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	<title>Comments on: हिन्दी चिट्ठाकारों का वर्गीकरण</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 04:17:20 +0000</pubDate>
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		<title>By: kaushal</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-13273</link>
		<dc:creator>kaushal</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Apr 2008 06:44:39 +0000</pubDate>
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		<description>hello</description>
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		<title>By: ghughutibasuti</title>
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		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Feb 2008 21:23:21 +0000</pubDate>
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		<description>हम जन्मजात विद्रोही हैं, खाँचे तोड़ देंगे मगर फिट नहीं होंगे ।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम जन्मजात विद्रोही हैं, खाँचे तोड़ देंगे मगर फिट नहीं होंगे ।<br />
घुघूती बासूती</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; ब्लाग नौटंकी उर्फ़ चिठेरी-चिठेरा संवाद</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-7471</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; ब्लाग नौटंकी उर्फ़ चिठेरी-चिठेरा संवाद</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 18:49:12 +0000</pubDate>
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		<description>[...] चिठेरा: अरी चिठेरी, बड़ी कम उमर लग रही है आज तो! क्या ज्ञानजी के  यहां  से हर्र की गोली खा के आ रही है! चिठेरी: तू भी तो नये नारद की टिपटाप लग रहा है। स्लिम-ट्रिम। धड़ाधड़ महाराज की तरह स्मार्टनेस बिखराये जा रही है। चिठेरा: तू कौन ब्लागवाणी  से कम इतरा रही है। न जाने कित्ते तेरे पे फ़िदा है। किसी नये-नवेले ब्लाग की तरह खूबसूरत लग रही है।  चिठेरी: मैं खूबसूरत लग रही हूं! सच! चिठेरा:मुच! चिठेरी: हाय चिठेरे, तू कित्ता रईस दिल  है। मेरे लिये इत्ता बड़ा झूठ बोल गया। मैं तो तुझे एकदम  निठल्ला समझती थी। लेकिन तू तो दिल का समीरलाल निकला। किसी को निराश नहीं करता!  चिठेरा: तू भी मेरी तारीफ़ कर न! कौन रोकता है! कौन टोकता है! कर न!  चिठेरी: नई यार, मुझसे झूठ नई बोला जाता।  चिठेरा: चल छोड़ अच्छा ला थोड़ा पुराणिक मसाला खिला। चिठेरी:अरे पुराणिक मसाला वाला भग गया हरिद्वार। दुकान बन्द करके। तीन दिन बाद आयेगा। चिठेरा: क्यों भला उसकी अभी तीर्थ करने की उमर है? अभी तो जवान है! चिठेरी:अरे वो बड़ा लुच्चा है। स्मार्ट लुच्चा। जो अगड़म-बगड़म हरकतें करता है उनको टाइम-टाइम पे हरिद्वार में धो आता है। ताकी नयी हरकते कर सके। चिठेरा: और वो समीर पुड़ियाधर गयी? चिठेरी: वो जबलपुर में भेड़ाघाट के किनारे गयी है। रेलवे के फ़ाटक पर किसी गोरी-छोरी को कनखियों से निहार रहा होगा। चिठेरा: तुझको नहीं निहारेगा।  