24 Jan
Posted as खालीपीली, शेरो-शायरी और गजल, मस्ती-मजा, व्यंग्य
Tags:मस्ती मजा, व्यंग्य, शेरो शायरी और गजलमेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद मुस्कायें। चाहे हो टिप्पणी की हरियाली या टिप्पणी की ना आये बारी। बुद्धिजिवी के मन को भाये या रद्दी बनकर रह जाये। आओ तुम्हें अब एक गीत सुनाऊँ, ब्लोगर का दुखड़ा कह जाऊँ।
आये और छा जाये
टिप्पणियाँ बरसा जाये।
वाहवाही ये बटोरे
बाकी घूमें ले कटोरे।
शेयर गिरे या रत्न बटें
ना मेरे लिखे से नजर हटे।
पुरस्कार कोई भी बाँटे
मेरी ही रचना को छाँटे।
सर्व प्रिय मैं कहलाऊँ
जिधर भी मुँह उठाके जाऊँ।
चोरी करने जो भी आये
सिर्फ मेरी रचना ले जाये।
इंटरनेट जब भी कोई खोले
मेरे लिखे की ही जय बोले।
काश ‘तरूण’ ये सच हो जाता
‘स्वर्ण कलम’ मैं भी घर लाता।
शुरू की कुछ लाईनों का विश्लेषणः पहली 6 लाईनें निठल्ला चिंतन के निठल्ले नियम पर आधारित है (इसे गुरूत्वाकर्षण के नियम की तर्ज पर पढ़ा जाय)।
निठल्ला नियम 1 (पहली दो लाईनों के लिये): किसी भी पोस्ट को मिलने वाले पाठकों या टिप्पणियों की संख्या उस पोस्ट के लिखे (छापे) जाने के वक्त पर निर्भर करती है।
निठल्ला नियम 2 (दूसरी दो लाईनें): आते ही छा जाने वाली पोस्ट या तो नियम 1 पर आधारित होती है या ये बहुत अच्छी लिखी हुई होती हैं।
निठल्ला नियम 3 (तीसरी दो लाईनें): वाहवाही बटोरने वाली पोस्ट या तो नियम 2 पर आधारित होती हैं या इसके लिखने वाले अच्छे व्यवहार के मालिक होते हैं जो सबसे बनाकर रखते है अर्थात ये दूसरे चिट्ठों पर जाकर वाहवाही की क्रिया करने से अपने चिट्ठों पर वाहवाही प्रतिक्रिया के रूप में पाते हैं।
[स्वर्ण कलम, तरकश द्वारा दिये जाने वाल पुरस्कार है जो हर साल किसी एक लोकप्रिय ब्लोगर को दिया जाता है, ये ब्लोगरों द्वारा ही नामांकित और वोट द्वारा चुने जाते हैं।]
चोरों और नक्कालों के लिये वैधानिक चेतावनीः ऊपर लिखी इन बातों को सच ना समझा जाये, चोरी से इस पोस्ट को कहीं ना छापा जाय। हम ब्लोगरस की सेना लायेंगे फिर तिगनी का नाच नचायेंगे।
अंत में एक फाईनल नोट, हमारी ये पोस्ट पढ़ने के लिये लिखी गयी है, लिखने के लिये लिखी गयी पोस्ट के लिये दूसरे ब्लोगरस का दरवाजा खटखटायें
।
कल लिखी मेरी इस पोस्ट में कुछ तकनीकी प्रोब्लम आयी थी, इसलिये दोबारा पब्लिस कर रहा हूँ।
4 Responses
mamta
January 24th, 2008 at 10:53 pm
1:)
Sanjeet Tripathi
January 24th, 2008 at 11:10 pm
2धांसू लिखे हो, मस्त है!!
ghughutibasuti
January 25th, 2008 at 2:55 am
3हम तो आपकी बताई धुन पर ही इसे गा रहे हैं । और ब्लॉगर्स की सेना का स्वागत है बशर्ते वे अपना वोट डाल आये हों । इसमें मुझे वोट डाल आएँ हों कहने की कोई आवश्यकता नहीं नजर आती, क्योंकि यदि वोट दिया होगा तो जाहिर है हमें ही दिया होगा ।
घुघूती बासूती
रविरतलामी
January 25th, 2008 at 8:39 pm
4गजब दोहे हैं. पूरे निठल्ले!
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The true measure of a man is how he treats someone who can do him absolutely no good - Samuel JohnsonCategories
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