क्या आप जानना चाहते हैं कि आप हिन्दी चिट्ठाकारों के किस गुट या समुदाय या ग्रुप में फिट बैठेंगे, जानने या पता लगाने के लिये आपको इनके वर्गीकरण के बारे में पढ़ना पढ़ेगा। अगर आप को लगे कि नही इनमें से किसी भी खांचे में आपका फ्रेम फिट नही बैठता तो कोई बात नही जैसा हमारे असंतुष्ट नेतागण करते हैं, आप भी कीजियेगा यानि नये गुट का गठन ;)

सबसे पहले बात करते हैं उन गुणीजनों की जो आज से एक डेढ़ साल पहले तक दूर दूर तक नजर नही आते थे लेकिन आजकल इनकी संख्या भारत की आबादी की गति से बड़ रही है। अगर अभी भी नही पहचाने तो मैं बात कर रहा हूँ, मीडिया, लेखन और अध्यापन से जुड़े लोगों की। चिट्ठाजगत में इनका रूतबा वैसा ही है जैसा असली जिंदगी में नेताओं का। यानि कि स्वंयभू वाला जिनको अपने अलावा बाकि तुच्छ नजर आते हैं। ये अपने समुदाय के चिट्ठों के अलावा शायद ही इधर-ऊधर जाते हैं। आप इनके दरबार में कितनी ही हाजरी मार लें मजाल हैं ये आपके चिट्ठों की तरफ रूख करे, अगर कोई आया भी तो इतने चोरी चुपके आयेगा कि आपको पता भी नही चलेगा। लेकिन इस समुदाय में इक्के-दुक्के कुछ चिट्ठाकार अपवाद के रूप में गिने जा सकते हैं।

दूसरा समुदाय है कोमल भावनाओं वालों का, कोमल भावनायें इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि ये गीत, कविता या गजल के माध्यम से ही अपने उदगार व्यक्त करते हैं। इस समुदाय के ज्यादातर चिट्ठाकार भी अपने ही समुदाय में सिमटे रहते हैं, आपस में ही ये अपने दुख-सुख बाँटते रहते हैं। इनकी कोमल भावनाओं के वशीभूत कई बार दूसरे समुदायों के लोग भी इनके यहाँ हाजरी बजाते नजर आ ही जाते हैं। इनके चिट्ठों में अगर आप हाजरी बजाकर आयें तो इनमें से ज्यादातर शायद कोमल भावनायें आहत होने की डर से आपके चिट्ठों में आने से डरते हैं।

तीसरा समुदाय है ब्लू लाईन समुदाय, इस समुदाय के चिट्ठाकारों की प्रकृति भी दिल्ली की ब्लू लाईन बसों की तरह खतरनाक पायी जाती है। जैसे ब्लू लाईन निरीह जनता को रौंदती भागती रहती हैं वैसे ही इस समुदाय के चिट्ठाकार धड़ाधड़ इतनी पोस्ट छापते रहते हैं कि कई बार दूसरे समुदायों के चिट्ठाकारों की पोस्ट इनकी स्पीड के आगे दम तोड़ देती हैं

Bloggingचौथा समुदाय है उच्च वर्ग का, इनकी प्रकृति रईस बिजनेसमैन की तरह होती है, ये सबसे बनाकर रखते हैं शायद ये सोचकर क्या पता कब कौन काम आ जाये। ये हमेशा विवादों से और विवादस्पद विषयों से दूर रहने की कोशिश करते हैं और ये अपनी इस कोशिश में सफल भी रहते हैं। अपनी मौज में (अनुप, समीर) या अपनी पसंद (रवि, श्रीश) के विषय में लिखते हैं। इनकी ये ही खूबी दूसरे समुदाय के चिट्ठाकारों को इनके दरबार में आकर हाजरी बजाने को विवश करती है। उच्च वर्ग के होने के कारण दूसरे समुदायों को इनकी मदद की जरूरत पड़ती रहती है।