चिठेरी:अरे टिप्पणीझौंसे! तेरी तो ऐसी-तैसी। न जाने कैसी-कैसी ! मैं तुझे क्या ऐसी-वैसी, जैसी-तैसी लगती हूं।  चिठेरा: अरे, स्माइली लगा तो दी फ़िर काहे अकड़ रही है। ज्यादा करेगी तो तेरा बहिष्कार कर दूंगा। चिठेरी:तू मेरा बहिष्कार करेगा! करके तो देख। बड़ा प्रमेन्द भैया की तरह टीन-टप्पर बन रहा है। करके तो देख। इतने समझौता करवाने वाले आ जायेंगे कि ब्लाग-सड़क जाम हो जायेगी। पोस्ट वर्षा होने लगेगी। सब तरफ़ यू एन ऒ छाप टिप्पणियां दिखेंगी। चिठेरा: अरे, तू तो सच में बुरा मान गयी। ये ले एक स्माइली और ले ले। खुश रह। नाराज मत हो खून जलता है। शकल ऐसे ही माशाअल्लाह है। और भी बेनजीर भुट्टो नुमा हो जायेगी। मान जा!   चिठेरी: चल मान गई। तू भी क्या याद करेगा किसी रईस चिठेरी से पाला पड़ा है। लेकिन तो एक बात गांठ बांध ले अकल के दुश्मन कि मुझे अपनी तारीफ़ के सिवाय और कोई मजाक नहीं पसन्द। अबकी मजाक किया तो कोसने लगूंगी कि कोई लड़की तुम्हें अचानक देखने आ जाये और तुझसे चाय बनवा के पी जाये। जैसा घुघुती दीदी ने किया था अपने टाइम में। चिठेरा: अरे, तू तो बड़ी जहीन है, महीन है, ये सब लोग कहिन है। सुबह-सुबह टाइम मत खोटी कर अनाम टिप्पणीकार की तरह। अच्छा-अच्छा बोल साधुवादी अन्दाज में। चिठेरी: ठीक है लेकिन तू अपना दिमाग कसवा के आया कर हफ़्ते में एक दिन ज्ञानजी के साइकिल वाले से। तेरे दिमाग में मसिजीवी  की तरह शरातत के कीड़े कुलबुलाते रहते हैं। हमेशा पंगेबाज बनने की कोशिश करता है। जबकि तू जानता है तू कब्भी उत्ता पंगा नहीं ले सकता। अब तो वो भी बेचारे नहीं लेते। हाऊ सैड! हाऊ बैड। चिठेरा: तुम भी एकदम्मै सेन्सेक्स की तरह अनसर्टेन हो। कहीं का कहीं बतरस-पतंग उड़ाने लगती हो। कित्ती मनभावन अदा है।  चिठेरी: तुझे तो ठीक से तारीफ़ भी नहीं करनी आते निगोड़े। एक हफ़्ते का क्रैश कोर्स कर डाल जबलपुर जाके समीरलाल के यहां। कुछ सीख। जिन्दगी सुधर जायेगी। वर्ना बना फ़ुरसतिया  बरबाद होता रहेगा। चिठेरा:अब इस उमर क्या सीखेंगे? चिठेरी:अरे अभी तेरी उमर ही क्या हुयी है। जब ज्ञानजी जैसे अनुभवी लोग अपने अनुभव-कोठार में नयी चीजे समा ।रहे हैं । पुलकोट के साथ फोटो लगा  रहे हैं। तो तू क्यों नईं कर सकता जी! चल जा कर। टाइम मत खोटी कर। चिठेरा: तुम कित्ती अच्छी हो। मेरा कित्ता भला सोचती हो। भगवान करे तेरे ब्लाग पर पाठकों की भीड़ ऐसे ही जमी रहे जैसे राहत-योजना का पैसा बांटने वाले केन्द्र में लगी रहती है। तेरे ब्लाग पर टिप्पणियों की ऐसे बौछार हो जैसे अमेरिका इराक में बम बरसाता है। तेरे दुश्मन सद्दाम की तरह मारे जायें।  चिठेरी: चल, चल। बहुत हो गयी मस्केबाजी। चिठेरी खुश हुई। जा आफिस भाग। दफ़्तर तेरा इंतजार कर रहा है। चिठेरा: चला -चला लेकिन ऐसे हड़बड़ाते हुये मिलना भी कोई मिलना हुआ भला।  [ब्लाग नक्कारा आशीष की शादी पर बजने वाले पूर्वाभ्यास की तरह बजता है] [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] चिठेरा: अरी चिठेरी, बड़ी कम उमर लग रही है आज तो! क्या ज्ञानजी के  यहां  से हर्र की गोली खा के आ रही है! चिठेरी: तू भी तो नये नारद की टिपटाप लग रहा है। स्लिम-ट्रिम। धड़ाधड़ महाराज की तरह स्मार्टनेस बिखराये जा रही है। चिठेरा: तू कौन ब्लागवाणी  से कम इतरा रही है। न जाने कित्ते तेरे पे फ़िदा है। किसी नये-नवेले ब्लाग की तरह खूबसूरत लग रही है।  