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	<title>Comments on: स्वीमिंग पूल में टॉपलैसः आप का क्या कहना है?</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Wed, 03 Dec 2008 02:33:29 +0000</pubDate>
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		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-8057</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Dec 2007 03:18:28 +0000</pubDate>
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		<description>@संजीत, उधर पहुँचने का जुगाड़ तो सिर्फ एक ही है, अगर तैरना है तो पहले उड़ना सिखो 

@प्रतीक, थोड़ी आजादी तो है ही क्योंकि तभी अपने अपने हमाम में सभी नंगे होते हैं।

@पारूल, विचारों का दायरा बढ़ाने के लिये शायद भारतीय नारी वाली इस सोच से आज नही तो कल एक दिन सभी को बाहर निकलना होगा।

@अनुपजी, आप तो शरमा ही गये ;)

@जीतू भाई अंतिम बात पर तो आप कुछ कुछ बसंती की जबान बोल गये, जरा चलते चलते हमें भी बता दीजिये जीतू भाई कि आपका नाम क्या है? ;)

@ज्ञानजी, ये क्या आप कम से कम अपने हिस्से का तो अलग से शरमाईये ;)

@संजीवा, अपने देश में विवादित मसले कम हैं जो आप यहाँ भी बैटिंग करने की सोच रहे हैं।

@दिव्याभ, कम होते कपड़े और बढ़ते अपराध ये भी इस देश का ही सच है।

@नीरज, स्वागत है आपका, अपनी रसोई में हम परोसेंगे तो अपनी ही पसंद का अब अगर किसी को मसाला लगे तो हम कुछ नही कर सकते  वैसे और भी हैं ठिकाने कहाँ सिर्फ सलाद ही सर्व होता है ;)

@घुघुती जी, वो आलेख का पता आप से ही चला, अगर लिंक दे देती तो शायद पढ़ लेता। प्राइवेट अंग के पब्लिक डिसप्ले की बात दोनों पर समान रूप से लागू होती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@संजीत, उधर पहुँचने का जुगाड़ तो सिर्फ एक ही है, अगर तैरना है तो पहले उड़ना सिखो </p>
<p>@प्रतीक, थोड़ी आजादी तो है ही क्योंकि तभी अपने अपने हमाम में सभी नंगे होते हैं।</p>
<p>@पारूल, विचारों का दायरा बढ़ाने के लिये शायद भारतीय नारी वाली इस सोच से आज नही तो कल एक दिन सभी को बाहर निकलना होगा।</p>
<p>@अनुपजी, आप तो शरमा ही गये <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@जीतू भाई अंतिम बात पर तो आप कुछ कुछ बसंती की जबान बोल गये, जरा चलते चलते हमें भी बता दीजिये जीतू भाई कि आपका नाम क्या है? <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@ज्ञानजी, ये क्या आप कम से कम अपने हिस्से का तो अलग से शरमाईये <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@संजीवा, अपने देश में विवादित मसले कम हैं जो आप यहाँ भी बैटिंग करने की सोच रहे हैं।</p>
<p>@दिव्याभ, कम होते कपड़े और बढ़ते अपराध ये भी इस देश का ही सच है।</p>
<p>@नीरज, स्वागत है आपका, अपनी रसोई में हम परोसेंगे तो अपनी ही पसंद का अब अगर किसी को मसाला लगे तो हम कुछ नही कर सकते  वैसे और भी हैं ठिकाने कहाँ सिर्फ सलाद ही सर्व होता है <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@घुघुती जी, वो आलेख का पता आप से ही चला, अगर लिंक दे देती तो शायद पढ़ लेता। प्राइवेट अंग के पब्लिक डिसप्ले की बात दोनों पर समान रूप से लागू होती है।</p>
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		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7668</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Nov 2007 06:14:33 +0000</pubDate>
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		<description>यदि किसी अन्य को कोई विशेष कष्ट ना हो तो जो जो चाहे सो पहने । वैसे शायद आपने कल या हाल के ही टाइम्स औफ इन्डिया में मेल क्लीवेज और उसे कैसे व कितना दिखाया जाए पर शायद लेख नहीं पढ़ा ! पढ़ते तो शायद पुरुषों को भी अपने को ढकने को कहते ।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यदि किसी अन्य को कोई विशेष कष्ट ना हो तो जो जो चाहे सो पहने । वैसे शायद आपने कल या हाल के ही टाइम्स औफ इन्डिया में मेल क्लीवेज और उसे कैसे व कितना दिखाया जाए पर शायद लेख नहीं पढ़ा ! पढ़ते तो शायद पुरुषों को भी अपने को ढकने को कहते ।<br />
घुघूती बासूती</p>
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		<title>By: neeraj rajput</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7654</link>
		<dc:creator>neeraj rajput</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 21:52:46 +0000</pubDate>
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		<description>are u really in favour of feminism or u just wanted to have masala on ur blog  by aksing comments from female chhithikars.
dono mei so jo bhi ho kuch ko pahli baat achi lage ki kya admi hai yar, Indian women k liye bhi aise feeling rakhta hai--ekdam samaj mei mahilao ko barabari k hak wali.
aur dusri tarah k log khud samajh sakte...
but about females, diffciult to say anything. enjoy reading.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>are u really in favour of feminism or u just wanted to have masala on ur blog  by aksing comments from female chhithikars.<br />
dono mei so jo bhi ho kuch ko pahli baat achi lage ki kya admi hai yar, Indian women k liye bhi aise feeling rakhta hai&#8211;ekdam samaj mei mahilao ko barabari k hak wali.<br />
aur dusri tarah k log khud samajh sakte&#8230;<br />
but about females, diffciult to say anything. enjoy reading.</p>
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	<item>
		<title>By: divyabh</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7639</link>
		<dc:creator>divyabh</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 15:01:27 +0000</pubDate>
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		<description>एक हद बना दी है समाज ने और ठोक-2 कर शर्म लाद दी गई जो लज्जा भी बन गई बाद में पर सच तो यही है कि कोई फर्क नहीं पड़ेगा अगर टॉपलेस हो जाएं महिलाएं…।
यह तो मात्र पुरुष भ्रम है जो कईबार टूटता आया है कमहोते कपड़ों के द्वारा जो एकबार और टूटेगा…।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक हद बना दी है समाज ने और ठोक-2 कर शर्म लाद दी गई जो लज्जा भी बन गई बाद में पर सच तो यही है कि कोई फर्क नहीं पड़ेगा अगर टॉपलेस हो जाएं महिलाएं…।<br />
यह तो मात्र पुरुष भ्रम है जो कईबार टूटता आया है कमहोते कपड़ों के द्वारा जो एकबार और टूटेगा…।</p>
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		<title>By: Sanjeeva Tiwari</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7633</link>
		<dc:creator>Sanjeeva Tiwari</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 13:50:08 +0000</pubDate>
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		<description>तरूण भाई हम भी आज सन डे को निठल्‍ले बैठे थे जब से आपने पोस्‍ट किया है तब से कई बार आपके ब्‍लाग पर आ गये कि कोई महिला टिपिया रही है क्‍या पर यहां तो कउनो छोकरिया नहीं आई रे भाई । अब हमहू टिपिया देत हैं -

