ऊपर दिये गये टाईटिल का बड़ा वर्जन कुछ यूँ है - प्रत्यक्षा, अभय, ज्ञानजी, प्रियंकर और अन्य (अगर कोई है) के बीच बहुत जल्द आपसी सौहार्द बड़ेगा। इससे पहले आप कुछ सोचें हम बता दें कि ये बात हम कोई ज्योतिषी गणना करके नही बता रहे। बल्कि हिंदी चिट्ठाजगत के पिछले ट्रैंड के बल पर ये गणित लगा रहे हैं।

हिंदी चिट्ठाजगत का इतिहास गवा है जब जब जिनके बीच कुछ अत्यधिक संवाद की स्थिति उत्पन हुई है बाद में उनके बीच उतना ही भाईचारा देखने को मिला है। हमने कुछ दिनों पहले थोड़ी सी चिंगारी देखी तो थी लेकिन तब अनुमान ना था कि ये इतनी सुलगेगी। उत्प्रेरकों (बीच में लिखे चिट्ठों) का आदान प्रदान तो पता नही लेकिन कुछ कुछ अनुमान तो लगा सकते ही हैं। अगर आपको लगे ये सब समझने में हमसे कोई गलती हो रही है तो समझ लीजिये कि हमारी चश्में का नंबर बदलने का टाईम आ गया है।

कोई चाहे कुछ भी कहे लेकिन हम उन महिला चिट्ठाकारों को दाद जरूर देना चाहेंगे, जो एक तरफ घर संभाले है दूसरी तरफ आफिस और तीसरी तरफ चिट्ठाकारी भी करती हैं। इस सबके लिये बहुत जबरदस्त टाईम मैनेजमेंट और एनैर्जी की जरूरत होती है और जाहिर सी बात है इन बातों में इनका कोई सानी नही।

ये पोस्ट तो महज इसलिये लिखी है कि क्या पता ये कुछ पानी के छिंटो का काम कर जाय। अगर किसी को इसमें भी कुछ उत्प्रेरक जैसी बात दिखायी देती है तो धन्य भाग हमारे। हमारी भी किसी के साथ सौहार्द बढ़ाने की स्थिती बनेगी।

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