26 Feb
Tags:फिल्म, chak de, filmfare awards, guru, taare jameen parसबसे पहले अंग्रेजी पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद ना वो यूँ स्विपयाते ना हम ये पोस्ट लिखकर इसका मतलब पूछ पाते। मन को काम से आराम देने के लिये हमने सोचा क्यों ना कुछ खबर-शबर पढ़ी जाय, देखा तो सभी अंग्रेजी खबरची स्विपयाने में लगे थे। कोई हैडिंग में स्विपया रहा था तो कोई कंटेंट में। उदाहरण के लिये ये बानगी देखिये IBN-Live की पेशकश
हमने जाकर देखा तो पाया कि अभी अंदर ठीक से स्विपयाया नही है, लगता है काम चालू है इसलिये २-३ खबरें और देखने लगे तो देखा अब वो स्विपयाना छोड़ किसी और राग में सरगम छेड़ रहे हैं, आप भी देखिये
हमें अभी तक ये समझ ही नही आ रहा था कि इस बार शाहरूख को छोड़ आमिर से कैसे स्विपयाया जा रहा है इसलिये बाल की खाल निकालने की गरज से इसकी तह तक पहुँचे तो पता चला कि हम तो Sweep का मतलब ही गलत समझ के चल रहे थे, आप भी ये एवार्ड तालिका देखियेः
तारे जमीन पर - कुल 5 अवार्ड, गुरू - 5, चक दे इंडिया - 4, लाईफ इन मैट्रो - 3, सांवरिया - 3, ओम शांति ओम - 2, जब वी मेट - 2 और फिर कुछ और फिल्में 1-1 एवार्ड।
अब क्या आप हमें समझा सकते हैं “तारे जमीन पर” ने कैसे स्विपयाया या फिर चक दे और तारे जमीन पर ने कैसे राज (Rule) किया, गुरू को कहाँ गुल कर दिया। हमारी समझ का लोचा है शायद इसीलिये पूछ रहा हूँ Sweeps का मतलब क्या होता है रे।
6 Responses
ghughutibasuti
February 26th, 2008 at 1:04 pm
1स्वीप माने झाड़ू लगाना । हुआ यों कि जब तक गुरू झाड़ू लगाने आते, तारे…….. ने सफाई पुंछाई कर दी थी । अब पुरुस्कार तो गुरु को भी मिले पर गुरु झाड़ू लगाने का अवसर चूक गए । वैसे भी जब शिष्य थे इस काम के लिए तो गुरु को कष्ट देना हमारी सभ्यता के विरुद्ध है ।
घुघूती बासूती
संजय बेंगाणी
February 26th, 2008 at 3:23 pm
2घूघुतिजी ने समझा ही दिया है, तो हम क्या कहें, सुपड़ा साफ करने के बारे में. पतरकार बन्धू जरा उत्साहित जीव होते है. हो जाता है….
mamta
February 26th, 2008 at 3:29 pm
3लीजिये घुघूती जी ने तो अर्थ बता ही दिया है।
समीर लाल
February 26th, 2008 at 8:50 pm
4आई होप..समझ ही गये होगे..ज्ञानी सारे बोल चुके.
Balendu Sharma Dadhich
February 27th, 2008 at 4:22 pm
5जिस अखबार और चैनल की दिलचस्पी जिस फिल्म में रही होगी, उसने उसी को स्वीपवा दिया। आपने देखा ही होगा कि आजकल फिल्म रिलीज होने के समय समाचार चैनलों पर उनसे संबंधित प्रायोजित चर्चाएं और खबरें चलती हैं। कई बार तो अपने समाचार चैनल दिन भर फिल्मी राग गाते रहते हैं। यह बेवजह नहीं है। अर्थव्यवस्था है। और जहां अर्थव्यवस्था इन्वाल्व हो वहां स्वीपियाना तो छोटी सी बात है।
amit
March 1st, 2008 at 4:59 pm
6कई बार क्या बालेन्दु जी, कुछेक समाचार चैनल तो पंजाब केसरी माफ़िक बॉलीवुड के ही समाचार चैनल हैं पक्के, अब आज तक को ही लीजिए…..
RSS feed for comments on this post · TrackBack URI
Leave a reply
अनमोल वचन Quotes
There are only two tragedies in life: one is not getting what one wants, and the other is getting it - Oscar WildeCategories
Archives
Meta
Subscribe
कंट्रोल पैनल
Recent Entries
Recent Comments
Most Commented
निठल्ला चिन्तन is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease