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	<title>Comments on: सक्रिय और धड़ाधड़ चिट्ठों का विरोधाभास</title>
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	<description>निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥</description>
	<pubDate>Mon, 06 Oct 2008 22:25:14 +0000</pubDate>
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		<title>By: निठल्ला चिन्तन &#187; आप भी बनायें अपना खुद का एग्रीगेटर</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3952</link>
		<dc:creator>निठल्ला चिन्तन &#187; आप भी बनायें अपना खुद का एग्रीगेटर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jul 2007 01:47:24 +0000</pubDate>
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		<description>[...] &#171; सक्रिय और धड़ाधड़ चिट्ठों का विरोधाभास [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] &laquo; सक्रिय और धड़ाधड़ चिट्ठों का विरोधाभास [...]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनुराग श्रीवास्तव</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3946</link>
		<dc:creator>अनुराग श्रीवास्तव</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Jul 2007 01:42:49 +0000</pubDate>
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		<description>तरुण,

मुझको तो आपकी अगली पेस्ट की प्रतीक्षा रहेगी - उसके बाद मैं भी अपना "कस्टमाइज़्ड एग्रीगेटर" बनाऊंगा जो कि सिर्फ़ मेरी ही पोस्ट दिखायेगा. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तरुण,</p>
<p>मुझको तो आपकी अगली पेस्ट की प्रतीक्षा रहेगी - उसके बाद मैं भी अपना &#8220;कस्टमाइज़्ड एग्रीगेटर&#8221; बनाऊंगा जो कि सिर्फ़ मेरी ही पोस्ट दिखायेगा. <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: vipul</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3945</link>
		<dc:creator>vipul</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jul 2007 16:31:47 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;i&gt;इसलिये लिंक को पैमाना अगर माना भी जाय तो इसका वजन थोड़ा कम रहना चाहिये जिससे सक्रिय चिट्ठों की लिस्ट थोड़ा सही से रहे।&lt;/i&gt;
@तरूण
शायद आपने सारे बिन्दू देखे नहीं, और लम्बे समय में चौथा बिन्दू निर्णय करेगा कौन कितने पानी में है। सूत्र समय के हिसाब से बदला भी जायेगा।

http://www.chitthajagat.in/?sakriyeta=dekho
१ आपके चिट्ठा लिखने की आवृति क्या है। 
२ आपने आखरी लेख कब लिखा। 
३ आपके लेख का उदाहरण कितने चिट्ठों की कितनी प्रविष्टियों में दिया गया। ध्यान रहे "उदाहरण" लेख feed में अवतरित होता हो। 
४ "पसंदीदा चिट्ठे", "पसंदीदा लेख", "चिट्ठे सूचक", "सांकेतिकशब्द सूचक" सूची में आपको कितने प्रयोक्ताओं ने सूचीबद्ध किया है। 
५ इस के लिए प्रयोग होने वाला सूत्र गोपनीय रहेगा, एवं समय के हिसाब से बदला भी जायेगा।

वैसे सक्रिय और धड़ाधड़ चिट्ठों में विरोधाभास न होता तो अलग-अलग करने की जरूरत न होती। 

एक स्वाल है आप सब से, अगर क्वालेटी जाँचने के लिए अगर कोई सूत्र बनाया जाए और वो आप सब की किसी पोस्ट को न दिखाए तो आप को कैसा लगेगा।


और उत्तर आनें दें फिर अपने विचार विस्तार से रखुँगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><i>इसलिये लिंक को पैमाना अगर माना भी जाय तो इसका वजन थोड़ा कम रहना चाहिये जिससे सक्रिय चिट्ठों की लिस्ट थोड़ा सही से रहे।</i><br />
@तरूण<br />
शायद आपने सारे बिन्दू देखे नहीं, और लम्बे समय में चौथा बिन्दू निर्णय करेगा कौन कितने पानी में है। सूत्र समय के हिसाब से बदला भी जायेगा।</p>
<p><a href="http://www.chitthajagat.in/?sakriyeta=dekho" rel="nofollow">http://www.chitthajagat.in/?sakriyeta=dekho</a><br />
१ आपके चिट्ठा लिखने की आवृति क्या है।<br />
२ आपने आखरी लेख कब लिखा।<br />
३ आपके लेख का उदाहरण कितने चिट्ठों की कितनी प्रविष्टियों में दिया गया। ध्यान रहे &#8220;उदाहरण&#8221; लेख feed में अवतरित होता हो।<br />
४ &#8220;पसंदीदा चिट्ठे&#8221;, &#8220;पसंदीदा लेख&#8221;, &#8220;चिट्ठे सूचक&#8221;, &#8220;सांकेतिकशब्द सूचक&#8221; सूची में आपको कितने प्रयोक्ताओं ने सूचीबद्ध किया है।<br />
५ इस के लिए प्रयोग होने वाला सूत्र गोपनीय रहेगा, एवं समय के हिसाब से बदला भी जायेगा।</p>
<p>वैसे सक्रिय और धड़ाधड़ चिट्ठों में विरोधाभास न होता तो अलग-अलग करने की जरूरत न होती। </p>
<p>एक स्वाल है आप सब से, अगर क्वालेटी जाँचने के लिए अगर कोई सूत्र बनाया जाए और वो आप सब की किसी पोस्ट को न दिखाए तो आप को कैसा लगेगा।</p>
<p>और उत्तर आनें दें फिर अपने विचार विस्तार से रखुँगा।</p>
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	<item>
		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3944</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jul 2007 15:18:37 +0000</pubDate>
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		<description>@विपुलजी, चिट्ठों के लिंक के लिये मैने पहले ही कहा था कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाय तो ८०-९० प्रतिशत चिट्ठों का लिंक अभी भी नही हो पाता। इसलिये लिंक को पैमाना अगर माना भी जाय तो इसका वजन थोड़ा कम रहना चाहिये जिससे सक्रिय चिट्ठों की लिस्ट थोड़ा सही से रहे।