चिठेरी: मैं खूबसूरत लग रही हूं! सच! चिठेरा:मुच! चिठेरी: हाय चिठेरे, तू कित्ता रईस दिल  है। मेरे लिये इत्ता बड़ा झूठ बोल गया। मैं तो तुझे एकदम  निठल्ला समझती थी। लेकिन तू तो दिल का समीरलाल निकला। किसी को निराश नहीं करता!  चिठेरा: तू भी मेरी तारीफ़ कर न! कौन रोकता है! कौन टोकता है! कर न!  चिठेरी: नई यार, मुझसे झूठ नई बोला जाता।  चिठेरा: चल छोड़ अच्छा ला थोड़ा पुराणिक मसाला खिला। चिठेरी:अरे पुराणिक मसाला वाला भग गया हरिद्वार। दुकान बन्द करके। तीन दिन बाद आयेगा। चिठेरा: क्यों भला उसकी अभी तीर्थ करने की उमर है? अभी तो जवान है! चिठेरी:अरे वो बड़ा लुच्चा है। स्मार्ट लुच्चा। जो अगड़म-बगड़म हरकतें करता है उनको टाइम-टाइम पे हरिद्वार में धो आता है। ताकी नयी हरकते कर सके। चिठेरा: और वो समीर पुड़ियाधर गयी? चिठेरी: वो जबलपुर में भेड़ाघाट के किनारे गयी है। रेलवे के फ़ाटक पर किसी गोरी-छोरी को कनखियों से निहार रहा होगा। चिठेरा: तुझको नहीं निहारेगा।  चिठेरी:अरे टिप्पणीझौंसे! तेरी तो ऐसी-तैसी। न जाने कैसी-कैसी ! मैं तुझे क्या ऐसी-वैसी, जैसी-तैसी लगती हूं।  चिठेरा: अरे, स्माइली लगा तो दी फ़िर काहे अकड़ रही है। ज्यादा करेगी तो तेरा बहिष्कार कर दूंगा। चिठेरी:तू मेरा बहिष्कार करेगा! करके तो देख। बड़ा प्रमेन्द भैया की तरह टीन-टप्पर बन रहा है। करके तो देख। इतने समझौता करवाने वाले आ जायेंगे कि ब्लाग-सड़क जाम हो जायेगी। पोस्ट वर्षा होने लगेगी। सब तरफ़ यू एन ऒ छाप टिप्पणियां दिखेंगी। चिठेरा: अरे, तू तो सच में बुरा मान गयी। ये ले एक स्माइली और ले ले। खुश रह। नाराज मत हो खून जलता है। शकल ऐसे ही माशाअल्लाह है। और भी बेनजीर भुट्टो नुमा हो जायेगी। मान जा!   चिठेरी: चल मान गई। तू भी क्या याद करेगा किसी रईस चिठेरी से पाला पड़ा है। लेकिन तो एक बात गांठ बांध ले अकल के दुश्मन कि मुझे अपनी तारीफ़ के सिवाय और कोई मजाक नहीं पसन्द। अबकी मजाक किया तो कोसने लगूंगी कि कोई लड़की तुम्हें अचानक देखने आ जाये और तुझसे चाय बनवा के पी जाये। जैसा घुघुती दीदी ने किया था अपने टाइम में। चिठेरा: अरे, तू तो बड़ी जहीन है, महीन है, ये सब लोग कहिन है। सुबह-सुबह टाइम मत खोटी कर अनाम टिप्पणीकार की तरह। अच्छा-अच्छा बोल साधुवादी अन्दाज में। चिठेरी: ठीक है लेकिन तू अपना दिमाग कसवा के आया कर हफ़्ते में एक दिन ज्ञानजी के साइकिल वाले से। तेरे दिमाग में मसिजीवी  की तरह शरातत के कीड़े कुलबुलाते रहते हैं। हमेशा पंगेबाज बनने की कोशिश करता है। जबकि तू जानता है तू कब्भी उत्ता पंगा नहीं ले सकता। अब तो वो भी बेचारे नहीं लेते। हाऊ सैड! हाऊ बैड। चिठेरा: तुम भी एकदम्मै सेन्सेक्स की तरह अनसर्टेन हो। कहीं का कहीं बतरस-पतंग उड़ाने लगती हो। कित्ती मनभावन अदा है।  चिठेरी: तुझे तो ठीक से तारीफ़ भी नहीं करनी आते निगोड़े। एक हफ़्ते का क्रैश कोर्स कर डाल जबलपुर जाके समीरलाल के यहां। कुछ सीख। जिन्दगी सुधर जायेगी। वर्ना बना फ़ुरसतिया  बरबाद होता रहेगा। चिठेरा:अब इस उमर क्या सीखेंगे? चिठेरी:अरे अभी तेरी उमर ही क्या हुयी है। जब ज्ञानजी जैसे अनुभवी लोग अपने अनुभव-कोठार में नयी चीजे समा ।