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स्वीमिंग पूल में टॉपलैसः आप का क्या कहना है?

इस बहस में महिला चिट्ठेकारों या रीडरस के क्या विचार हैं ये मैं जरूर जानना चाहूँगा क्योंकि ये कुछ लड़कियों या महिलाओं ने शुरू ही महिला और पुरूषों में समान अधिकार की बात पर किया है। ये खबर है स्टॉकहोम (स्वीडन) की, जहाँ २ लड़कियाँ टॉपलैसे हो कर पब्लिक स्वीमिंग पूल में तैरने पहुँच गयी। [...]

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

यहाँ कोतवाल है भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड जो कि अपने को वास्तव में भी भारतीय क्रिकेट का कोतवाल समझता है और चोर जो कोतवाल को डांट रहा है वो हैं शाहरूख किंग खान। शाहरूख का कहना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उनके साथ वो सलूक नही किया जैसा शायद वो चाहते थे इसलिये [...]

काला शुक्रवार

आने वाला ये शुक्रवार अमेरिका में काले शुक्रवार के नाम से प्रसिद्ध है, या यों कहिये थैंक्सगिविंग डे के बाद का शुक्रवार काले शुक्रवार के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन से क्रिसमस की खरीदारी की शुरूआत होती है। थैंक्सगिविंग डे हमेशा नवंबर माह के चौथे बृहस्पतिवार को पड़ता है [...]

[ More ] November 22nd, 2007 | 6 Comments | Posted in देश दुनिया |

फिल्म समीक्षाः मनोरमा और जॉनी गद्दार

मनोरमा, सिक्स फीट अंडर और जॉनी गद्दार ये दोनों फिल्में अगर हालीवुड में बनी होती तो काफी अच्छा व्यवसाय करती और तारीफें भी बटोरती। इन दोनों फिल्मों का पिटना (जी हाँ मैं यही कहूँगा) इस बात का परिचायक है कि भारतीय दर्शक अभी बौद्धिक रूप से ज्यादा विकसित नही हुए हैं। अभी भी इन्हें उलूल-जूलूल [...]

[ More ] November 21st, 2007 | 5 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा |

चिट्ठाकारों के वर्गीकरण की पोस्ट में पड़ी टिप्पणियों पर टिप्पणी

हमारी पिछली पोस्ट पर जम कर टिप्पणियों की ओला वृष्टि हुई अब ये अलग बात है कि हिन्दी चिट्ठाजगत के चेरापूँजी के लिये ये टिप्पणियाँ बूँदाबांदी से कम नही क्योंकि वहाँ तो ये रोज की बात है। यही नही टिप्पणियों के साथ साथ जम कर इस्मायली भी मिली । मेरे को लगा कि इतनी टिप्पणियों [...]

[ More ] November 19th, 2007 | 7 Comments | Posted in खालीपीली |

हिन्दी चिट्ठाकारों का वर्गीकरण

क्या आप जानना चाहते हैं कि आप हिन्दी चिट्ठाकारों के किस गुट या समुदाय या ग्रुप में फिट बैठेंगे, जानने या पता लगाने के लिये आपको इनके वर्गीकरण के बारे में पढ़ना पढ़ेगा। अगर आप को लगे कि नही इनमें से किसी भी खांचे में आपका फ्रेम फिट नही बैठता तो कोई बात नही जैसा [...]

हल्ला मचा रखा है नंदीग्राम बंदीग्राम

इधर कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि हर तीसरी या चौथी पोस्ट नंदीग्राम पर ही होती है, हिन्दी चिट्ठाजगत में नंदीग्राम का ही शोर है। अरे इतना शोर मचाने की क्या जरूरत है ये तो गरीब हैं, किसान हैं ये तो शायद पैदा ही कुचले जाने के लिये हैं। इनका ये ही हस्र होना [...]

प्रचार, प्रसार और फिर समीक्षक की मार

पिछले कई हफ्तों से समाचारों की सुर्खियों में छायी रहने वाली दोनो फिल्में आखिरकार समाचार चैनलों से निकल बड़े पर्दे में आ ही गयी। इन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने इसके प्रचार और प्रसार में कोई कसर नही छोड़ी। बात आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको प्रचार और प्रसार का अंतर समझा दूँ। हमने दिवाली [...]

जेनेरिक शेरो शायरी

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]

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