अमित और ज्ञानजी उस पोस्ट में ये था व्यस्कों के लिये
ये व्यस्कों का लफड़ा भी अजीब किस्म का होता है जैसे ही 18 क्रॉस किया नही कि उसे लगता है कि अब वो बच्चा तो रहा नही इसलिये तुरंत बच्चों जैसी किसी भी बात से किनारा कर लेता है। लेकिन मजे की बात ये है कि बाल चाहे सफेद होने लगे, कमर झुकने लगे, आंख धुंधलाने लगे, बुढ़ापे की चादर भी लिपट जाये फिर भी जवानी से किनारा नही करता।
हमने अपनी पिछली एक पोस्ट लिखी, अब चूँकि उसमें बच्चों की पुस्तक के सवाल थे इसलिये टाईटिल रखा “सिर्फ बच्चों के लिये” अब ये तो हम भी जानते हैं और चिट्ठाजगत के लोग भी कि फिलहाल तो इस ब्लोगिंग की दुनिया से कोई भी बच्चा वाकिफ नही है चाहे वो किसी भी भाषा में की जा रही हो। इसलिये समझने वाली बात थी कि टाईटिल चाहे कुछ भी उसमें सिर्फ बच्चों के लिये ही हो ऐसा जरूरी नही। लेकिन हमें क्या पता था कि ये हिंदी चिट्ठाजगत (पाठक और लेखक) एक शुतुर्मुग की तरह है, जैसे वो सिर छुपा के समझता है उसे कोई देख नही रहा उसी तरह हम लोग टाईटिल देखकर ही पूरे लेख का अनुमान लगा लेते हैं कि इसमें अपने पढ़ने लायक कुछ नही। इसलिये 24 घंटे बाद जब हम उस पोस्ट में पूछे सवालों का जवाब लिखने बैठे तो देखा कि अरे पोस्ट में तो बामुश्किल 10-12 ही हिट आयी है (ब्लोगवाणी)।
बस उसी क्षण हमने सोच लिया कि अगली पोस्ट का टाईटिल रखेंगे “सिर्फ Adults के लिये“, साथ में शुरूआत भी इसी बात से जानबूझ कर करी कि अरे भईया आने से डरो नही, हम जो कुछ भी लिख रहे हैं वो वाकई में व्यस्कों के लिये ही है ऐसा बच्चों जैसा कुछ भी नही। आखिर हम भी तो मर्द जात ही हैं ना इस जात की फितरत थोड़ी बहुत तो समझते ही हैं, हमें तभी लग गया था कि अब कम से कम पिछली पोस्ट से डबल हिट तो आयेंगी ही। और हुआ भी वही दबा के पब्लिक आयी झांकने।
ये सारा खेल ही सनसनी फेलाने का है चाहे समाचार की ब्रकिंग न्यूज हो या हिंदी चिट्ठाजगत के पोस्ट का टाईटिल, यही परखने के लिये दोनों पोस्टे लगभग एक ही वक्त में पोस्ट करी। इसलिये इतना तो तय है आने वाले वक्त में हिंदी चिट्ठे सिर्फ दो वजह से ही पढ़े जायेंगे। पहली सनसनी हैडिंग को देखकर और दूसरी आपके दूसरों के साथ पारस्परिक व्यवहार और मित्रता को देखकर।
ये जो चित्र चेपा है पोस्ट के साथ, उसमें 2 दिन बाद भी सबसे नीचे की पोस्ट में 15 हिट हैं, सबसे ऊपर की पोस्ट में 1 दिन बाद 19 हिट हैं और जबकि बीच वाली पोस्ट में 1 दिन में ही 39 हिट।
इसलिये भैया अमित और ज्ञानजी उस पोस्ट में हमने व्यस्कों को सिर्फ ये बताने की गुस्ताखी करी की हम अभी तक जो कुछ भी लिख रहे हैं वो व्यस्कों के लिये ही है, बच्चों के लिये कुछ नही इसलिये हमारी गली आना बंद ना करें।




tarun ji,
Maan gaye apako!!!
Atyant hi Nithalla Chintan tha..
Khoob rahi
वाह जी! वयस्क हो कर चिबिल्लई करते हैं!
(चिबिल्लई माने बच्चे की शरारत!)
मस्त आईडिया है गुरु!! ये निठल्ला चिंतन का गुर सीखना होगा आपसे तो अब!!
तरूण भाई, बाकियों की मैं नहीं जानता लेकिन कुछेक ब्लॉग ऐसे हैं जिनपर मैं कभी भी इसलिए नहीं जाता कि उस पर छपी किसी पोस्ट का शीर्षक अच्छा है कि नहीं। उन ब्लॉगों पर कोई भी पोस्ट छपी हो मैं पढ़ता हूँ, रुचिकर नहीं लगती तो पूरी नहीं पढ़ता परन्तु नज़र तो अवश्य मारता हूँ। आपका यह निठल्ला चिन्तन भी उनमें से एक है कि नज़र तो अवश्य मारता हूँ कि क्या नया लिखा है, इसलिए कम से कम मैं तो यहाँ शीर्षक के कारण नहीं आऊँगा!!
बाकी आपने सही कहा, यह वाकई एक साबित हो चुका तथ्य है कि सनसनीखेज शीर्षक वाली पोस्ट को अधिक लोग देखने आते हैं। जैसे मैंने पिछले वर्ष यह पोस्ट लिखी थी - इट्स ऑल अबाऊट सेक्स बेबी - जिस पर एकाएक ही खूब हिट हुए थे!
अमित ये तो हमें पता है और ऐसे कुछ एक ब्लोग सभी की लिस्ट में होते हैं और तुम्हारी इस पोस्ट का याद नही आ रहा कि हमने देखी भी है या नही कोई बात नही एक बार और जा कर देख लेंगे जहाँ इतनी ज्यादा हिट पड़ी है एक और सही। हम तुम्हारा ब्लोग हमेशा पड़ते हैं इसलिये संभव हो कि ये भी देखी हो
ठीक है जी..हम भी अपने ब्लोग का नाम बदल कर सेक्सी रखने वाले है गलत ना समझे हम उसमे गणित पढायेगे..
“sec C= 1/cos C” पर कम से कम लोग तो आयेगे..:)
[...] ये सारे सवाल मुझ से लिटिल ड्रैगन ने पूछे थे जब वो इस पुस्तक को पढ़ रहा था - Roaring with Laughter, अगर आप सोच रहे हैं इस पोस्ट का टाईटिल ये क्यों रखा तो उसके कारण के लिये यहाँ पढ़िये। [...]