आजकल हिन्दी चिट्ठा संसार में 3-4 एग्रीगेटर हो गये हैं, अगर ये आपको अभी भी कम लग रहे हैं तो मेरी अगली पोस्ट देखना मत भूलियेगा जिसमें मैं आपको बताऊँगा कि आप अपना खुद का एग्रीगेटर कैसे बना सकते हैं। हाँ तो मैं बात कर रहा था हिंदी एग्रीगेटर की। इनमें से एक है चिट्ठाजगत, जिसमें बाकियों के मुकाबले थोड़ा अधिक फीचर हैं। हमारी इस पोस्ट को चिट्ठाजगत की टीम शिकायत या सुझाव भी समझ सकती है जाहिर सी बात है मानने ना मानने का चिट्ठाजगत की टीम को पूरा हक है।

चिट्ठाजगत में, मैं ये नही समझ पाया कि धड़ाधड़ छपते चिट्ठों की अलग से लिस्ट दिखाकर क्या हासिल करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि अगर भाषा के अर्थ में जायें तो सक्रिय वो ही कहा जायेगा जो धड़ाधड़ पोस्ट छाप रहा हो। लेकिन अगर आप इन दोनों बॉक्स में नजर दौड़ायें तो जो धड़ाधड़ चिट्ठे छाप रहे हैं वो सक्रिय लिस्ट में उस जगह नही हैं जहाँ होना चाहिये। और जो सक्रिय हैं वो धडाधड़ चिट्ठे नही लिख रहे हैं यानि कि उन्हें कोई और सक्रिय बना रहा है, शायद उनकी पोस्ट का लिंक।

हिन्दी चिट्ठाजगत में अमूमन अभी ऐसी स्थिती नही है कि ब्लोगर एक दूसरे के पोस्ट को लेकर कुछ लिखें। ये सिर्फ तभी होता दिखा है अभी तक जब कोई किसी विवादास्पद विषय पर कुछ लिखता है। अगर कुछ एक अपवादों को छोड़ दिया जाय तो लगभग 80-90 प्रतिशत चिट्ठों की पोस्टों का जिक्र (या लिंक) किसी दूसरे के ब्लोग में शायद ही होता हो। खैर इस सक्रिय लिस्ट से उतना खतरा नही है जितना धड़ाधड़ छपते चिट्ठों की लिस्ट से है

धड़ाधड़ चिट्ठों के अगर टॉप के 3-4 लिंक पर क्लिक कीजिये तो ऐसा कुछ नही मिलता जो आपको वहाँ दोबारा लेकर जाये। किसी में शेयर मार्केट की किसी न्यूज की 4-5 लाईन हैं तो दूसरे में पहले से ही सताये सास-बहू के सीरियलों के अलग अलग एपिसोड को डाउनलोड करने के लिये दिया गया लिंक। कहीं ऐसा ना हो कि धड़ाधड़ के बॉक्स में बने रहने के चक्कर में क्वालिटी के लेखों की हिन्दी में कमी होने लगे। ध्यान रहे क्वालिटी लेख का किसी भी भाषा के उत्थान में बहुत बड़ा हाथ होता है। १ घंटे के अंतर में 2-3 लाईन की एक साथ 4-5 पोस्ट (वो भी प्रतिदिन) में पढ़ने लायक क्या हो सकता है ये समझने की समझ अपनी खोपड़ी में तो नही है। टीआरपी के चक्कर में न्यूज चैनल की खबरों का जो हाल हुआ है कहीं ऐसा ना हो कि वो सब हिंदी ब्लागिंग में भी दिखाये देने लगे।

हिंदी को इंटरनेट और दुनिया में फैलाना एक मेराथन रेस है जिसमें धीरे धीरे दौड़ा जाता है, इतने तेज अगर भागने लगे तो कहीं फीनिश लाईन तक पहुँचते पहुँचते हांफने ना लगे। बरहाल ये मेरा अपना नजरिया है, हो सकता है आप इससे इत्तेफाक नही रखते हो, अगर ऐसा है तो आप भी अपने विचार रख सकते हैं, शायद इस बहाने हिंदी ब्लागिंग का कुछ भला ही हो जाय।

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