04 Nov
Posted as राजनीति, देश दुनिया
Tags:देश दुनिया, राजनीति, emergency, musarraf, pakistanकहीं आप ये तो नही सोच रहे कि मैं किसी देसी टेलिविजन में आने वाले किसी डांस कार्यक्रम का जिक्र कर रहा हूँ। अगर ऐसा है तो आप गलत सोच रहे हैं। मैं बात कर रहा हूँ उस शख्स की जिसने पहले भारत के राजनेताओं को नचाया था, अपनी कूटनीटि (या धूर्त राजनीति) से, मैं बात कर रहा हूँ उस शख्स की जो पर्दे के पीछे कारगिल में हुए हमले का अगुआ भी था।
जी हाँ, अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के सर्वेसर्वा की, मुशरर्फ को अपनी सेना के सर्वेसर्वा की गद्दी छोड़नी थी और सिर्फ (सीविलियन) राष्ट्रपति के पद पर बने रहना था। लेकिन शायद मुशरर्फ भी ये जानते थे कि एक बार सेना की वर्दी छोड़ी तो कहीं पाकिस्तान भी ना छोड़ना पड़े। इसीलिये उन्होंने पहले से ही यह सोच रखा होगा, लेकिन अब यहाँ सवाल ये उठता है कि पिछले कई दिनों से पाकिस्तान में घट रही घटनायें, वो बम विस्फोट, वो अस्थिरता कही इमरजेंसी लगाने की भूमिका तो नही थी, कही कोई सोची समझी साजिश। पाकिस्तान की जनता के लिये ये एक कठिन दौर है लेकिन ये एक बात तो बताती है कि मुशरर्फ ने दुनिया से सभी नेताओं को तिगनी का नाच नचाया हुआ है। मेरी नजर में तो मुशर्रफ ही बाकि सभी नेताओं पर अभी तक भारी पड़े हैं, आप लोगों का क्या मानना है अपने विचारों से जरूर अवगत करायें।
एक दो दिन पहले, शायद काफी दिनो (महिनों) बाद चिट्ठाजगत में आना हुआ, तो पाया कि यहाँ तो नये नये चिट्ठों की बाढ़ आयी हुई है। अच्छा है, इन सभी नये चिट्ठाकारों का स्वागत है।
4 Responses
kakesh
November 4th, 2007 at 7:37 pm
1आप नये चिट्ठों का स्वागत करें हम तो आपका स्वागत करते हैं.आब आइये और लिखते रहिये.
divyabh
November 4th, 2007 at 9:20 pm
2कैसे है तरुण भाई…
हो सकता है… और लो भाई में यही हुआ…।
अरे आपने कैसे जान लिया कि हम यही सोंच रहें होंगे पर जब क्लिक कर रहे थे तो जरुर दिमाग में आया कि कुछ अलग भी चिंतन
बिल्कुल सच कहा है आपने मुशर्रफ जी से बड़ा कूटनीतिज्ञ संसार में कोई दूसरा नही है।
समीर लाल
November 5th, 2007 at 7:28 am
3चलो, सबका एक एक करके स्वागत करो उनके चिट्ठे पर. अपने चिट्ठे से सबको एक साथ सस्ते में निपटान की कोशिश काम न करेगी मित्र.
समीर लाल
November 5th, 2007 at 7:28 am
4चलो, सबका एक एक करके स्वागत करो उनके चिट्ठे पर. अपने चिट्ठे से सबको एक साथ सस्ते में निपटान की कोशिश काम न करेगी मित्र.
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