ऐसे कश्मीर का आखिर क्या करेंगे?
आज प्रभा साक्षी में, मैं इस लेख गरीब मजदूरों पर टूट रहा है आतंकवादियों का कहर को पढ़ रहा था, ये पढ़कर तो ये ही लग रहा था कि ऐसे कश्मीर को लेकर हम आखिर क्या करेंगे। जब आतंकी इस तरह की खुलेआम घोषणायें करते हैं तो प्रदेश और देश की सरकारें प्रत्युतर क्यों नही देती। क्या इस तरह से वाकई कश्मीर का विकास संभव है, जहाँ गैर कश्मीरी को प्रदेश छोड़ के चले जाने को कह दिया जाता है।

वह किस सज्जन का किस्सा था - जिन्होने संसद में अपनी गंजी खोपड़ी दिखा कर नेहरू से कहा था कि इसपर भी एक बाल (सीक्वेल टू अ ब्लेड ऑफ ग्रास) नहीं है; इसका मतलब इसपर भी हक छोड़ दिया जाये? वही बात कश्मीर पर…
शायद इसीलिये आजकल दुनिया, सिर पर नकली बाल लगवाने के लिये बेकरार हुई चली है, शायद इसीलिये बिग का प्रचलन चल निकला हो। कम से कम ये लोग गंजे होने पर हार नही मानते और विभिन्न तरीके आजमाते हैं। सरकार को कश्मीर के मामले में कठोर होना ही पड़ेगा नही तो इस तरह की हरकतें बड़ती जायेंगी।
तरुण जी आपने जो लिंक दिया था उसे हम तो क्लिक करके पढ़ ही नही पाए। पता नही xjhc…… करके कुछ दिख रहा था।
कहाँ हैं तिल को ताड़ बनाने वाले सेक्युलरिस्ट?
कहाँ हैं शबाना आजमी, जावेद अख्तर और खुशवन्त सिंह? सहमत वाले पाक परस्तों से सहमत क्यों हैं? क्या बात है कि मनमोहन सिंह, सोनिया और सारे कम्यूनिस्ट चुप हैं? क्या वे अफजल और उसके साथियों की सुरक्षा के इन्तजाम करने में व्यस्त हैं या बांग्लादेशियों को राशनकार्ड बांट रहे हैं।
समझ नहीं आता क्या कहें और क्या करें, अपने ही देश में लोग सुरक्षित नहीं।
@Mamta.tv,
ममता जी प्रभासाक्षी कृतिदेव फॉन्ट में है। लेख पढ़ने के लिए इसे इंस्टाल करें।