इस बहस में महिला चिट्ठेकारों या रीडरस के क्या विचार हैं ये मैं जरूर जानना चाहूँगा क्योंकि ये कुछ लड़कियों या महिलाओं ने शुरू ही महिला और पुरूषों में समान अधिकार की बात पर किया है।

ये खबर है स्टॉकहोम (स्वीडन) की, जहाँ २ लड़कियाँ टॉपलैसे हो कर पब्लिक स्वीमिंग पूल में तैरने पहुँच गयी। उन से कहा गया कि या तो ऊपर कुछ पहन लें या पूल छोड़कर चली जायें। बस यहाँ से शुरूआत हुई उस ग्रुप की जो लडकियों (महिलाओं) को भी टॉपलैसे होकर पब्लिक पूल में तैरने देने का हिमायत कर रहा है। उनका कहना है कि जैसे पुरूष शरीर के ऊपरी भाग में बगैर कुछ पहने तैर सकते हैं तो हम महिलायें क्यों नही। इस ग्रुप की ४० महिलाओं ने स्वीडन में ऐसा ही कुछ किया और टॉपलैस होकर प्रदर्शन किये। गौरतलब है कि गर्मियों के दौरान स्वीडन के समुद्री तटों (beaches) पर इन को टॉपलैस होकर रिलेक्स करने की छूट है लेकिन पब्लिक स्थानों में इस बात की मनाही है।

हमें लगता है ये सही बात है कि दोनों को बराबर का हक और अधिकार मिलने चाहिये लेकिन क्या ये बात बराबरी के हक के लिये इतनी जरूरी है। पहले पब्लिक पूल में फिर अन्य तैराकी प्रतियोगिताओं में कैसा लगेगा ये सब? कोई कितना ही इंकार कर ले, कितनी ही आजादी या बराबरी के हक की बात कर ले, लेकिन कुदरत ने पुरूष और महिलाओं में कुछ अंतर तो रखा ही है। कई बातें है जिसमें पुरूष महिलाओं की बराबरी नही कर सकते अब आप लोग इस पूरे मामले में क्या सोचते हैं।

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