क्रिकेटः बेईमानी भी काम ना आयी

तो आखिर आस्ट्रेलिया अपना बनाया रिकार्ड तोड़ने से रह गया फिर से वहीं 16 पर आ कर सुई अटक गयी। वैसे अगर थोड़ा सोचें तो आस्ट्रेलिया का सिडनी में किये गये व्यवहार का कारण समझ में आता है। सिडनी टेस्ट से पहले रिकी पोटिंग की आस्ट्रेलिया की टीम को स्वीव वॉ के बनाये लगातार 16 जीत के रिकार्ड को तोड़ने के लिये 2 मैच की जरूरत थी।

दोनों बार आस्ट्रेलिया के विजय रथ को इंडिया ने ही रोका

ये शायद पोटिंग और आस्ट्रेलियाई टीम दोनों सोचते थे कि किसी तरह सिडनी टेस्ट जीत जायें तो पर्थ में उनकी जीत पक्की है क्योंकि सारे रिकार्ड यही कहते थे। उनको साथ में ये भी लगता होगा कि पर्थ की फास्ट पिच पर भारतीय तो शायद ही टिक पायें। इसलिये पर्थ की जीत वो शुरू से मानकर चल रहे थे यानि कि पर्थ पर रिकार्ड तोड़ने का उन्हें पहले से ही लग रहा होगा।

बस उससे पहले सिडनी टेस्ट में जीतना बहुत जरूरी था और इसके लिये ही आस्ट्रेलिया और पोटिंग दोनों ने सारी खेल भावना ताक पर रख साम दाम दंड भेद की भावना के तहत बेईमानी दिखायी। यानि कि जमीन से छुकर पकड़े हुए कैच के लिये अंपायर पर दबाव बनाकर आऊट माँगा। शायद आस्ट्रेलियाई टीम के आक्रामक रवईया का प्रतिफल है कि अंपायर कई बार आस्ट्रेलिया के हक में फैसला दे देते हैं।

उनकी तरकीब काम में आयी और आस्ट्रेलिया सिडनी मैच जीत गया और शायद यही जीत उनकी पर्थ में हार का कारण बनी। सिडनी में जो कुछ हुआ उसका हल्ला इंडिया तक पहुँचा, जनता के साथ साथ इस बार खिलाड़ियों में भी रोष जगा और उन्होने अंपायर बदलने की मांग की। अंपायर बदले गये और फिर पर्थ का मैच खेलने जब इंडिया उतरी तो उन्हें अपनी बात सिद्ध करने के लिये मैच जितना ही था, आस्ट्रेलिया पहुँची ओवर कोनफिडेंस के साथ। इस तरह पर्थ का मैच हुआ आस्ट्रेलिया और इंडिया के मध्य नाकि आस्ट्रेलिया अंपायर और इंडिया के मध्य। नतीजा इंडिया मैच जीता और आस्ट्रेलिया के दूसरे विजय रथ को भी रोकने का हक इंडिया को हासिल हुआ।

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Tarun

One Response to “ क्रिकेटः बेईमानी भी काम ना आयी ”

  1. sahi kaha tarun bhai..khel bhavna bhi kuch hoti hai…ab to maan hee lejiye bhartiyon kee ‘haay’ lag hee jati hai..jab kumble jaise khiladi ko gusaa aane lage to jaroor kuch sahi nahi hai.

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