गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित पुष्प की अभिलाषा देश के उन सभी शहीदों को समर्पित है जिन्होंने आजादी दिलाने में और आजादी के बाद उसकी सुरक्षा करने में अपनी जान की बिल्कुल भी परवाह नही की। उन्ही सभी को हमारी भावपूर्ण श्रदांजलि


चाह नही मैं सुरबाला के
गहनों में गूथा जाऊँ।
चाह नही प्रेमी माला में बिंध
प्यारी को ललचाऊँ।
चाह नही सम्राटों के शव पर
है हरि डाला जाऊँ।
चाह नही देवों के सिर पर चढूँ
भाग्य पर इठलाऊँ।

मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक
मात्रभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जायें वीर अनेक।


आप सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई, पिछले साल 15 अगस्त के उपलक्ष्य में हमने ये विडियो बनाया था वही एक बार फिर पेश है। (15 अगस्त को 26 जनवरी पढ़कर देखते जाईये ;) )


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