@अभयजी, "&lt;i&gt;लिस्ट बनते ही आदमी एक होड़ में शामिल हो जाता है&lt;/i&gt;" बहुत सही बात कही है आपने।

@अनुनाद, युनुस, आपका कहना उचित है मनन करने की जरूरत है।

@ई-स्वामी, चिंता तो हमें भी नही है लेकिन बाकि लोग वक्त रहते चेत जायें तो अच्छा :)

@मसीजिवी, हमने कूड़ा किसी को नही कहा, बात उनकी हो रही है जो इधर उधर की खबर को ३-४ लाईन का जामा पहना एक ही दिन में धड़ाधड़ छापे जाते हैं।

बाकि सभी लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिये शुक्रिया :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@विपुलजी, चिट्ठों के लिंक के लिये मैने पहले ही कहा था कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाय तो ८०-९० प्रतिशत चिट्ठों का लिंक अभी भी नही हो पाता। इसलिये लिंक को पैमाना अगर माना भी जाय तो इसका वजन थोड़ा कम रहना चाहिये जिससे सक्रिय चिट्ठों की लिस्ट थोड़ा सही से रहे।</p>
<p>@अभयजी, &#8220;<i>लिस्ट बनते ही आदमी एक होड़ में शामिल हो जाता है</i>&#8221; बहुत सही बात कही है आपने।</p>
<p>@अनुनाद, युनुस, आपका कहना उचित है मनन करने की जरूरत है।</p>
<p>@ई-स्वामी, चिंता तो हमें भी नही है लेकिन बाकि लोग वक्त रहते चेत जायें तो अच्छा <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@मसीजिवी, हमने कूड़ा किसी को नही कहा, बात उनकी हो रही है जो इधर उधर की खबर को ३-४ लाईन का जामा पहना एक ही दिन में धड़ाधड़ छापे जाते हैं।</p>
<p>बाकि सभी लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिये शुक्रिया <img src='http://www.readers-cafe.net/nc/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: masijeevi</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3942</link>
		<dc:creator>masijeevi</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jul 2007 07:46:11 +0000</pubDate>
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		<description>मामला जाहिर है काफी जटिल है, गुनातमकता के सवाल पर जरा संभल कर चला जाएं क्‍योंकि किसे गुणात्‍मक मानें इस निर्णय की गुणात्‍मकता से भी फर्क पड़ेगा। वैसे भ्रम धड़ाधड़ शब्‍द की वजह से है- गोपनाय सुत्र में केवल पोस्‍टों का संख्‍या ही एकमात्र मापदंड नहीं है ऐसा विपुल ने बताया था। शेयर, टीवी हम नहीं पढ़ते पर हम कौन फन्‍ने खां हो गए जो तय करेंगे की वह कूड़ा है- हम तो नामवर सिंह को भी नहीं पढ़ते पर उन्‍हें कोन्‍ कूड़ेदान में फेंकता है इसलिए सबको आने दें- एग्रीगेटर राशन कोटे का काम न करे लिखा जाना चाहिए खूब..बाकी छलनी तो लोगों के दिमाग में लगी ही है वे खुद तय कर लेंगे।क्‍या पढ़ना है क्‍या नहीं..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मामला जाहिर है काफी जटिल है, गुनातमकता के सवाल पर जरा संभल कर चला जाएं क्‍योंकि किसे गुणात्‍मक मानें इस निर्णय की गुणात्‍मकता से भी फर्क पड़ेगा। वैसे भ्रम धड़ाधड़ शब्‍द की वजह से है- गोपनाय सुत्र में केवल पोस्‍टों का संख्‍या ही एकमात्र मापदंड नहीं है ऐसा विपुल ने बताया था। शेयर, टीवी हम नहीं पढ़ते पर हम कौन फन्‍ने खां हो गए जो तय करेंगे की वह कूड़ा है- हम तो नामवर सिंह को भी नहीं पढ़ते पर उन्‍हें कोन्‍ कूड़ेदान में फेंकता है इसलिए सबको आने दें- एग्रीगेटर राशन कोटे का काम न करे लिखा जाना चाहिए खूब..बाकी छलनी तो लोगों के दिमाग में लगी ही है वे खुद तय कर लेंगे।क्‍या पढ़ना है क्‍या नहीं..</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: तीन गैरज़रूरी बातें :: नुक्ताचीनी</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3940</link>