पांचवा समुदाय है मध्य वर्ग का, जो अभी तक बताये किसी भी समुदाय में नही आते और अपने उग्र स्वभाव और लेखन की वजह से उच्च वर्ग की पात्रता पाने से वंचित रहते हैं। फिर भी इन्हें दूसरे समुदायों के ज्यादातर चिट्ठाकारों का स्नेह मिलता है, इस स्नेह का कारण अभी पता नही चल पाया है। वैसे एक स्टडी के अनुसार ऐसा शायद इनके विचारों की मानसिक हलचल के कारण होता हो ऐसा पाया गया है।

छटा और सबसे छोटा समुदाय माना जा सकता है गलतफहमी पाले कुछ चिट्ठाकारों का जिन्हें लगता है कि इनके बगैर हिन्दी और चिट्ठा जगत का विकास नही हो पायेगा। इस समुदाय के चिट्ठाकारों की पहचान अभी तक ठीक से नही हो पायी है लेकिन कभी कभी कुछ चिट्ठाकारों में इस तरह के लक्षण दिखायी दिये जाते हैं। वर्गीकरण से ठीक पहले इन लक्षणों का विलुप्त हो जाना इस समुदाय के चिट्ठाकारों की पहचान करने में बाधा बना हुआ है

हमारे जैसे कई चिट्ठाकारों को अभी तक बताये गये किसी भी समुदाय की पात्रता के लायक नही पाया गया। इस वजह से इस तरह के सभी बाकि बचे चिट्ठाकारों को निर्गुट समुदाय में रखा गया है। इस समुदाय का नामकरण शीत युद्ध या उस दौरान भारत के गुटनिरपेक्ष बने रहने को देखकर रखा गया है। अब ये अलग चर्चा का विषय है कि गुटनिरपेक्षता के नाम पर उस समय भारत ने सबसे बड़ा गुट बना दिया था जिसके सदस्यों की संख्या अन्य गुटों से कई गुना अधिक थी। गुटनिरपेक्ष देशों के कई सदस्य देशों की तरह इस निर्गुट समुदाय के कई चिट्ठाकार भी कमजोर, पिछड़े और अपनी पहचान बनाने की लड़ाई में जूझते रहते हैं। इस समुदाय के ज्यादातर चिट्ठाकारों को दूसरे समुदायों के चिट्ठाकारों का समर्थन ना के बराबर मिलता है। इस समुदाय के लगभग सभी चिट्ठाकार दूसरे अन्य समुदायों के लगभग सभी चिट्ठाकारों के दरबार में यदा कदा, अक्सर हाजरी बजाते रहते हैं। इनमें से ज्यादातर चिट्ठाकार सुदामा बने भगवन के आने की बाँट जोहते ही रहते हैं। आज की स्थिति के परिप्रेक्ष्य में इस निर्गुट समुदाय को नंदीग्राम समुदाय का नाम भी दिया जा सकता है। क्योंकि इस समुदाय और सबसे पहले बताये गये समुदाय के बीच लगभग उसी तरह का रिश्ता है जैसे असल जिंदगी में बंगाल के किसान और राजनेताओं का।

अगर आपको लगता है कि आप ऊपर बताये किसी भी गुट या समुदाय में शामिल होने की पात्रता नही रखते या उन गुटों में शामिल होने की आपकी अर्जी खारिज कर दी जा सकती है तो भारत की डेमोक्रेसी की तरह आप एक अलग गुट या समुदाय का निर्माण करने को स्वतंत्र हैं।

नोटः एक अलग स्टडी में ये बात भी सामने आयी है कि तेजी से बढ़ती इन चिट्ठों की आबादी कहीं इनके लिये मुसीबत ना बन जाये। ये अनुमान इस बात को ध्यान में रखकर लगाया गया है कि कम क्षेत्रफल के कारण जिस तरह बढती आबादी को भारत में रहने की जगह मिलनी मुश्किल होती जा रही है कहीं उसी तरह चिट्ठों की बढ़ती आबादी के कारण इन चिट्ठों को पाठक मिलने मुश्किल ना होते जायें।

ब्लोगिंग फोटोः spcoot at flicker

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