13 Jul
Posted as मस्ती-मजा, व्यंग्य, कार्टून कोना
Tags:कार्टून कोना, मस्ती मजा, व्यंग्य, मस्ती मजा व्यंग्य, cartoon, Peaceबिहारी के दोहों के लिये कही बात शायद कार्टूनों के लिये भी सही बैठती है, कौन सी बात? अरे वही “देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर”। जब देखा अपने अमितवा धड़ाधड़ चिट्ठे छाप रहे हैं कार्टून बना बना के तो सोचा क्यों ना उनसे थोडा सा इंसपरेशनवा ले लिया जाय। इसलिये आप भी देख लीजिये हमरा पहला कार्टून, शीर्षक है “शांति” (Peace) -
9 Responses
समीर लाल
July 13th, 2007 at 6:52 am
1हा हा!!! बेहतरीन. अब इसमें हिन्दी कार्टून भी सीख लो. अमित ने बता तो दिया ही है, हम देखे थे.
Anurag Mishra
July 13th, 2007 at 6:53 am
2Nice, funny and to the point.
अनूप शुक्ल
July 13th, 2007 at 7:31 am
3वाह सही है। रोज बनाओ।
SHUAIB
July 13th, 2007 at 9:44 am
4एक अच्छी शुरआत है - उम्मीद करता हूं आगे और भी आपके बनाए कार्टून देखने को मिलेंगे।
रवि
July 13th, 2007 at 12:01 pm
5आपके पहले कार्टून के लिए बधाई. आपने तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कार्टून बनाया है - बुश और पीस — भाई वाह!
manya
July 13th, 2007 at 1:55 pm
6Nice.. n meaningful….
Amit
July 13th, 2007 at 4:54 pm
7हा हा हा, सही है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा, छुट पुट पटाखा है। कुछ अच्छे से बजाओ बुशवा की तो मजा आए!!
श्रीश शर्मा
July 13th, 2007 at 5:18 pm
8हाँ जी अब हिन्दी में भी बनाना शुरु कीजिए। हम आते ही रहेंगे देखने। वैसे पहला कार्टून ही शानदार रहा।
निठल्ला चिन्तन » Profit Sharing | प्रोफिट शेयरिंग
July 14th, 2007 at 3:54 am
9[…] « शांति को कहाँ ढूँढे रे बन्दे […]
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