रहे हैं । पुलकोट के साथ फोटो लगा  रहे हैं। तो तू क्यों नईं कर सकता जी! चल जा कर। टाइम मत खोटी कर। चिठेरा: तुम कित्ती अच्छी हो। मेरा कित्ता भला सोचती हो। भगवान करे तेरे ब्लाग पर पाठकों की भीड़ ऐसे ही जमी रहे जैसे राहत-योजना का पैसा बांटने वाले केन्द्र में लगी रहती है। तेरे ब्लाग पर टिप्पणियों की ऐसे बौछार हो जैसे अमेरिका इराक में बम बरसाता है। तेरे दुश्मन सद्दाम की तरह मारे जायें।  चिठेरी: चल, चल। बहुत हो गयी मस्केबाजी। चिठेरी खुश हुई। जा आफिस भाग। दफ़्तर तेरा इंतजार कर रहा है। चिठेरा: चला -चला लेकिन ऐसे हड़बड़ाते हुये मिलना भी कोई मिलना हुआ भला।  [ब्लाग नक्कारा आशीष की शादी पर बजने वाले पूर्वाभ्यास की तरह बजता है] [...]</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; ब्लाग नौटंकी उर्फ़ चिठेरा-चिठेरा संवाद</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-7431</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; ब्लाग नौटंकी उर्फ़ चिठेरा-चिठेरा संवाद</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 02:43:33 +0000</pubDate>
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		<description>[...] इसी नट-नटी की तर्ज पर हमने सोचा कि एकाध बार ब्लाग-नौटंकी लिखी जाये तो कैसा रहे!  नट-नटी की तर्ज पर ब्लागर-ब्लागराइन तो जमेगा नहीं। ज्ञानजी ने चिठेरा बताया था एक दिन ब्लागर को। सो चिठेरा-चिठेरी सम्वाद लिखे जायें। सम्वाद का मसौदा पेशे-खिदमत है:- चिठेरा: अरी चिठेरी, बड़ी कम उमर लग रही है आज तो! क्या ज्ञानजी के  यहां  से हर्र की गोली खा के आ रही है! चिठेरी: तू भी तो नये नारद की टिपटाप लग रहा है। स्लिम-ट्रिम। धड़ाधड़ महाराज की तरह स्मार्टनेस बिखराये जा रही है। चिठेरा: तू कौनब्लागवाणी से कम इतरा रही है। न जाने कित्ते तेरे पे फ़िदा है। किसी नये-नवेले ब्लाग की तरह खूबसूरत लग रही है। चिठेरी: मैं खूबसूरत लग रही हूं! सच! चिठेरा:मुच! चिठेरी: हाय चिठेरे, तू कित्ता रईस दिल  है। मेरे लिये इत्ता बड़ा झूठ बोल गया। मैं तो तुझे एकदम  निठल्ला समझती थी। लेकिन तू तो दिल का समीरलाल निकला। चिठेरा: तू भी मेरी तारीफ़ कर न! कौन रोकता है! कौन टोकता है! कर न!  चिठेरी: नई यार, मुझसे झूठ नई बोला जाता।  चिठेरा: चल छोड़ अच्छा ला थोड़ा पुराणिक मसाला खिला। चिठेरी:अरे पुराणिक मसाला वाला भग गया हरिद्वार। दुकान बन्द करके। तीन दिन बाद आयेगा। चिठेरा: क्यों भला उसकी अभी तीर्थ करने की उमर है? अभी तो जवान है! चिठेरी:अरे वो बड़ा लुच्चा है। स्मार्ट लुच्चा। जो अगड़म-बगड़म हरकतें करता है उनको टाइम-टाइम पे हरिद्वार में धो आता है। ताकी नयी हरकते कर सके। चिठेरा: और वो समीर पुड़िया किधर गयी? चिठेरी: वो जबलपुर में भेड़ाघाट के किनारे गयी है। रेलवे के फ़ाटक पर किसी गोरी-छोरी को कनखियों से निहार रहा होगा। चिठेरा: तुझको नहीं निहारेगा।  चिठेरी:अरे टिप्पणीझौंसे! तेरी तो ऐसी-तैसी। न जाने कैसी-कैसी ! मैं तुझे क्या ऐसी-वैसी, जैसी-तैसी लगती हूं।  