25 Jan
Posted as क्रिकेट, क्रिकेट और खेल, खेल खिलाड़ी
Tags:क्रिकेट, क्रिकेट और खेल, खेल खिलाड़ी, BCCI, Cricket, hockey, sports, super bowlआजकल अचानक बड़े बड़े व्यापारियों के अंदर खेल प्रेम जा चुका है कोई मुम्बई की टीम खरीद रहा है, कोई कलकत्ता की। कभी कही देखा था लोग मुर्गे लड़वाते थे और उन पर दाँव लगाते थे, आज जमाना बदल चुका है। समस्या इस बात पर नही है कि व्यापारी पैसा लगा रहे हैं, दुख इस बात का है कि बंदूक खेल प्रेम के कंधे में रख कर चलायी जा रही है।
ये देश के राष्ट्रीय खेल (चक दे भी चकमा दे गया, लिंक पर क्लिक करके देखिये आस्ट्रेलिया से लौट कर कितने आलीशान कमरों में महिला हाकी टीम रही) के लिये क्यों नही किसी का खेल प्रेम जागता। अब जागेगा भी कैसे जगाने वाला तो पैसा है और वहाँ फाके की नौबत है जगाने के लिये पैसा कहाँ से आयेगा। क्रिकेट में तो इंडिया अक्सर जीत जाया करता है, ये सब लीग हॉकी और सॉकर (फुटबाल) के खेलों के लिये बनानी चाहिये थी। वहाँ ज्यादा सुधार, मेहनत और अच्छी सुविधाओं की जरूरत है।
खैर जिनके पास पैसा है उनका खेल प्रेम तो जाग गया, रह गये हम जैसे। हम तो यही कह सकते हैं खेल प्रेम मॉय फुट यानि कि न्यूयार्क के भीमकाय विरूद्ध नये इंगलैंड के देशभक्त।
6 Responses
Gyan Dutt Pandey
January 25th, 2008 at 7:23 am
1सही है जी - खेल प्रेम, माई फुट। और पैसा प्रेम - माई फ्रंट फुट।
अभय तिवारी
January 25th, 2008 at 4:27 pm
2वैसे खेल का कोई नुक़्सान भी न होगा इस से तरुण जी!
Sanjeet Tripathi
January 25th, 2008 at 4:55 pm
3बिन पैसा सब सून रे भाया। पईसा है तो सब है न;)
Manish
January 26th, 2008 at 2:09 am
4गुरू - अभी तो कलंदर आए हैं - खेल तो शुरू भी नहीं हुआ -
Tarun
January 26th, 2008 at 6:18 am
5@अभयजी बात सही है, खेल का नुकसान नही होगा लेकिन क्रिकेट के खेल का। और इस खेल का तो वैसे भी कुछ नुकसान नही हो रहा था, लेकिन जो बाकि खेल हैं उनका तो शर्तिया नुकसान होना है।
@ज्ञान जी, @संजीत, पैसे के लिये आप सही कह रहे हैं
Tarun
January 26th, 2008 at 6:19 am
6@मनीश, अच्छा लगा आपका कमेंट पढ़कर और बात आप सही कह रहे हैं। अभी तो सिरएफ कलंदर आये हैं।
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