09 Nov
Posted as शेरो-शायरी और गजल, मस्ती-मजा, व्यंग्य, चुटकुले
Tags: व्यंग्य, चुटकुले, मस्ती मजा, मस्ती मजा, व्यंग्य, शेरो शायरी और गजल, fun, jokes, shayari, sherआप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना है लेकिन ये कंबीनेशन आज ही ईजाद हुआ है।
दरअसल ये शब्द ज्यादातर दवाईयों के लिये उपयोग में आता है, अगर कोई कंपनी रिसर्च करके किसी फार्मूला पर दवाई बनाती है तो वो ब्रांडेड दवाई कहलाती है जिसका पेटेंट उस कंपनी के पास होता है। कुछ सालों बाद उस पर पेटेंट खत्म हो जाता है और उस फार्मूले पर कोई भी वो दवा बना सकता है, बशर्ते उसका वैसा ही प्रभाव हो और उसका बेस फार्मूला वैसा ही हो।
बस इसी सिद्धांत पर जब किसी पहले से ही ईजाद शेरो शायरी को अपने दिमाग की भट्टी में उसी फार्मूले का इस्तेमाल करके पकाया जाय तो वो कहलायेगी जेनेरिक शेरो शायरी। मसलन, थोड़ा और समझाने की गरज से पहले मैं आपको एक ब्रांडेड शेर सुनाता हूँ, उसके बाद उसका जेनेरिक वर्जन सुनाऊंगा जो मेरे ही जैसे किसी निठल्ले ने अपनी भट्टी में पकाया है।
किसी शायर ने कहा है,
सच्चाई छुप नही सकती, कभी बनावट के असूलों से।
और खुशबू आ नही सकती, कभी कागज के फूलों से।।
इसी फार्मूले पर जेनेरिक शायर का कहना है,
सच्चाई भी छुप सकती है, अगर दोस्ती गाड़ी हो।
और खुशबू भी आ सकती है, अगर थोड़ी सेंट डाली हो।।
‘सूर्य अस्त शराबी मस्त’, इस बात से तो शायद ही कोई इनकार करे, तो ऐसा ही एक शराबी मयखाने में बैठा दबा के शराब हलक में उड़ेले जा रहा था। अब देखिये उसने कैसे हमारी भट्टी में बने जेनेरिक वर्जन का इस्तेमाल किया।
पहले ब्रांडेड,
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
खुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रजा क्या है।
अब हमारे वाले जेनेरिक वर्जन को शराबी ने कुछ यूँ गुनगुनाया,
नशे को कर बुलंद इतना कि हर पैग से पहले,
शराबी शराब से ये पूछे, बता तूझमें इतना मजा क्यों है।
कुछ पति पत्नियों का रिश्ता बड़ा नाजुक होता है, नाजुक इसलिये कि पत्नी के आगे कुछ पति भीगी बिल्ली बने रहते हैं। तो ऐसे ही पत्नी के सताये एक पति को जब आफिस से घर आने में देरी हो गयी तो उसने गाड़ी तेज भगाना शुरू किया। अब जिससे एक अदद पत्नी नही संभलती वो भला स्पीड में भागती गाड़ी कैसे संभाल पाता, हो गया एक्सीडेंट। उसके बाद पति महाशय को हास्पिटल पहुँचाया गया जहाँ आपरेशन के लिये उन्हें बेहोश किया गया, अब आप देखिये वहाँ उन्होंने हमारे जेनेरिक शेर का किस तरह से इस्तेमाल किया।
पहले असली वाला,
मस्त नजरों से देख लेना था, गर तमन्ना थी आजमाने की।
मैं तो बेहोश यूँ भी हो जाता, क्या जरूरत थी मुस्कुराने की।।
अब हमारा जेनेरिक वाला वर्जन,
मेरी बीबी को बुला लेना था, गर जरूरत थी बेहोश करने की।
मैं बेहोश, उसकी दहाड़ से हो जाता, क्या जरूरत थी क्लोरोफॉम सूँघाने की।
