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पानी कहाँ से लाओगे

मनीषा के नये साल के पहले लेख में पहले पढ़ा फिर अभय ने भी कहा पानी नही मिलेगा, अब जब सब जगह नीर के लिये नीर बहाया जा रहा था तो हमें लगा कि क्यों ना हम भी लगे हाथ पूछ लें, बोलो पानी कहाँ से लाओगे।

अब शब्दों के मामले में हम इन दोनों विभूतियों से काफी पिछड़े हुए हैं, इसलिये फिर भी कोशिश करते हैं ये पूछने कि पानी कहाँ से लाओगे।

गली नुक्कड़ चौराहे में, बर्गर पिज्जा खाओगे,
कोला की है नदिया बहती, पानी कहाँ से लाओगे।

A.C से घर सजाया तुमने, सैकड़ों बल्ब लगाओगे,
रात आयी तो तुम बोलो, बिजली कहाँ से लाओगे।

लाख टका की नेनो लाकर, सब पर रौब जमाओगे,
सरपट भाग सके ये जिसमें, वो सड़क कहाँ से लाओगे।

कंकरीट के उगा कर जंगल, खुद का सिर छुपाओगे,
अपने बच्चों को दिखा सको, वो पेड़ कहाँ से लाओगे।

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5 Responses to “पानी कहाँ से लाओगे”

  1. kakesh Says:

    सही है.

  2. Manisha Pandey Says:

    अरे तरुण, कौन कहता है शब्‍दों की कलाकारी में आप कहीं से भी कम हैं…. अच्‍छी कविता रच दी… हम तो गद्य में बात कर रहे थे, आपने पद्य रच डाला….

  3. Sanjeet Tripathi Says:

    बढ़िया!! कहते कहते ही पते की बात अच्छे तरीके से कह गए आप!

  4. अभय तिवारी Says:

    क्या बात है तरुण.. बहुत खूब .. ज़बरदस्त!

  5. मीनाक्षी Says:

    अंतिम दो पंक्तियों ने दिल मोह लिया ..सरल सहज रूप मे गहरी बात कह दी.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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