28 Feb
Posted as खालीपीली
Tags:neelam vir, Ontario premierभारतीय महिला पत्रकार ने सोचा भी नही होगा कि हिंदी के अर्थ का अंग्रेजी में अनर्थ हो जायेगा और उसके जेल की हवा खाने की नौबत आ जायेगी।
ये घटना है कनाडा के टोरंटो शहर की, जहाँ नीलम वीर नाम की ये भारतीय महिला साउथ एशिया के एक न्यूज पेपर में रिपोर्टर थी, उन पर ओनटेरियो प्रीमियर Dalton McGuinty को हत्या की धमकी देने के आरोप लगे हैं। अगर इस महिला की माने तो उनकी बात से लगता है कि यहाँ हिन्दी के अर्थ का अंग्रेजी में अनर्थ हो गया। लेकिन सवाल ये है कि ये ४० साल की भारतीय महिला अच्छा खासा पढ़ी लिखी हैं, वनस्पति शास्त्र में पी।एच डी, पार्ट टाईम टीचर भी हैं वो ऐसी भाषा में कैसे लिख सकती हैं, कैसे उस महिला को ये भी नही मालूम था कि दोस्तों के बीच की आपस की बातचीत की भाषा प्रोफेशनल बातचीत में नही उपयोग में लायी जा सकती।
घटना कुछ यूँ हुई कि इन मोहतरमा को कहीं से पता चला कि ओनटेरियो प्रीमियर को भारतीय गुलाब जामुन बड़ा पसंद हैं तो इन्होंने गुलाब जामुन बनाने का सामान (मुझे लगता है गिट्स का पैकेट रहा होगा) ओनटेरियो प्रीमियर के आफिस भेजा। उसके बाद वो ओनटेरियो प्रीमियर को मिला कि नही ये जानने के लिये ई-मेल लिखी,
After sending the packet, she emailed the premier asking whether his office staffer Monica Masciantonio had delivered him the packet. ?If she didn’t give it to you, I’ll kill her,? she wrote. She later explained that it was just a term of endearment for loved ones ?whom we often taunt with ?main tumhari jaan nikal doongi? in Hindi (I will kill you).?
उन्हे गिरफ्तार करके इस शर्त पर छोड़ दिया कि वो ओनटेरियो प्रीमियर से संपर्क नही कर सकती, ना उनके स्टाफ से ना फैमली से और ना ही उनके आफिस जा सकती है। लेकिन इसके लिये महिला ने ई-मेल लिखकर फिर से माफी मांगी और कहा कि ये cultural misunderstanding थी, बस इसी बात पर उन्हें दुबारा गिरफ्तार कर दिया क्योंकि उन्होने उस शर्त का उल्लंघन किया जिस पर उन्हे पहले छोड़ा गया था, अब ये महिला भारत वापस जाकर अपना टीचर वाला जॉब फिर से शुरू करना चाहती है लेकिन उन्हें फिलहाल कनाडा छोड़ने की इजाजत नही है।
अब डिटेल में इस खबर को यहाँ पढ़िये।
12 Responses
ghughutibasuti
February 28th, 2008 at 11:29 am
1और भेजो गुलाबजामुन के पैकेट ! स्वयं खा लेतीं तो क्या बुरा रहता ?
घुघूती बासूती
anuradh srivastav
February 28th, 2008 at 1:58 pm
2वाकई भाषा का प्रयोग सोच-समझ कर करना चाहिये।
जीतू
February 28th, 2008 at 3:38 pm
3सही है,
गुलाब जामुन बहुत महंगे पड़ गए। इसे कहते है आ बैल मुझे मार! क्या जरुरत थी गुलाब जामुन का पैकेट भेजने की। कुवैत मे भेजती, कम से कम हम गिरफ़्तार तो ना करवाते।
mamta
February 28th, 2008 at 3:43 pm
4इसे ही तो कहते है नेकी कर दरिया मे डाल।
Sanjeet Tripathi
February 28th, 2008 at 6:52 pm
5क्या कहें इस लोचे को!!
बाकी गुलाब जामुन को कुछ नही कहेंगे बस सीधे गप्प्प्प से अंदर;)
सुजाता
February 28th, 2008 at 8:58 pm
6haa haa haa ! hamari hansee nikal rahi hai kisee kee jaan par bana aayee hai .
sanjupahari
February 28th, 2008 at 9:50 pm
7agar ye mahila naa hoke koi 18-20 saal ki sundari rahi hooti ,,,, main to marne ke liye bhi taiyyar thaa (but gulabjamun khane ke baad ofcourse)..
waise is desh main to bach ke rahna bhai loog….
kabhi train station ya shooping ke time pe ye gana mat gaa dena,, BEEDI JALAAYILE JIGAR se PIYA ,,, pata chala fire alarm to baja hi baja santh main public place main peene ki himakat main 911 le gayee ander…apne paas to bhiayya teaching ki job bhi nai hai>>>
लावण्या
February 28th, 2008 at 10:15 pm
8ये बड़े बड़े नेता अक्सर अपने बिल में ” शेर ” और असल में,
” चूहे ” की तरह ‘बहादुर होते हैं !!
अनूप शुक्ल
February 28th, 2008 at 11:35 pm
9क्या लफ़ड़े हैं।
RA
February 28th, 2008 at 11:55 pm
10भाषा का प्रयोग कब ,कहाँ और कैसे यह जानना अच्छा है यानि औपचारिक, अनौपचारिक माहौल में अलग अलग तरीके से बोल चाल आचार व्यवहार होना ही उपयुक्त रहता है। और फिर जब cultural differences हों तो और भी ख़्याल करना चाहिये।
बेचारी इन शिक्षिका को यह व्यवहारिक ज्ञान मिलना बड़ा मँहगा पड़ा ।
महामंत्री-तस्लीम
February 29th, 2008 at 3:06 pm
11बहुत अच्छा उदाहरण दिया है आपने। वाकई किसी भी बात को कहने से पहले एक बार तो सोच ही लेना चाहिए।
amit
March 1st, 2008 at 4:42 pm
12इसमें और किसी का दोष नहीं वरन् अमुक महिला का ही दोष है। इतना पढ़े लिखे होने के बाद भी उनको यह नहीं पता कि कब किससे किस तरह से बात की जाती है। जिस व्यक्ति को आप जानते नहीं और जो आपको नहीं जानता उससे इस तरह के जुमले का प्रयोग करना जो कि सिर्फ़ अच्छे मित्रों के साथ किया जाता है - कोई आश्चर्य नहीं कि प्रीमियर साहब को इनके जुमले के पीछे का भाव समझ न आया, किसी को भी नहीं आएगा। यदि कोई अपरिचित इन महिला से ऐसे बोले तो इनको भी वैसा ही लगेगा जैसा प्रीमियर महोदय को लगा!!
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