19 Jan
Posted as खालीपीली, शेरो-शायरी और गजल, समाज और समस्या
Tags:शेरो शायरी और गजल, समाज और समस्या, water road electricity environment problemमनीषा के नये साल के पहले लेख में पहले पढ़ा फिर अभय ने भी कहा पानी नही मिलेगा, अब जब सब जगह नीर के लिये नीर बहाया जा रहा था तो हमें लगा कि क्यों ना हम भी लगे हाथ पूछ लें, बोलो पानी कहाँ से लाओगे।
अब शब्दों के मामले में हम इन दोनों विभूतियों से काफी पिछड़े हुए हैं, इसलिये फिर भी कोशिश करते हैं ये पूछने कि पानी कहाँ से लाओगे।
गली नुक्कड़ चौराहे में, बर्गर पिज्जा खाओगे,
कोला की है नदिया बहती, पानी कहाँ से लाओगे।A.C से घर सजाया तुमने, सैकड़ों बल्ब लगाओगे,
रात आयी तो तुम बोलो, बिजली कहाँ से लाओगे।लाख टका की नेनो लाकर, सब पर रौब जमाओगे,
सरपट भाग सके ये जिसमें, वो सड़क कहाँ से लाओगे।कंकरीट के उगा कर जंगल, खुद का सिर छुपाओगे,
अपने बच्चों को दिखा सको, वो पेड़ कहाँ से लाओगे।
5 Responses
kakesh
January 19th, 2008 at 10:51 am
1सही है.
Manisha Pandey
January 19th, 2008 at 11:37 am
2अरे तरुण, कौन कहता है शब्दों की कलाकारी में आप कहीं से भी कम हैं…. अच्छी कविता रच दी… हम तो गद्य में बात कर रहे थे, आपने पद्य रच डाला….
Sanjeet Tripathi
January 19th, 2008 at 1:04 pm
3बढ़िया!! कहते कहते ही पते की बात अच्छे तरीके से कह गए आप!
अभय तिवारी
January 19th, 2008 at 4:47 pm
4क्या बात है तरुण.. बहुत खूब .. ज़बरदस्त!
मीनाक्षी
January 20th, 2008 at 2:20 am
5अंतिम दो पंक्तियों ने दिल मोह लिया ..सरल सहज रूप मे गहरी बात कह दी.
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