शांति को कहाँ ढूँढे रे बन्दे

बिहारी के दोहों के लिये कही बात शायद कार्टूनों के लिये भी सही बैठती है, कौन सी बात? अरे वही “देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर”। जब देखा अपने अमितवा धड़ाधड़ चिट्ठे छाप रहे हैं कार्टून बना बना के तो सोचा क्यों ना उनसे थोडा सा इंसपरेशनवा ले लिया जाय। इसलिये आप भी देख लीजिये हमरा पहला कार्टून, शीर्षक है “शांति” (Peace) -

Peace

About the Author

Tarun
निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारों की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की; संक्षेप में कहूँ तो ये है थोड़ी मस्ती थोड़ा चिंतन।

[आपकी हर तरह की टिप्पणी का स्वागत है, ये प्रोत्साहन तो देती ही है साथ में ये भी पता चलता है कि आप लोग किस तरह के आलेखों की अपेक्षा करते हैं। और अगर आप चाहें तो निठल्ला चिंतन को सीधे ईमेल के द्वारा सब्सक्राईब कर सकते हैं और या फिर फीड रीडर में सब्सक्राइब करके भी पढ़ सकते हैं]

9 Responses to “ शांति को कहाँ ढूँढे रे बन्दे ”

  1. हा हा!!! बेहतरीन. अब इसमें हिन्दी कार्टून भी सीख लो. अमित ने बता तो दिया ही है, हम देखे थे. :)

  2. Nice, funny and to the point.

  3. वाह सही है। रोज बनाओ।

  4. एक अच्छी शुरआत है - उम्मीद करता हूं आगे और भी आपके बनाए कार्टून देखने को मिलेंगे।

  5. आपके पहले कार्टून के लिए बधाई. आपने तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कार्टून बनाया है - बुश और पीस — भाई वाह!

  6. Nice.. n meaningful….

  7. हा हा हा, सही है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा, छुट पुट पटाखा है। कुछ अच्छे से बजाओ बुशवा की तो मजा आए!! ;)

  8. हाँ जी अब हिन्दी में भी बनाना शुरु कीजिए। हम आते ही रहेंगे देखने। वैसे पहला कार्टून ही शानदार रहा। :)

  9. [...] « शांति को कहाँ ढूँढे रे बन्दे [...]

Leave a Reply

You can use these XHTML tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <blockquote cite=""> <code> <em> <strong>