Archive for November 2007

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हल्ला मचा रखा है नंदीग्राम बंदीग्राम

इधर कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि हर तीसरी या चौथी पोस्ट नंदीग्राम पर ही होती है, हिन्दी चिट्ठाजगत में नंदीग्राम का ही शोर है। अरे इतना शोर मचाने की क्या जरूरत है ये तो गरीब हैं, किसान हैं ये तो शायद पैदा ही कुचले जाने के लिये हैं। इनका ये ही हस्र होना [...]

प्रचार, प्रसार और फिर समीक्षक की मार

पिछले कई हफ्तों से समाचारों की सुर्खियों में छायी रहने वाली दोनो फिल्में आखिरकार समाचार चैनलों से निकल बड़े पर्दे में आ ही गयी। इन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने इसके प्रचार और प्रसार में कोई कसर नही छोड़ी। बात आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको प्रचार और प्रसार का अंतर समझा दूँ।
हमने दिवाली के [...]