चिठेरा: अरे, स्माइली लगा तो दी फ़िर काहे अकड़ रही है। ज्यादा करेगी तो तेरा बहिष्कार कर दूंगा। चिठेरी:तू मेरा बहिष्कार करेगा! करके तो देख। बड़ा प्रमेन्द भैया की तरह टीन-टप्पर बन रहा है। करके तो देख। इतने समझौता करवाने वाले आ जायेंगे कि ब्लाग-सड़क जाम हो जायेगी। पोस्ट वर्षा होने लगेगी। सब तरफ़ यू एन ऒ छाप टिप्पणियां दिखेंगी। चिठेरा: अरे, तू तो सच में बुरा मान गयी। ये ले एक स्माइली और ले ले। खुश रह। नाराज मत हो खून जलता है। शकल ऐसे ही माशाअल्लाह है। और भी बेनजीर भुट्टो नुमा हो जायेगी। मान जा!   चिठेरी: चल मान गई। तू भी क्या याद करेगा किसी रईस चिठेरी से पाला पड़ा है। लेकिन तो एक बात गांठ बांध ले अकल के दुश्मन कि मुझे अपनी तारीफ़ के सिवाय और कोई मजाक नहीं पसन्द। अबकी मजाक किया तो कोसने लगूंगी कि कोई लड़की तुम्हें अचानक देखने आ जाये और तुझसे चाय बनवा के पी जाये। जैसा घुघुती दीदी ने किया था अपने टाइम में। चिठेरा: अरे, तू तो बड़ी जहीन है, महीन है, ये सब लोग कहिन है। सुबह-सुबह टाइम मत खोटी कर अनाम टिप्पणीकार की तरह। अच्छा-अच्छा बोल साधुवादी अन्दाज में। चिठेरी: ठीक है लेकिन तू अपना दिमाग कसवा के आया कर हफ़्ते में एक दिन ज्ञानजी के साइकिल वाले से। तेरे दिमाग में मसिजीवी की तरह शरातत के कीड़े कुलबुलाते रहते हैं। हमेशा पंगेबाज बनने की कोशिश करता है। जबकि तू जानता है तू कब्भी उत्ता पंगा नहीं ले सकता। अब तो वो भी बेचारे नहीं लेते। हाऊ सैड! हाऊ बैड। चिठेरा: तुम भी एकदम्मै सेन्सेक्स की तरह अनसर्टेन हो। कहीं का कहीं बतरस-पतंग उड़ाने लगती हो। कित्ती मनभावन अदा है।  चिठेरी: तुझे तो ठीक से तारीफ़ भी नहीं करनी आते निगोड़े। एक हफ़्ते का क्रैश कोर्स कर डाल जबलपुर जाके समीरलाल के यहां। कुछ सीख। जिन्दगी सुधर जायेगी। वर्ना बना फ़ुरसतिया बरबाद होता रहेगा। चिठेरा:अब इस उमर क्या सीखेंगे? चिठेरी:अरे अभी तेरी उमर ही क्या हुयी है। जब ज्ञानजी जैसे अनुभवी लोग अपने अनुभव-कोठार में नयी चीजे समा ।रहे हैं । पुलकोट के साथ फोटो लगा रहे हैं। तो तू क्यों नईं कर सकता जी! चल जा कर। टाइम मत खोटी कर। चिठेरा: तुम कित्ती अच्छी हो। मेरा कित्ता भला सोचती हो। भगवान करे तेरे ब्लाग पर पाठकों की भीड़ ऐसे ही जमी रहे जैसे राहत-योजना का पैसा बांटने वाले केन्द्र में लगी रहती है। तेरे ब्लाग पर टिप्पणियों की ऐसे बौछार हो जैसे अमेरिका इराक में बम बरसाता है। तेरे दुश्मन सद्दाम की तरह मारे जायें।  चिठेरी: चल, चल। बहुत हो गयी मस्केबाजी। चिठेरी खुश हुई। जा आफिस भाग। दफ़्तर तेरा इंतजार कर रहा है। चिठेरा: चला -चला लेकिन ऐसे हड़बड़ाते हुये मिलना भी कोई मिलना हुआ भला।  [ब्लाग नक्कारा आशीष की शादी पर बजने वाले पूर्वाभ्यास की तरह बजता है] [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] इसी नट-नटी की तर्ज पर हमने सोचा कि एकाध बार ब्लाग-नौटंकी लिखी जाये तो कैसा रहे!  