उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

यहाँ कोतवाल है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड जो कि अपने को वास्तव में भी भारतीय क्रिकेट का कोतवाल समझता है और चोर जो कोतवाल को डांट रहा है वो हैं शाहरूख किंग खान।
शाहरूख का कहना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उनके साथ वो सलूक नही किया जैसा शायद वो चाहते थे इसलिये आज के बाद शायद क्रिकेट देखने नही आऊँगा। अब शाहरूख साहेब आप नही आओगे तो क्या लोग जूनूनी खेल क्रिकेट देखना थोड़े छोड़ देंगे। खैर, अगर शाहरूख की बातों और चालों का निष्कर्ष निकाले तो पता चलता है कि शाहरूख मार्केटिंग के कितने बड़े खिलाड़ी हैं।

मुफ्त की पब्लिसिटी और खेल के प्रति प्रेम दूसरे शब्दों में कहें तो आम के आम गुठलियों के दाम

शाहरूख खान इस फिल्म जगत में काफी अरसों से है लेकिन उनका ये खेल प्रेम चक दे इंडिया फिल्म रीलिज होने से पहले ही जागा है, कम से कम मीडिया ने तो हमें यही दिखाया है इसलिये हम यही मानकर चलते हैं। जाहिर सी बात है शाहरूख मैदान में होंगे तो मीडिया कैमरा उधर ही रखेगा, सवाल भी पूछे जायेंगे। लाखों की तादाद में जनता टीवी में चिपकी मैच देख रही होगी जिन तक शाहरूख आसानी से मीडिया के मार्फत अपनी फिल्मों की बात बता सकेंगे। शाहरूख कुछ नही कहेंगे तो मीडिया बता देगा, शायद शाहरूख भी ये जानते होंगे कि ये सब होगा न्यूज में। यानि कि मुफ्त की पब्लिसीटी और खेल के प्रति प्रेम दूसरे शब्दों में कहें तो आम के आम गुठलियों के दाम।

अगर आप पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर नजरें दौड़ायें साथ में अपना दिमाग भी तो आप भी वो ही कहेंगे जो हम कह रहे हैं। ओम शांति ओम की रीलिज के दौरान (पहले और बाद में) लगभग हर मैच में आपने दीपिका और शाहरूख को देखा होगा अब ऐसा भी क्या खेल प्रेम की हर मैच में वो भी साथ साथ, ऐसा भी नही है कि एक ही शहर में ये हो रहे हों। जाहिर सी बात है ये सब मार्केटिंग के लिये किया गया।

बस अंधा क्या चाहे दो आंखे, शाहरूख तपाक से मीडिया से रूबरू हुए और कह दिया ऐसी बेअदबी अब शायद मैच नही देखूँगा

ओम शांति ओम हिट हो गयी और एक दिवसीय मैच खत्म, अब पांच दिवसीय मैच देखने का मतलब पैसे और समय दोनों की बरबादी करना था। अब कैसे अचानक पैदा हुए खेल प्रेम को खत्म किया जाता ये सवाल मुहँबांये था लेकिन इसका हल दे दिया क्रिकेट बोर्ड के किसी मेम्बर ने (या शायद किसी मीडिया वाले ने), जिन्होंने ये कह दिया कि शाहरूख खान मैच अपनी फिल्म का प्रचार करने के लिये देख रहे हैं (थे)। बस अंधा क्या चाहे दो आंखे, शाहरूख तपाक से मीडिया से रूबरू हुए और कह दिया ऐसी बेअदबी अब शायद मैच नही देखूँगा। यानि कि सांप भी मर गया और लाठी भी ना टूटी। अब चाहे जो भी है हम तो यही कहेंगे उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।

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Tarun

4 Responses to “ उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ”

  1. एकदम सही पकड़ा आपने. वाह भाई मज़ा आगया.

  2. अब बात यूँ है भाया कि ये सब पब्लिसिटी स्टंट है यह तो हर समझदार व्यक्ति जानता है। और शाहरूख अकेले नहीं है, आमिर खान के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। आमिर ने भी अपनी फिल्मों की पब्लिसिटी ऐसे ही की है। अभी हाल ही में धरने पर बैठे थे कुछ नर्मदा बांध के संबन्ध में, लोग उत्साहित थे तब भी मैंने कहा था कि आमिर सिर्फ़ पब्लिसिटी कर रहे हैं अपनी दुकान चला रहे हैं, उनको लोगों से कोई मतलब नहीं, बस लोग उनकी फिल्म देखने के लिए पैसे दे दें बाकी जाएँ भाड़ में उनको कोई सरोकार नहीं। कम से कम शाहरूख ने वैसा टुच्चापन तो नहीं किया जैसा आमिर ने किया।

    वैसे शाहरूख के इस पब्लिसिटी स्टंट को मैं गलत नहीं समझता, अगले ने खुद तो गला फाड़ के अपनी फिल्म के लिए हल्ला नहीं मचाया। वो सिर्फ़ मैच देखने गया, अब ज़ाहिर सी बात है कि ऐसा नामी अभिनेता यदि मौजूद होगा तो मीडिया वाले उनके मुँह पर माइक लगाने से पीछे नहीं हटेंगे और अभिनेता से उसकी फिल्म के बारे में ही बात करेंगे, यह तो पूछने से रहे कि मैच के बारे में उनके क्या विचार हैं या कौन अच्छा खेला कौन बुरा वगैरह। तो bcci को क्यों खुजली मच रही है जो तुरन्त दनदना दिया कि मैच देखने आओ अपनी फिल्म की पब्लिसिटी करने नहीं। अगला व्यक्ति खुद तो कुछ विज्ञापन नहीं कर रहा ना, बकायदा टिकट के साथ मैच देखने आया है, ये तो मीडिया है जो विज्ञापन करवा रहा है। और bcci को खुजली हो रही है कि उसका कोई फायदा नहीं हो रहा इसमें, मीडिया को तो कुछ कह नहीं सकते क्योंकि वो इनकी बैन्ड बजा देंगे, इसलिए अपनी खुजली शाहरूख को भलाबुरा कह मिटाई उन्होंने!!

  3. जाहिर सी बात है कि शाहरूख तो मैदान में पब्लिसिटी के लिए ही जाते हैं लेकिन कोतवाल साहब ने उनके बारे में टिप्पणी करके उन्हें मीडिया में और कवरेज दिलवा दी। वैसे आपको नहीं लगता कि यहां मामला कोतवाल या चोर का न हो कर चोर-चोर मौसेरे भाई का है?

  4. @दीपा जी, आपने तो सौ बातों की एक बात कह दी :) हमारे ब्लोग में आने का शुक्रिया, बस आते रहिये आप का ही निठल्ला चिंतन है

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