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फिल्म समीक्षाः तारे जमीन पर

December 23rd, 2007 | 10 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा

इस तरह की फिल्में सालों में कभी बनती हैं और जब भी बने तो उन्हें थियेटर में ही देखना चाहिये। तारे जमीन पर भी ऐसी ही बनी एक खूबसूरत फिल्म है। तारे जमीन पर को हिन्दी फिल्मी दुनिया की लाइफ इस ब्यूटीफूल कहूँ तो शायद कोई अतिश्योक्ति नही होगी।

हर कोई व्यक्ति जिसको बच्चों से दो चार होना होता है उसे ये फिल्म जरूर देखना चाहिये और अगर आप उनमें से हैं जो चाहते हैं कि उनके बच्चे आलराउंडर बने, क्लास के टॉपर बने तो उनको भी ये फिल्म जरूर देखनी चाहिये। मेरी मनपसंद फिल्मों की लिस्ट में इस फिल्म का नाम भी आज से जुड़ गया है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे बच्चे ईशान से संबंधित है जो dyslexia की समस्या से जूझ रहा होता है लेकिन अपने आसपास के तानों के चलते ये ही दिखाने की कोशिश करता है कि उसे वो सब आता है जिसकी उम्मीद उसके घरवाले कर रहे होते। इस कशमकश में उसका व्यवहार उग्र होता जाता है जिसके चलते उसे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया जाता है। वहाँ भी उसकी समस्या से सभी अनजान रहकर उसके साथ व्यवहार करते हैं लेकिन फिर स्कूल में आगमन होता है एक नये टीचर राम शंकर निकुम्भ का जो चूंकि स्पेशियल बच्चों के स्कूल में पढ़ाने का अभ्यस्त होने की वजह से तुरंत ये जान जाता है।

ईशान अवस्थी के किरदार में दर्शील ने जान डाल दी है वो नन्हा बच्चा ही इस फिल्म का असली हीरो है इस साल के बेस्ट ऐक्टर का अवार्ड इसी बच्चे को जाना चाहिये। राम शंकर निकुंम्भ के रूप में आमिर खान काफी प्रभावी हैं लेकिन इस फिल्म में आमिर भी दर्शील के सामने मात खा गये। दर्शील के माता और पिता का किरदार निभाने वाले कलाकारों ने भी सधा हुआ अभिनय किया है। आमिर के अलावा फिल्म के सारे कलाकार कम से कम मेरे लिये तो नये थे लेकिन फिल्म देखकर ऐसा बिल्कुल भी नही लगा।

फिल्म के गीत बहुत ही अर्थपूर्ण और कल्पना से भरे हैं जिन्हे प्रसून जोशी ने बहुत ही खुबसूरती से लिखा है। शंकर ऐहसान लॉय ने संगीत भी उतना ही मधुर दिया है। लेकिन फिल्म का सबसे सशक्त पक्ष है इसकी कहानी, जो लिखी है अमोल गुप्ते ने वो इस फिल्म के क्रयेटिव डायरेक्टर भी हैं। आमिर का निर्देशन देखकर लगता है जैसे वो काफी समय से निर्देशन करते आ रहे हैं।

अब बात करते हैं कुछ ऐसे दृश्यों की जो मुझे बहुत पसंद आये और इसकी समीक्षा लिखने तक मुझे याद हैं। सबसे पहला है इसकी शुरूआत की कास्टिंग जो कि बहुत ही कल्पना पूर्ण है और उसे देखकर कही से भी नही लगता है कि हम किसी हिन्दी फिल्म का ऐनीमेशन देख रहे हैं। दूसरा आमिर और दर्शील के माता पिता के बीच का भावपूर्ण संवाद, तीसरा आमिर का इंट्रो वाला सीन इसमें बम बम बोले वाले गीत ने और चार चांद लगा दिये। एक और सीन है जिसमें दर्शील ३ x ९ का हल ढूढँने के लिये अपना दिमाग दौड़ाता है, ऐसे ही ना जाने कितने और सीन हैं।

तारे जमीन पर वाकई में बहुत ही दमदार फिल्म है जो मनोरंजन ही नही देती बल्कि संदेश भी देती है कि हर बच्चा अपने आप में अलग है और इनकी आपस मे तुलना तो करनी ही नही चाहिये। A Must Watch Film यानि कि एक ऐसी फिल्म जिसे जरूर देखना चाहिये और आप बगैर किसी संकोच के अ-हिन्दी भाषी (जो भारतीय नही हैं) को भी रिकमेंड कर सकते हैं। एक ऐसी फिल्म जिसमें कम से कम मुझे तो सभी कुछ अच्छा ही अच्छा नजर आया।

Taare Jameen par Film Trailer:

मेरा वोट मेरी राय: [rate 4.5]

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10 Responses to “फिल्म समीक्षाः तारे जमीन पर”

  1. rajeev jain Says:

    खूबसूरत समीक्षा

    अपन ने भी यही बात कही थी

    जरा इधर भी इनायत फरमाएं

  2. mamta Says:

    अब तो फिल्म देखनी ही पड़ेगी।

  3. Sanjeet Tripathi Says:

    ठान ही लिए है भाई पिक्चर ये देख के ही रहेंगे, सालों बाद अपने शहर के थिएटर को कृथार्थ करेंगे।
    शुक्रिया एक बढ़िया समीक्षा पढ़वाने के लिए

  4. sujata Says:

    बहुत शुक्रिया ! समीक्षा पढवाने के लिए । जल्द ही देखनी होगी यह सोचा ही था पर यह पढकर जल्दी और बढ गयी है ।

  5. Manish Says:

    Tarun : Very Happy new year to you all. Many thanks for looking up on the blogspace. I dont have your mail. mine is in the comment box – rgds manish (joshim ; bakaul.blogspot.com). TZP is on the agenda this week . lets hope we make it.

  6. Mridula Says:

    Wish you a very happy 2008 Tarun.

  7. manish Says:

    i am keen 2 see this movie with my friends i hav heard a lot about this movie so guys i am going….

  8. kush tripathi Says:

    kuch to hai is film me

  9. mohit sharma Says:

    ठान ही लिए है भाई पिक्चर ये देख के ही रहेंगे, सालों बाद अपने शहर के थिएटर को कृथार्थ करेंगे।
    शुक्रिया एक बढ़िया समीक्षा पढ़वाने के लिए
    खूबसूरत समीक्षा

    अपन ने भी यही बात कही थी

    जरा इधर भी इनायत फरमाएं

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