नट-नटी की तर्ज पर ब्लागर-ब्लागराइन तो जमेगा नहीं। ज्ञानजी ने चिठेरा बताया था एक दिन ब्लागर को। सो चिठेरा-चिठेरी सम्वाद लिखे जायें। सम्वाद का मसौदा पेशे-खिदमत है:- चिठेरा: अरी चिठेरी, बड़ी कम उमर लग रही है आज तो! क्या ज्ञानजी के  यहां  से हर्र की गोली खा के आ रही है! चिठेरी: तू भी तो नये नारद की टिपटाप लग रहा है। स्लिम-ट्रिम। धड़ाधड़ महाराज की तरह स्मार्टनेस बिखराये जा रही है। चिठेरा: तू कौनब्लागवाणी से कम इतरा रही है। न जाने कित्ते तेरे पे फ़िदा है। किसी नये-नवेले ब्लाग की तरह खूबसूरत लग रही है। चिठेरी: मैं खूबसूरत लग रही हूं! सच! चिठेरा:मुच! चिठेरी: हाय चिठेरे, तू कित्ता रईस दिल  है। मेरे लिये इत्ता बड़ा झूठ बोल गया। मैं तो तुझे एकदम  निठल्ला समझती थी। लेकिन तू तो दिल का समीरलाल निकला। चिठेरा: तू भी मेरी तारीफ़ कर न! कौन रोकता है! कौन टोकता है! कर न!  चिठेरी: नई यार, मुझसे झूठ नई बोला जाता।  चिठेरा: चल छोड़ अच्छा ला थोड़ा पुराणिक मसाला खिला। चिठेरी:अरे पुराणिक मसाला वाला भग गया हरिद्वार। दुकान बन्द करके। तीन दिन बाद आयेगा। चिठेरा: क्यों भला उसकी अभी तीर्थ करने की उमर है? अभी तो जवान है! चिठेरी:अरे वो बड़ा लुच्चा है। स्मार्ट लुच्चा। जो अगड़म-बगड़म हरकतें करता है उनको टाइम-टाइम पे हरिद्वार में धो आता है। ताकी नयी हरकते कर सके। चिठेरा: और वो समीर पुड़िया किधर गयी? चिठेरी: वो जबलपुर में भेड़ाघाट के किनारे गयी है। रेलवे के फ़ाटक पर किसी गोरी-छोरी को कनखियों से निहार रहा होगा। चिठेरा: तुझको नहीं निहारेगा।  चिठेरी:अरे टिप्पणीझौंसे! तेरी तो ऐसी-तैसी। न जाने कैसी-कैसी ! मैं तुझे क्या ऐसी-वैसी, जैसी-तैसी लगती हूं।  चिठेरा: अरे, स्माइली लगा तो दी फ़िर काहे अकड़ रही है। ज्यादा करेगी तो तेरा बहिष्कार कर दूंगा। चिठेरी:तू मेरा बहिष्कार करेगा! करके तो देख। बड़ा प्रमेन्द भैया की तरह टीन-टप्पर बन रहा है। करके तो देख। इतने समझौता करवाने वाले आ जायेंगे कि ब्लाग-सड़क जाम हो जायेगी। पोस्ट वर्षा होने लगेगी। सब तरफ़ यू एन ऒ छाप टिप्पणियां दिखेंगी। चिठेरा: अरे, तू तो सच में बुरा मान गयी। ये ले एक स्माइली और ले ले। खुश रह। नाराज मत हो खून जलता है। शकल ऐसे ही माशाअल्लाह है। और भी बेनजीर भुट्टो नुमा हो जायेगी। मान जा!   चिठेरी: चल मान गई। तू भी क्या याद करेगा किसी रईस चिठेरी से पाला पड़ा है। लेकिन तो एक बात गांठ बांध ले अकल के दुश्मन कि मुझे अपनी तारीफ़ के सिवाय और कोई मजाक नहीं पसन्द। अबकी मजाक किया तो कोसने लगूंगी कि कोई लड़की तुम्हें अचानक देखने आ जाये और तुझसे चाय बनवा के पी जाये। जैसा घुघुती दीदी ने किया था अपने टाइम में। चिठेरा: अरे, तू तो बड़ी जहीन है, महीन है, ये सब लोग कहिन है। सुबह-सुबह टाइम मत खोटी कर अनाम टिप्पणीकार की तरह। अच्छा-अच्छा बोल साधुवादी अन्दाज में। चिठेरी: ठीक है लेकिन तू अपना दिमाग कसवा के आया कर हफ़्ते में एक दिन ज्ञानजी के साइकिल वाले से। तेरे दिमाग में मसिजीवी की तरह शरातत के कीड़े कुलबुलाते रहते हैं। हमेशा पंगेबाज बनने की कोशिश करता है। जबकि तू जानता है तू कब्भी उत्ता पंगा नहीं ले सकता। अब तो वो भी बेचारे नहीं लेते। हाऊ सैड! हाऊ बैड। चिठेरा: तुम भी एकदम्मै सेन्सेक्स की तरह अनसर्टेन हो। कहीं का कहीं बतरस-पतंग उड़ाने लगती हो। कित्ती मनभावन अदा है।  