जब भारत में ऐसी मांग आयेगी तो ड्राफ्ट मुझसे लिखवाईयेगा मुझे विवादित मसलों की लीगल ड्राफ्टिंग में मजा आता है, हा हा हा । धन्‍यवाद भाई ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तरूण भाई हम भी आज सन डे को निठल्‍ले बैठे थे जब से आपने पोस्‍ट किया है तब से कई बार आपके ब्‍लाग पर आ गये कि कोई महिला टिपिया रही है क्‍या पर यहां तो कउनो छोकरिया नहीं आई रे भाई । अब हमहू टिपिया देत हैं -</p>
<p>जब भारत में ऐसी मांग आयेगी तो ड्राफ्ट मुझसे लिखवाईयेगा मुझे विवादित मसलों की लीगल ड्राफ्टिंग में मजा आता है, हा हा हा । धन्‍यवाद भाई ।</p>
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		<title>By: Gyan Dutt Pandey</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7625</link>
		<dc:creator>Gyan Dutt Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 11:19:59 +0000</pubDate>
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		<description>अनूप वाला कमेण्ट जैसा ही हमारा मान लें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनूप वाला कमेण्ट जैसा ही हमारा मान लें।</p>
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		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/25/topless-swimmers/#comment-7617</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 09:11:48 +0000</pubDate>
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		<description>भई बिना फोटो बात कुछ जम नही रही। या तो फोटो लगाओ या फिर ऐसे सवाल मत पूछो। बिना उदाहरण के गणित के सवाल पूछ रहे हो। अब चूंकि हम इन्सान दोगले टाइप के होते है इसलिए इसके दो जवाब हो सकते है, 

१. बहुत गलत है, टॉपलैस, शर्म लिहाज कुछ है कि नही? नही कतई अलाउ नही करना चाहिए। हम तो कहेंगे कि लड़किया सर भी ढक कर नहाएं।
२. टॉपलेस क्या, बॉटम लेस भी करिए ना, हमे क्या, जिसने देखना होगा देख लेगा, जिसे ना देखना होगा स्वीमिंग पूल बदल लेगा।

बकिया डेनमार्क मे कौनो टॉपलेस के बारे मे सोचता है भी का? 
हमको तो नही लगता, पूरे यूरोप मे हम टहल आए, पार्को मे क्या क्या करम होते है, किसी को कोई परवाह नही होती, जैसे हमारे हिन्दुस्तान मे कुत्ता-कुत्तिया लगे रहते है और हम बेपरवाह निकल जाते है वैसे ही उधर भी होता है। हम जिधर बैठ कर काफ़ी पिए थे, बगल वाली सीट पर सारे कर्म हो गए, हम देखे का? नही ना, तो फिर टॉपलेस से का क्या उखड़ जाएगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भई बिना फोटो बात कुछ जम नही रही। या तो फोटो लगाओ या फिर ऐसे सवाल मत पूछो। बिना उदाहरण के गणित के सवाल पूछ रहे हो। अब चूंकि हम इन्सान दोगले टाइप के होते है इसलिए इसके दो जवाब हो सकते है, </p>
<p>१. बहुत गलत है, टॉपलैस, शर्म लिहाज कुछ है कि नही? नही कतई अलाउ नही करना चाहिए। हम तो कहेंगे कि लड़किया सर भी ढक कर नहाएं।<br />
२. टॉपलेस क्या, बॉटम लेस भी करिए ना, हमे क्या, जिसने देखना होगा देख लेगा, जिसे ना देखना होगा स्वीमिंग पूल बदल लेगा।</p>
<p>बकिया डेनमार्क मे कौनो टॉपलेस के बारे मे सोचता है भी का?<br />
हमको तो नही लगता, पूरे यूरोप मे हम टहल आए, पार्को मे क्या क्या करम होते है, किसी को कोई परवाह नही होती, जैसे हमारे हिन्दुस्तान मे कुत्ता-कुत्तिया लगे रहते है और हम बेपरवाह निकल जाते है वैसे ही उधर भी होता है। हम जिधर बैठ कर काफ़ी पिए थे, बगल वाली सीट पर सारे कर्म हो गए, हम देखे का? नही ना, तो फिर टॉपलेस से का क्या उखड़ जाएगा।</p>
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