सास-बहू के रिश्तों पर तो अपने देश में कितने ही टीवी चैनलों की दुकान चल निकली है तो हमने सोचा क्यों ना एक जेनेरिक वर्जन इनके लिये भी तैयार किया जाय। तो एक नयी नवेली सास जा पहुँची एक पार्टी में, पहुँचते ही कुछ खेली खिलायी सासें और कुछ सास बनने की बाट जोह रही औरतों ने उन्हें घेर लिया। एक ने सवाल दागा, बड़े घर की लड़की लायी हो अब तो उसकी खुशामद में लगे रहना पड़ेगा। सुनते ही इस नयी नवेली सास ने हमारा दुकान से लिया जेनेरिक वर्जन उन सभी के मुँह पर दे मारा। आप लोग भी मुलाहयेजा फर्माइये।
पहले गालिब का बनाया ये मशहूर फार्मूला,
रगों में दौड़ते रहने के हम नही कायल,
जब आँख से ना टपका तो वो लहू क्या है।
इस पर हमारा जेनेरिक तोड़ जो उस सास ने महफिल में दे मारा,
पति के बोलने के हम नही कायल,
जब सास-ससूर को नही बख्शा तो ये बहू क्या है।
अब कुछ बात अपने छोटे उस्ताद यानि कि लिटिल ड्रैगन की, यूँ तो ये अभी छोटा है और जब इसे ब्रांडेड शेर की समझ नही तो ये उसका जेनेरिक वर्जन क्या खाक समझेगा। लेकिन इसकी हरकतें देखकर मैं शत प्रतिशत बता सकता हूँ कि ये हमारी भट्टी में से कौन सा वाला जेनेरिक शेर उठाता। आप लोग भी गौर फरमायें, ध्यान रहे आस-पास शेर की समझ रखने वाला कोई बच्चा ना हो क्योंकि अगर उसने हमारे जेनेरिक वर्जन का फार्मूला समझ लिया तो आपकी खैर नही।
पहले असली,
मुकर जाने का कातिल ने, निराला ढंग निकाला है।
हर किसी से पूछता है, इसको किसने मार डाला है।।
अब हमारे वाला जेनेरिक वर्जन,
नये कपड़े लेने का, मेरे बेटे ने, निराला ढंग निकाला है।
अपनी मम्मी से पूछता है, उसका पैजामा किसने फाड़ डाला है।।
अब चलते चलते संक्षिप्त में कुछ और जेनेरिक वर्जन देखिये, (तरीका वही है, पहले असली, फिर अपना वाला)
एक शहनशाह ने, बनवा के हसीन ताजमहल।
हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक।।
बालीवुड के शहनशाह कौन? अपने बिग बी और कौन। अपन को नही मालूम कौन कौन था लेकिन निठल्ले ने आकर बताया कि सलमान और विवेक जैसे दिखने वाले कुछ लोग इस पर बने जेनेरिक वर्जन का बगैर हमसे खरीदे इस्तेमाल कर रहे थे। कौन सा वर्जन, आप भी देखिये
एक शहनशाह ने, बनवा के ऐश को अपनी बहू।
हम बेचारे आशिकों की आशिकी का उड़ाया है मजाक।।
हम लाये हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के। सुना है ना आपने ये गीत तो एक नेता इस गीत पर बने हमारे जेनेरिक वर्जन को अपनी राजनीतिक सभा में कुछ यूँ गुनगुना रह थे। हम लाये हैं विरोधी पार्टी से नेता निकाल के, हमारी सरकार को मेरे साथियों रखना संभाल के।
एक शेर है, मोहब्बत ना समझ होती है, ये समझना जरूरी है। जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना जरूरी है। तो इस पर हमारा जेनेरिक वर्जन लेकर एक शराबी पहुँच गया किसी नशाबंदी समारोह में और सीधा जा पहुँचा मंच में। कुछ सदस्य उसको जाकर बोले कि इतना नशा करके तुम इसके विरोध में नही बोल सकते, पहले ठीक से तो खड़े हो लो। ये सुन शराबी वहाँ बैठे सभी लोगों की ओर इशारा करके बोला, शराब में नशा होता है, ये समझाना जरूरी है। इन सबको नजर आये, इसलिये लड़खड़ाना जरूरी है।