चिठेरी: तुझे तो ठीक से तारीफ़ भी नहीं करनी आते निगोड़े। एक हफ़्ते का क्रैश कोर्स कर डाल जबलपुर जाके समीरलाल के यहां। कुछ सीख। जिन्दगी सुधर जायेगी। वर्ना बना फ़ुरसतिया बरबाद होता रहेगा। चिठेरा:अब इस उमर क्या सीखेंगे? चिठेरी:अरे अभी तेरी उमर ही क्या हुयी है। जब ज्ञानजी जैसे अनुभवी लोग अपने अनुभव-कोठार में नयी चीजे समा ।रहे हैं । पुलकोट के साथ फोटो लगा रहे हैं। तो तू क्यों नईं कर सकता जी! चल जा कर। टाइम मत खोटी कर। चिठेरा: तुम कित्ती अच्छी हो। मेरा कित्ता भला सोचती हो। भगवान करे तेरे ब्लाग पर पाठकों की भीड़ ऐसे ही जमी रहे जैसे राहत-योजना का पैसा बांटने वाले केन्द्र में लगी रहती है। तेरे ब्लाग पर टिप्पणियों की ऐसे बौछार हो जैसे अमेरिका इराक में बम बरसाता है। तेरे दुश्मन सद्दाम की तरह मारे जायें।  चिठेरी: चल, चल। बहुत हो गयी मस्केबाजी। चिठेरी खुश हुई। जा आफिस भाग। दफ़्तर तेरा इंतजार कर रहा है। चिठेरा: चला -चला लेकिन ऐसे हड़बड़ाते हुये मिलना भी कोई मिलना हुआ भला।  [ब्लाग नक्कारा आशीष की शादी पर बजने वाले पूर्वाभ्यास की तरह बजता है] [...]</p>
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		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-7412</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 15:44:11 +0000</pubDate>
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		<description>धांसू है जी। हम चुल्लू भर पानी खोज रहे हैं शरम से कि इत्ती देर् से ये पोस्ट देख पाये और आनन्द वंचित रहे।वैसे हम इत्ते  रईस नहीं हैं । हां मौज वाली बात सही है। अब जल्दी ही निठल्ली मौज ली जायेगी।  :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धांसू है जी। हम चुल्लू भर पानी खोज रहे हैं शरम से कि इत्ती देर् से ये पोस्ट देख पाये और आनन्द वंचित रहे।वैसे हम इत्ते  रईस नहीं हैं । हां मौज वाली बात सही है। अब जल्दी ही निठल्ली मौज ली जायेगी।  <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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		<title>By: सारथी चिट्ठा अवलोकन 10 &#124; सारथी</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-7373</link>
		<dc:creator>सारथी चिट्ठा अवलोकन 10 &#124; सारथी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 00:48:34 +0000</pubDate>
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		<description>[...] अनुभव अपनी नीयत साफ रखना&#8230;.. अवलोकन लुच्ची नजर, चुनिंदा नजारे- चश्मा आलोक पुराणिक का अनुभव अपनी नीयत साफ रखना&#8230;.. काव्य ओस की एक बूँद खबर आज़ादी एक्स्प्रेस ओह! तो अब ताजमहल नहीं रहेगा&#8230;.. खोजी लेख बढ रहा देह व्यापार कैसे चलता है देह व्यापार का धंधा? गजल जब कभी बोलना वक्&#8205;त पर बोलना, मुद्दतों बोलना मुख्&#8205;तसर&#8230; चिट्ठाकारी ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर (२) ब्लागर प्रयाण् गीत (काव्य विधा में) जाल-संगणक अपने लेख को अखबारी लेख की शक्ल दें देशज औषधि शास्त्र डायबीटीज : सही औषधीय गुणो से युक्त कोहा वृक्ष पत्रकार/पत्रकारिता पत्रकार या बेकार पर्यावरण मोटापे