< Browse > Home / Archive: March 2008

| Mobile | RSS

मुंगेरी की वापसी

अगर आप ३ साल पहले हिंदी चिट्ठाजगत से वाकिफ नही थे तो मुंगेरी को भी नही जानते होंगे। मुंगेरी जब आया था तब हिंदी चिट्ठाजगत में मुट्ठीभर लोग थे जो खुद ही चिट्ठा लिखते और खुद ही आपस में एक-दूसरे का चिट्ठा बांचते। हिंदी चिट्ठे पढ़ने वालों का भी अकाल था उन दिनों, हमने भी [...]

[ More ] March 21st, 2008 | 6 Comments | Posted in खालीपीली |

ढिशुम २००८

बिग बी इंडिया की राजनीति में चले नही तो लगता है उनके चाहने वालों ने सोचा है उन्हें देश से बाहर कहीं और से लड़ाया जाय। अब ये कहीं और अमेरिका के सिवा कहाँ हो सकता है जहाँ आजकल चुनावी माहौल बड़ा गरम है। तो बिग बी ने अमेरिका में चुनाव लड़ने का मन बनाया, [...]

[ More ] March 20th, 2008 | 6 Comments | Posted in खालीपीली |

खुशी के सदमे से एक ब्लोगर की मौत

हमें ये बताते हुए बड़ा दुख हो रहा है कि अत्यधिक खुशी के सदमें से हमारे पहचान के एक ब्लोगर की आकस्मिक मौत हो गयी। सुबह सुबह जब भाभीजी का फोन आया और जब उन्होने ये बताया तो हमें कुछ बूझते नही बना। हमारे डिटेल से पूछने पर इतना ही पता चल पाया कि रोज [...]

शुक्रवार तक राजा भोज सोमवार को गंगू तेली

अगर आप सोच रहे हैं ये किसी व्यक्ति के लिये है तो गलत, आज ये कहावत मैं वास्तव में एक कम्पनी के लिये यूज कर रहा हूँ, कम्पनी जो है अमेरिका का पांचवां सबसे बड़ा Investment बैंक। वो बैंक जो शुक्रवार की सुबह तक अर्श पर था और आज सोमवार की सुबह फर्श पर, वो [...]

[ More ] March 18th, 2008 | 5 Comments | Posted in खालीपीली |

टिप्पणियों से क्या अपेक्षाएं हैं

पिछली पोस्ट में काफी लोगों ने अपने विचार रखे और पूनम ने एक अच्छा सवाल उठाया जिससे ये चर्चा थोड़ा और आगे बड‌े। टिप्पणियों को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएं होती हैं, जाहिर सी बात है टिप्पणियाँ किसे नही अच्छी लगती। लेकिन कई बार होता है कि आप अपनी समझ के अनुसार सोचते हैं अहा ये [...]

[ More ] March 16th, 2008 | 6 Comments | Posted in खालीपीली |

आप टिप्पणी कब और क्यों करते हैं

कुछ समय पहले मैंने अंग्रेजी के एक ब्लोग में इस विषय पर देखा था कि बड़ी अच्छी चर्चा चली थी। सब अपने अपने कारणों को बता रहे थे। तो मुझे लगा क्यों ना हिंदी चिट्ठाकारों में भी इस विषय को उठा के देखा जाय। चाहे आप चिट्ठे लिखते पढ़ते है या सिर्फ पढ़ते हैं, दोनों [...]

[ More ] March 15th, 2008 | 21 Comments | Posted in खालीपीली |

चौंकाने वाला विज्ञापन

मैने शायद इतना चौंकाने वाला विज्ञापन आजतक नही देखा था, इस पर ज्यादा ताज्जुब इस बात का है कि ये एक महिला द्वारा बनाया गया है और एक महिला के ऊपर ही शूट भी किया गया है। ये विज्ञापन जर्मनी में बनाया गया है और वहाँ की ही किसी मैगजीन के लिये। कह नही सकता [...]

[ More ] March 13th, 2008 | 15 Comments | Posted in रहन-सहन |

कबीरा खड़ा बाजार में: कबीर दास और उनके दोहे

ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर कहने वाले कबीर दास जैसा व्यक्तित्व शायद ही किसी और हिन्दी साहित्यकार का होगा। स्कूल के वक्त भी वो कबीर और उनके दोहे ही थे जो आसानी से समझ में आते थे। उनका व्यक्तित्व अनुपम तो था ही लेकिन उनके जन्म को लेकर कई किंवदन्तियाँ भी प्रचलित [...]

[ More ] March 11th, 2008 | 18 Comments | Posted in हिन्दी साहित्य |

पुस्तक-चर्चाः खुबसूरत लोगों को लड़कियां ज्यादा क्यों होती हैं

मैने अभी अभी ये किताब खत्म की है, इस किताब का पूरा नाम कुछ यूँ है – Why beautiful people have more daughters from dating, shopping, and Praying to going to War and Becoming a Billionaire– Two Evolutionary Psychologists Explain Why We Do What We Do। एक किताब के लिये, है ना कुछ लम्बा नाम। [...]

[ More ] March 10th, 2008 | 4 Comments | Posted in Books Reviews, खालीपीली |
  • Page 1 of 2
  • 1
  • 2
  • >