इंडिया को माधुरी नही फूलन की वापसी चाहिये
अभी पिछले साल के आखिरी में माधुरी धकधकाते हुए बालीवुड वापस आयीं तो सब जगह चर्चे होने लगे। लेकिन वैसे अगर देखा जाये तो वो नही भी आती तो कुछ फर्क नही पड़ना था। क्योंकि माधुरी की वापसी से बालीवुड में फर्क पड़ता इंडिया में शायद ही। इंडिया में फर्क देखना है तो फूलन की वापसी चाहिये वो भी एक नही अनेक।
नये साल के स्वागत में होने वाले रात के हंगामे में जो कुछ मुम्बई में हुआ वो कोई नया नही था, शायद पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। अभी कुछ दिनों पहले खबर देखी तो मुझे लगा कि अखबार ने गलती से पिछले साल की खबर छाप दी है। लेकिन थोडा इधर उधर हाथ मारा तो लग गया कि ये तो इस साल की ही खबर है।
दारू पीकर (और बगैर पिये) सरे आम इस तरह की हरकतें करने वालों को सजा देने के बजाय सीधा ईराक या अफगानिस्तान में नौकरी करने भेज देना चाहिये। अब भैये बताओ तो सुपर पावर बनने की राह में चलना किस काम का जहाँ महिलायें स्वतंत्रता से ना जा सके। बाहर वालों के लिये देश तो सुपर पावर लेकिन अंदर सरकार और प्रशासन दोनों बिना पावर, उपद्रवी शोर मचावे जनता हाय तौबा करे।
सरकार के लिये बहुत जरूरी हो गया है कि जनसंख्या पर नियंत्रण सख्ती से करना शुरू कर दे नही तो ये ही सरकार के लिये रक्तबीच बन जायेंगे, एक को पकड़ के अंदर करेंगे दो पैदा हो जायेंगे। शायद कोई मुझ से इत्तेफाक रखे या नही लेकिन भारत की आधी मुसीबतों की जड़ इसकी अथाह जनसंख्या है।
फिलहाल हम विचारों की इस उथल पुथल को इस बात से खत्म करते हैं कि माधुरी इस लिये नही चाहिये क्योंकि ज्यादा से ज्यादा वो २-४ ठुमके लगाकर इस तरह के तत्वों को और मदहोश करेगी वहीं फूलन इस लिये चाहिये कि वो इन्ही तत्वों को पहले की तरह हमेशा के लिये खामोश करेगी।
[इससे पहले कि कहीं खो जायें बेतरतीब विचारों को शब्दों का जामा भर फहनाया है, आप सभी पढ़ने वालों को नव वर्ष की शुभकामनायें साथ में उन्हें धन्यवाद जिन्होंने ईमेल के जरिये शुभकामना संदेश भेजा है।]




कोई तो मिला प्रभो जो समान विचार रखता है!!
जनसंख्या मूल है अधिकतर समस्याओं की।
नया साल आपको पहले से बेहतर बहुत कुछ दे जाए!
नव वर्ष की शुभकामनाएं
सही है। नारियों को चण्डिका का रूप धरना ही होगा, असुरों के लिये।
सही कहा है । हम अपना चन्डी फूलन कॉस्ट्यूम ही दुरुस्त कर रहे हें ।
नववर्ष की शुभकामनाएँ !
घुघूती बासूती