इस तरह की फिल्में सालों में कभी बनती हैं और जब भी बने तो उन्हें थियेटर में ही देखना चाहिये। तारे जमीन पर भी ऐसी ही बनी एक खूबसूरत फिल्म है। तारे जमीन पर को हिन्दी फिल्मी दुनिया की लाइफ इस ब्यूटीफूल कहूँ तो शायद कोई अतिश्योक्ति नही होगी।
हर कोई व्यक्ति जिसको बच्चों से […]

अमूमन आज तक यही देखने में आता था कि हिन्दी अखबार वाले या मीडिया वाले अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल अक्सर करते रहते हैं। लेकिन इंटरनेट पर हिन्दी का बढ़ता प्रभाव लगता है अब अंग्रेजी मीडिया भी महसूस करने लगा है। अभी एक दिन पहले ही आइ बी एन की साईट देख रहा था तो अंग्रेजी […]

कुछ दिनों गायब रहने के बाद आया तो देखा कि मेरी पिछली पोस्ट पर पारूल की टिप्पणी थी कि मैं इस बाबत क्यों कर हिन्दी चिट्ठाजगत में सवाल पूछ रहा हूँ वो भी भारतीय नारी से। वहीं घुघुती जी का कहना था कि किसी को कोई कष्ट ना हो तो कुछ भी पहने यानि दो […]

  

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