है ना।
पिछली पोस्ट में अपने विचार रखने के लिये उन सभी का धन्यवाद जिन्होंने अपने विचार रखे और उनका भी जो विचार नही रख पाये, हालांकि ये हिंदी चि्टठे और चिट्ठाकारों की तुलना में बहुत कम है शायद इसकी वजह ये भी हो सकती है कि मैं इस बात को ठीक से नही रख पाया और या सप्ताहंत में इस पोस्ट को लिखा। अगर आप अपने विचार रखने से रह गये हैं तो अभी भी रख सकते हैं।
अब आप बतायें आपकी टिप्पणियों से क्या अपेक्षायें हैं, किस तरह की टिप्पणी आपको अच्छी लगती है।




हम क्यों बतायें कि हम अपने ब्लाग पर टिप्पणी क्यों चाहते हैं? पहले आप बतायें कि आप पूछना क्यों चाहते हैं?
बात को आगे बढ़ाने वाली टिप्पणी आये तो अच्छा लगता है.
हम जिस पोस्ट को पढते है..उस पर टिप्पणी जरूर करते हैं।ताकी ब्लोगर जानले की हमनें उस का चिट्ठा पढा है।
लो, अनूप जी बात को आगे बढ़ाए वाली टिप्पणी कर दिए। अब आप बताईये कि ई सब आप काहे बूझ रहे हैं? लिखे के वास्ते मसाला कम पड़ गया का?

एकठो बात और। आपकी थीमवा में शीर्षक फॉयरफॉक्स में टूट-फूट जाता है, स्टाइल कुछ अधिक ही लग गया है, तनिक उसको ठीक कीजिए।
@अनुपजी, संजय, परमजीत और अमित अपेक्षायें बताने का शुक्रिया।
@अमित, मसाले की बात अगर हम से पूछ रहे हो, तो बतायें देते हैं कि मसाला हमारे पास बहुत है बस तड़का लगाने के लिये टाईम की कमी है। फायरफोक्स में कौन सा शीर्षक सही नही आ रहा।