और अब ये कुछ अलग तरीके से पका जेनेरिक माल। एक आशिक मिजाज लड़का था जिसकी आशिकी का मोटो था, उनको आता है प्यार पे गुस्सा, हमको गुस्से पे प्यार आता है। तो जनाब इसकी शादी एक खूसट सी, दंबग और गुस्से की मूरत से हो गयी। सुहाग रात के दिन इसने बीबी को नाराज सा गुस्से में देखा तो, उसे हमारी जेनेरिक शायरी से खुश करने की सोची। बीबी के कदमों में बिल्कुल फिल्मी ईस्टायिल से बैठ ये कुछ यूँ शुरू हुआ, रूठे रूठे से सरकार बैठे हो तुम, कोई बात नही हम तुम्हें मना लेंगे। आगे की लाईन कहता इससे पहले बीबी ने सिर उठा तमतमायी नजरों से उसकी तरफ देखा, तो जनाब ने घबराहट में दूसरे जेनेरिक वर्जन की दूसरी लाईन बोल दी, कोई बात नही, तुम यहाँ चुपचाप बैठी रहो, हम बाहर जाकर किसी और को पटा लेंगे।
हो सकता है कुछ समय बाद आप किसी नये चिट्ठे पर पहुँचे तो चिट्ठा देखते ही आपके मुँह से निकल पड़े, अरे ये तो अमुक चिट्ठेकार का जेनेरिक वर्जन लगता है।
6 Responses
prabhakar
November 9th, 2007 at 9:13 am
1काफी मेहनत की है आपने और रंग जमा दिया है।
अनुराग
November 9th, 2007 at 9:41 am
2ये रीसेंट रीडर्स का बक्सा पढ़ने नहीं देता ठीक से।
Gyan Dutt Pandey
November 9th, 2007 at 10:30 am
3बढ़िया लगी यह जेनेरिक पोस्ट!
sanjupahari
November 9th, 2007 at 10:46 pm
4saabji aapko bhi diwali ki dher saari badhaayiyaan..
sahi mara hai aapne ekdam sahi sher mara hai……aaaj se aapka naam “Galib Part 2-ameriKKa waale”….aapne kahar dhaya hai hum bachcoon pe ….isi baat pe ek generic sher kaatata hu…..meri 7wi girl friend ne break up time bola tha…i will KILL hu…to mere dil ye sher…ctrlC+ctrlV hua tha…
KATL KARNE KA DAWA KARTI Hoo APNI NAJUK KALAYEE KE SADKE……AREY TUMSE TALWAAR HI KYA UTHEGI JAB DUPATTA SAMBHALTA NAHI>>>>
(WAAH WAAAH….LAAANAT HAI.. LAANAT HAI)
KHUDA AAA-FISSSS
sanjupahari
November 9th, 2007 at 10:50 pm
5sach main ye dabbe ne 3 sher opss nahi 2.5 sher (last line dikh rahi hai) apne ander chupa liye hain…lekin kaabile tareef generic banaya hai aapne…thnx for sharing
निठल्ला चिन्तन » प्रचार, प्रसार और फिर समीक्षक की मार
November 13th, 2007 at 9:07 am
6[…] « जेनेरिक शेरो शायरी […]
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There are only two ways to live your life. One is as though nothing is a miracle. The other is as though everything is a miracle - Albert EinsteinCategories
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