हमारी पिछली पोस्ट पर जम कर टिप्पणियों की ओला वृष्टि हुई अब ये अलग बात है कि हिन्दी चिट्ठाजगत के चेरापूँजी के लिये ये टिप्पणियाँ बूँदाबांदी से कम नही क्योंकि वहाँ तो ये रोज की बात है। यही नही टिप्पणियों के साथ साथ जम कर इस्मायली भी मिली ;) । मेरे को लगा कि इतनी टिप्पणियों और ईस्मायल के जवाब टिप्पणी में देने के बजाय क्यों ना पोस्ट में दिये जायें। जो पेश है जवाब और जमकर इस्मायली ;)

सबसे पहले तो सभी लोगों को टिप्पणियाने का बहुत बहुत शुक्रिया :) बस ऐसा ही स्नेह हमेशा बना के रखियेगा।

बालकिशनजी, हमने तो साफ साफ बताने की कोशिश करी थी फिर भी आप कनफूजिया गये यानि कि हमारे लेख में ही कुछ कमी रह गयी। आपको पसंद आया बहुत बहुत धन्यवाद :)

शिल्पीजी, शुक्रिया पसंद करने का अब अपना खांचा तो आपको ही तय करना पड़ेगा। अगर किसी खांचे में फिट नही बैठ पाये तो नया खांचा बनाने की सुविधा तो है ही :)

ज्ञानजी, क्या करें सब किसी खांचे में फिट नही बैठे तो उठ्ल्लू यानि निर्गुट गुट भी बना डाला, विडंबना देखिये नाम निर्गुट है फिर भी तो एक गुट है। :)

संजीत, धन्यवाद :) , अब क्या आपको भी सोचना पड़ेगा अपना खांचा ;) , आपको तो हम अपने वाले में ही रखेंगे।

प्रियंकरजी, शोध की दशा और दिशा दोनों आपको चकाचक लगे अहा आनंदम आनंदम :)

काकेश दाज्यू, क्या आप भी, यानि चिट भी मेरी पट भी मेरी ;) । जब गुट में विश्वास ही नही करते तो क्या गुट क्या निर्गुट, दोनों एक ही समान हुए ना। वैसे दाज्यू, आपका इशारा खूब समझ गया ;) अब ब्लोगिंग का जन्म ही इस सिद्धांत पर हुआ है कि जब निठ्ल्ले बैठे हो तो कुछ भी अंट शंट लिख दो अगर ऐसा नही होता तो सब अपना लिखा न्यूज पेपर और पत्रिकाओं को भेजना शुरू ना कर देते :) । फिलहाल तो सभी भाषाओं पर आधे से कहीं अधिक ब्लोगर इसी सिद्धांत पर काम कर रहे हैं।

प्रशांतजी, क्या बात है आपतो सभी के मजे ले रहे हैं :) । आपकी बात पर हमें रामविलास पासवान याद आ गये ;) । आगे भी ऐसे ही आते रहियेगा :)

सागर भाईसा, अब आपका गुट तो पता नही लेकिन जहाँ आप हैं वहीं हमें भी पायियेगा। :) बहुत दिनों बाद आना हुआ आशा है आगे भी आते रहेंगे :)

संजीवा भाई, पधारने का और पसंद करने का शुक्रिया :) आशा है आप आगे भी ऐसे ही दर्शन देते रहेंगे। अब आप छटे गुट में ठीक बैठते हैं कि नही कह नही सकता क्योंकि आपको अभी इतना जानता नही हूँ। वैसे भी इस गुट का फिलहाल सिर्फ नामकरण ही हुआ है। :)

संजय भाई, आपके लिये तो दावे से कह सकता हूँ कि आप छटे गुट में कतई फिट नही बैठ सकते :) । अगर आप जबरदस्ती वहाँ जाकर बैठ गये तो कसम तरकश के तीरों की, सभी तीरों को भेजकर आपको उठवा लिया जायेगा ;)

मीनाक्षी जी, आप का स्वागत है :) आशा है आप आगे से भी आती रहेंगी। आपको पसंद आया धन्यवाद, गुट और समुदाय तो हर जिंदगी का हिस्सा है चाहे वो असल में हो या वर्चुअली। :)

देबूदा, रवि भैया वाले गुट में कम से कम हम तो फिट नही हो सकते, रवि भैया जितना कमाल हमसे तो होने से रहा। वो महारथियों का गुट है हमतो फिलहाल ठीक से रथी भी नही हैं। :) और देबू दा, अगर उदाहरण दे देता तो कहीं अपना ब्लोग ही नंदीग्राम ना बन जाता ;) इसलिये नही दिया।

रविजी, टिप्पियाने के लिये :) , निठल्ला जब चिंतन करेगा तो ऐसा भी करेगा ;) और जब तक हिन्दी चिट्ठे लाख पचास हजार तक पहुँचेगें तब हम कहाँ कौन जाने और दूसरा देखिये ना जब राजनीतिक पार्टी ३-४ थी सब लोग गिना और गिनाया करते थे अब मजाल है कोई इन पार्टियों को गिनाने या गिनने की सोचे ;)

बेजीजी, आपके शुभ कदम क्या पड़े, हमारे यहाँ टिप्पणियों की बारिश सी हो गयी है :) अगर आप ईस्मायली लगा देती क्या पता शायद आहत भी हो जाते ;) । आशा है आप आगे भी ऐसे ही टिपियाते रहेंगी।

मसीजिवी, हमारी तरफ से तो तय हो गया था कि हम कहाँ ठहरेंगे। अब आप उठा कर कहीं और बैठा दो तो कोई इंकार थोड़े करेंगे। :)

अमित, आपका भी वही कहना, जायें तो जायें कहाँ :) । निर्दलीय होने के मजे उठा लो जब जी भर जाय कोई भी गुट ज्वाईन कर लेना नही तो नये गठबंधन का विकल्प तो खुला है ही ;)

अभयजी, हम आपको ही नही आपके लिखे को भी पसंद करते हैं, सीरियल पसंद आने के गांरटी नही दे सकते ;) एक आप ही हैं जो पहचान गये कि आप कहाँ है :) । खाली जो थोड़े ही हमने आप को वहाँ रखा है लेकिन अफसोस आपके गुट में हमने आपका जिक्र सबसे आखिर में किया (इक्के-दुक्के अपवाद वाले) :)

शास्त्रीजी, आप सबसे होशियार निकले जो जमकर आस्वादन किया और दोनों पहलू पसंद भी कर लिये। आपको पसंद आया धन्य भाग :) । आशा है आप ऐसे ही हमारा उत्साहवर्धन करते रहेंगे। :)

लो जी, सब चिट्ठाकार भाईयों की टिप्पणियों पर टिपिया दिये, ये शायद हमारे साथ पहली बार हो रहा है कि ईस्मायली दिखाते दिखाते होंठ की जगह हाथ दुखने लगे हों ;)

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