से ग्&#8205;लोबल वार्मिंग का क्&#8205;या संबंध? भाषा यह पक्षपात क्यों? वर्णन कोहरा या अम्बर की आहें ! विश्लेषण फतवा और मुस्लीम औरत दुनिया के 200 अच्छे विश्वविद्यालयों में एक भी भारत का नहीं है विज्ञान जूँ (जी हां, शीर्षक में एक ही अक्षर है) औषधि गुण मुलेठी के जारी है संजीवनी बुटी ,सोम की खोज &#8230;&#8230;! (श्रंखला) सफल जीवन साधारण सी पीठ पर न लादें जॉब स्ट्रेस का शैतान साहित्य-परिचय छायावाद की सबसे बड़ी देन हास्य हिन्दी चिट्ठाकारों का वर्गीकरण (हास्य+गंभीर लेख) हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी क्यों नहीं है?? [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] अनुभव अपनी नीयत साफ रखना&#8230;.. अवलोकन लुच्ची नजर, चुनिंदा नजारे- चश्मा आलोक पुराणिक का अनुभव अपनी नीयत साफ रखना&#8230;.. काव्य ओस की एक बूँद खबर आज़ादी एक्स्प्रेस ओह! तो अब ताजमहल नहीं रहेगा&#8230;.. खोजी लेख बढ रहा देह व्यापार कैसे चलता है देह व्यापार का धंधा? गजल जब कभी बोलना वक्&#8205;त पर बोलना, मुद्दतों बोलना मुख्&#8205;तसर&#8230; चिट्ठाकारी ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर (२) ब्लागर प्रयाण् गीत (काव्य विधा में) जाल-संगणक अपने लेख को अखबारी लेख की शक्ल दें देशज औषधि शास्त्र डायबीटीज : सही औषधीय गुणो से युक्त कोहा वृक्ष पत्रकार/पत्रकारिता पत्रकार या बेकार पर्यावरण मोटापे से ग्&#8205;लोबल वार्मिंग का क्&#8205;या संबंध? भाषा यह पक्षपात क्यों? वर्णन कोहरा या अम्बर की आहें ! विश्लेषण फतवा और मुस्लीम औरत दुनिया के 200 अच्छे विश्वविद्यालयों में एक भी भारत का नहीं है विज्ञान जूँ (जी हां, शीर्षक में एक ही अक्षर है) औषधि गुण मुलेठी के जारी है संजीवनी बुटी ,सोम की खोज &#8230;&#8230;! (श्रंखला) सफल जीवन साधारण सी पीठ पर न लादें जॉब स्ट्रेस का शैतान साहित्य-परिचय छायावाद की सबसे बड़ी देन हास्य हिन्दी चिट्ठाकारों का वर्गीकरण (हास्य+गंभीर लेख) हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी क्यों नहीं है?? [...]</p>
]]></content:encoded>
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	<item>
		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/16/groups-in-hindi-blogsphere/#comment-7288</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Nov 2007 13:28:01 +0000</pubDate>
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		<description>टिपियाने का सभी को शुक्रिया, हमने विस्तार में शुक्रिया &lt;a href="http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/19/comments-on-comments/" rel="nofollow"&gt;यहाँ अदा किया है&lt;/a&gt; ईस्मायली लगाकर ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>टिपियाने का सभी को शुक्रिया, हमने विस्तार में शुक्रिया <a href="http://www.readers-cafe.net/nc/2007/11/19/comments-on-comments/" rel="nofollow">यहाँ अदा किया है</a> ईस्मायली लगाकर <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
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