क्या मुझे बताना चाहिये कि यहाँ बात किस के संदर्भ में की जा रही है? शायद ये ही बेहतर रहेगा, मैं पाकिस्तान की बात कर रहा हूँ। अब आप ही देखिये ६० साल के इतिहास में २७ साल डेमोक्रेसी की सरकार चली और ३३ साल मिलेटरी का शासन, हुई ना दो नावों में सवारी।

वैसे अगर जिन्ना साहेब ऊपर से झांक रहे होंगे तो शायद यही कह रहे होंगे कि ‘दो कदम गलत पड़े थे राहे शौक में, डेमोक्रेसी तमाम उम्र पाकिस्तान ढूँढती रही‘। वो कौन से दो कदम थे ये जानने के लिये आपको उस लिंक पर जाकर पढ़ना पड़ेगा जो मैं इस पोस्ट के आखिर में दूँगा। उसे पढ़ने के बाद आपको भी शायद समझ आ जाये हमने क्यों ‘हर पल पड़ती मार’ का जिक्र किया। खैर आप समझे ना समझे लेकिन उसे पढ़कर हमें तो यही समझ आया कि उस देश का सबसे बड़ा हमदर्द ही सबसे बड़ा दर्द देने वालों में से है।

बीबीसी में इलियास खान के इस आलेख के संदर्भ में ही हमने ये निष्कर्ष निकाला, आप भी जरूर पढ़ियेगा।

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