कॉपी राईट बनाम कॉपी पेस्ट
हम चिट्ठाकारों को बड़ी चिंता रहती है कि कहीं कोई हमारा माल चुरा कर अपनी दुकान में ना सजा ले, इसलिये हम कॉपी राईट का एक बड़ा सा बोर्ड अपनी दुकान के ओने कोने में कहीं ना कहीं लगा कर रखते हैं। इस बोर्ड को सभी बन्धुजन कॉपी राईट के नाम से जानते हैं।
कॉपी राईट का मतलब है कि हमारी दुकान में बिकने वाली या दिखायी दी जाने वाली सभी वस्तुओं पर हमारा और सिर्फ हमारा हक है, इस माल को बगैर हमारी अनुमति के नही बेचा जा सकता। और कॉपी पेस्ट का मतलब होता है कि इस या उस माल को किसी ने बड़े प्यार से कॉपी करके अपनी दुकान में सजा (पेस्ट) लिया है।
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि इन दोनों शब्दों के बीच धमाचौकड़ी मचाने का क्या मतलब? इनके मतलब तो हम (आप लोग) पहले से ही जानते हैं। दरअसल अपने दिमाग में संदेह के कीड़ों ने उछलकुद मचा रखी है, और ये बलवती होती जाती है जब भी इन्हें नामी गिरामी लेखकों की कहानी और कविताओं से सजी साईट के दर्शन हो जाते हैं।
कुछ साईट जैसे, अभिव्यक्ति, अनुभूति, अपने रविजी की रचनाकार, कथा-सागर और इसी तरह के कई अन्य अंतर्जालों (वेब साईट) में नामी लेखको या कवियों की रचनायें पढ़ने को मिलती हैं। तो मन में यही सवाल उठता है कि क्या इन्हें छापने से पहले लेखक या कवियों से अनुमति ली जाती है, जाहिर सी बात है लेनी चाहिये। लेकिन अगर कोई लेखक या कवि दिवंगत हो चुके हों तो उनकी अनुमति कहाँ से कोई ले। तो क्या उनकी रचनायें कॉपी राईट के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाती है यानि कि कोई भी छाप सकता है।
आप में से कोई अगर इस तरह की वेबसाईट का संचालन करता है तो उसे ये जरूर पता होगा कि इन रचनाओं को कैसे उपयोग में लाया जाता है। इसलिये क्या आप में से कोई गुणीजन हमारे दिमाग में धमाचौकड़ी मचाने वाले इन कीड़ो की क्रीड़ा शांत करने का तनिक प्रयास करेगा।


भैया, दशकों से अपनी डायरी के सिवाय लिखा नहीं। इसलिये खुद का ही इतना कहना है कि औरों का क्या कॉपी करें? और हमारा लिखा क्या कालजयी है कि कोई कॉपी करे?
लिहाजा ब्लॉगिंग में कॉपीराइट का खास महत्व लगता नहीं। पर कोई भरोसा नहीं कल विचार बदल जाये।
hamaarii ssait per bahut prashno kae utar haen
कॉपीराइट की बहुत ज्यादा जानकारी तो नहीं है लेकिन दिवंगत लेखकों की रचनाऎं कुछ समय के बाद कॉपीराइट मुक्त हो जाती है (यदि उस पर किसी और ने कॉपीराइट नहीं करवाया है तो) . जहाँ तक बाँकी रचनाओं का सवाल है उन्हे आप सिर्फ अनुमति से ही छाप सकते है.जैसे रचनाकार में रवि जी करते हैं. मैने भी खोया पानी अपने ब्लॉग में छापने के लिये उसके अनुदित करने वाले लेखक से अनुमति ली थी.
इसी बात से एक बात ध्यान आयी मैने आपको जो अपना नराई वाला लेख छापने की अनुमति दी थी उसे किसी ने आपकी साइट से पूरा कॉपी-पेस्ट कर कुछ ग्रुप्स में भेजा है.कुछ में मैने अपनी रचना के लिये विरोध दर्ज करवा दिया है.
अब हम तो बस ऐसे ही हैं और लिखते हैं,फिर भी बोर्ड लगा रखा है-
कुछ जानकारी मिले तो हमे भी बताइएगा
अनुभूति, अभिव्यक्ति में लेखक, कवि खुद अपनी रचनायें भेजते हैं प्रकाशन के लिये मय अनुमति के.
दिवंगत लोगों की रचनायें जो कॉपी राईट के बाहर हैं, उन पर तो कोई समस्या है ही नहीं. बाकी का पता नहीं.
सही सवाल उठाया है…हम भी जानना चाहेगें…
कॉपीराइट के लिये आप रचना को रजिस्टर करवा सकते हैं पर यह अनिवार्य नहीं है। यदि कोई रचना छपी है तो वह स्वतः कॉपिराइट हो गयी।
कॉपीराइट एक तरह की सम्पत्ति है जो किसी के मरने के बाद उसके वारिसों के पास जाती है।
सारे कॉपीराइट कुछ सालों बाद मुक्त हो जाते हैं यह समय अवधि अलग अलग देशों में अलग है।
यदि आप कॉपीराइट के समय के अन्दर किसी और का लेख छापना चाहते हैं तो लेखक या उसके वारिसों की अनुमति चाहिये।
कुछ शर्तो के अन्दर कॉपीराइटड लेख का कुछ भाग बिना अनुमति के छापा जा सकता है। यह मैंने यहां विस्तार से बताया है।
कॉपलेफ्ट लेख उन शर्तों के अधीन होते हैं जिनके अन्दर कॉपीराइट किये जाते हैं। आप उन्ही शर्तों के अन्दर प्रकाशन कर सकते हैं। क्रिएटिव के कई लाइसेन्स हैं सबकी शर्ते अलग हैं।
मेरा चिट्ठे की कॉपलेफ्ट शर्ते सबसे ज्यादा व्यापक हैं आप जब चाहें जैसे चाहें कॉपी कर सकते हैं