…जरा याद उन्हें भी कर लो

गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित पुष्प की अभिलाषा देश के उन सभी शहीदों को समर्पित है जिन्होंने आजादी दिलाने में और आजादी के बाद उसकी सुरक्षा करने में अपनी जान की बिल्कुल भी परवाह नही की। उन्ही सभी को हमारी भावपूर्ण श्रदांजलि


चाह नही मैं सुरबाला के
गहनों में गूथा जाऊँ।
चाह नही प्रेमी माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ।
चाह नही सम्राटों के शव पर
है हरि डाला जाऊँ।
चाह नही देवों के सिर पर चढूँ
भाग्य पर इठलाऊँ।

मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक
मात्रभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जायें वीर अनेक।


आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई, पिछले साल 15 अगस्त के उपलक्ष्य में हमने ये विडियो बनाया था वही एक बार फिर पेश है। (15 अगस्त को 26 जनवरी पढ़कर देखते जाईये ;))

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Tarun
निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारों की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की; संक्षेप में कहूँ तो ये है थोड़ी मस्ती थोड़ा चिंतन।

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5 Responses to “ …जरा याद उन्हें भी कर लो ”

  1. गणतंत्र दिवस की बधाई हो मित्र! भारतीय गण तंत्र को कुल मिला कर देखा जाये तो प्रसन्न होने और गर्व करने के लिये बहुत कुछ है।
    चलें, जरा परेड देख आयें।

  2. आप सभी को गणतंत्र दिवस की ढेर सारी बधाइयां। आज मेरी आप सभी पढ़े-लिखे लोगों से यही दरख्वास्त है कि 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इडिया एक्ट और 1950 के अपने संविधान के अंतरों को (जितने भी हैं) अगर हम समझ लें तो हमें अपनी आजादी का मतलब ज्यादा अच्छी तरह साफ हो जाएगा।

  3. तरुण जी आप को भी ओर सब को गणतंत्र दिवस की बधाई, यह कविता मेने आगरा मे ४,या ५ मे पढी थी, सुना हे आज कल ऎसी कवितओ की जगह योनशिक्सा पाढाई जा रही हे

  4. बधाई व शुभकामनाएं गणतंत्र दिवस की आपको भी!

  5. बहुत अच्छी पोस्ट। ये मेरे वतन के लोगों मेरा पसन्दीदा गीत है। फिर से सुनकर अच्छा लगा!

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