		<dc:creator>तीन गैरज़रूरी बातें :: नुक्ताचीनी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jul 2007 21:24:04 +0000</pubDate>
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		<description>[...] दूसरी, थोड़ी कम महत्वपूर्ण बात, यह कि रवि भैया और श्रीश के परिश्रम से हिन्दी चिट्ठों की निर्देशिका का जालस्थल अब हिन्दी में भी उपलब्ध है। यदि आप पंजीकृत हैं तो अंग्रेज़ी और हिन्दी में से कोई भी भाषा चुन सकते हैं अपने प्रोफाईल पृष्ठ पर। वैसे मुझे हैरत होती है कि इस जालस्थल पर रोज कई लोग पंजीकृत हो रहे हैं पर ज्यादातर अपने ब्लॉग नहीं जोड़ते। जो ब्लॉग जोड़ देते हैं, वो उसे क्लेम नहीं करते जिससे कि ब्लॉग के प्रोफाईल पृष्ठ पर रचयिता के रूप में उनका नाम नहीं दिखता। और जो क्लेम कर लेते हैं वो दुबारा रुख नहीं करते इस ओर। इस निर्देशिका पर आप अन्य चिट्ठों की समीक्षा लिख कर उनको रेटिंग प्रदान कर सकते हैं। ऐसे समय में जब सक्रियता और धड़ाधड़ शब्दों के बीच का फासला समझ न आता हो चिट्ठों की श्रेष्ठता का ये सामूहिक पैमाना हो सकता था। और कल क्या जाने इंडीब्लॉगीज़ के लिये केवल इसी निर्देशिका के क्लेम्ड चिट्ठों को ही शामिल किया जाय [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] दूसरी, थोड़ी कम महत्वपूर्ण बात, यह कि रवि भैया और श्रीश के परिश्रम से हिन्दी चिट्ठों की निर्देशिका का जालस्थल अब हिन्दी में भी उपलब्ध है। यदि आप पंजीकृत हैं तो अंग्रेज़ी और हिन्दी में से कोई भी भाषा चुन सकते हैं अपने प्रोफाईल पृष्ठ पर। वैसे मुझे हैरत होती है कि इस जालस्थल पर रोज कई लोग पंजीकृत हो रहे हैं पर ज्यादातर अपने ब्लॉग नहीं जोड़ते। जो ब्लॉग जोड़ देते हैं, वो उसे क्लेम नहीं करते जिससे कि ब्लॉग के प्रोफाईल पृष्ठ पर रचयिता के रूप में उनका नाम नहीं दिखता। और जो क्लेम कर लेते हैं वो दुबारा रुख नहीं करते इस ओर। इस निर्देशिका पर आप अन्य चिट्ठों की समीक्षा लिख कर उनको रेटिंग प्रदान कर सकते हैं। ऐसे समय में जब सक्रियता और धड़ाधड़ शब्दों के बीच का फासला समझ न आता हो चिट्ठों की श्रेष्ठता का ये सामूहिक पैमाना हो सकता था। और कल क्या जाने इंडीब्लॉगीज़ के लिये केवल इसी निर्देशिका के क्लेम्ड चिट्ठों को ही शामिल किया जाय [...]</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: divyabh</title>
		<link>http://www.readers-cafe.net/nc/2007/07/21/chitthajagat-sujhav/#comment-3938</link>
		<dc:creator>divyabh</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jul 2007 17:20:01 +0000</pubDate>
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		<description>तरूर,
बदलाव तो अभी काफी होना है मगर यह कौन करे यह भी प्रश्न है…कौन पहचान सकता है कि कौन सी पोस्ट अच्छी है कौन बुरी देखिए मैं भी तो काफी दिनों से हूँ यहाँ मगर क्या फर्क पड़ता है…अपने अंदर तो पता चलता ही है कि कौन क्या लिख रह है और हम क्या जल्बे दिखा रहे हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तरूर,<br />
बदलाव तो अभी काफी होना है मगर यह कौन करे यह भी प्रश्न है…कौन पहचान सकता है कि कौन सी पोस्ट अच्छी है कौन बुरी देखिए मैं भी तो काफी दिनों से हूँ यहाँ मगर क्या फर्क पड़ता है…अपने अंदर तो पता चलता ही है कि कौन क्या लिख रह है और हम क्या जल्बे दिखा रहे हैं।</p>
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