समय बड़ा बलवान
आज ही पता चला कि कुछ दिनों पहले दिल्ली में धकापेल मची थी, जो जनता चिट्ठों के मार्फत जूतमजूत पर उतरी रहती थी, लस्सी के साथ गुफ्तगू के मजे ले रही थी। अच्छा है हिंदी ब्लोगवार्तायें भी होने लगी हैं :)। अभी कुछ लोगों की पोस्ट इस वार्ता के संदर्भ में पढ़ी हैं, कुछ की पढ़नी बाकि हैं (ढूँढनी पड़ेंगी पहले, आजकल धड़ाधड़ छापने का चलन जो चल निकला है ;))। अच्छा लगा सुंदर सुंदर चेहरे मोहरों को बतियाते हुए देखना, शायद इसी लिये कहा है समय बड़ा बलवान कब क्या करवा दे कह नही सकते।
समय से याद आया कि हम आज यहाँ आये किसी ओर वजह से थे, वजह नीचे देखी जा सकती है।
पुराने समय में फटे कपड़े पहनने का मतलब गरीब होना होता था, और आज की २१वीं सदी में फटी जींस पहनने का मतलब है फैशन की समझ और फैशनेबल होना यानि कि अब अमीर पहनते हैं फटे कपड़े वो भी शान से।
(अभी अभी पढ़कर ये एहसास हुआ कि थोड़ी सी गर्मी उधर भी थी जिसकी कुछ उमस इधर भी थी)












This post has 10 comments
July 19th, 2007
मस्त है।
July 19th, 2007
हा हा हा… सही है गुरू
July 19th, 2007
खाने की टेबल पर सब मामले सुलझ जाते है। क्योंकि किसी का ध्यान खाने पर और किसी का कैलोरी-काउन्ट पर होता है बातचीत तो टाइम पास के लिए की जाती है।
July 19th, 2007
कार्टून बढ़िया बना रहे हैं पर हिन्दी में बनायें तो ज्यादा अच्छा लगेगा।
July 19th, 2007
बढिया है!
July 19th, 2007
कृपया हिन्दी मे बनाएं।
July 19th, 2007
कुछ बेवकूफ़ लोगों का शगल है तरूण भाई, फटे कपड़े पहन फैशनेबल कहलाना!!
July 19th, 2007
भईया गर्मी १४ तारीख वाली मीट में हुई थी, हमारी १८ तारीख वाली में तो ठंडक ही रही।
July 19th, 2007
कार्टून बेहतरीन है. हा हा!!
July 19th, 2007
सही है भाई…कार्टून तो मुझे हमेशा से एक सत्य की तस्वीर दिखाई देती है…बहुत सुंदर
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