ऊपर दिये गये टाईटिल का बड़ा वर्जन कुछ यूँ है - प्रत्यक्षा, अभय, ज्ञानजी, प्रियंकर और अन्य (अगर कोई है) के बीच बहुत जल्द आपसी सौहार्द बड़ेगा। इससे पहले आप कुछ सोचें हम बता दें कि ये बात हम कोई ज्योतिषी गणना करके नही बता रहे। बल्कि हिंदी चिट्ठाजगत के पिछले ट्रैंड के बल पर […]

गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित पुष्प की अभिलाषा देश के उन सभी शहीदों को समर्पित है जिन्होंने आजादी दिलाने में और आजादी के बाद उसकी सुरक्षा करने में अपनी जान की बिल्कुल भी परवाह नही की। उन्ही सभी को हमारी भावपूर्ण श्रदांजलि

चाह नही मैं सुरबाला के
गहनों में गूथा जाऊँ।
चाह नही […]

आजकल अचानक बड़े बड़े व्यापारियों के अंदर खेल प्रेम जा चुका है कोई मुम्बई की टीम खरीद रहा है, कोई कलकत्ता की। कभी कही देखा था लोग मुर्गे लड़वाते थे और उन पर दाँव लगाते थे, आज जमाना बदल चुका है। समस्या इस बात पर नही है कि व्यापारी पैसा लगा रहे हैं, दुख इस […]

मेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद […]

मेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद […]

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