28 May
Posted as राजनीति, समाज और समस्या, भारत, बस यूँ ही
Tags:बस यूँ ही, भारत, राजनीति, समाज और समस्या, BJP, god, goddess, rajasthan, Vasundhara raje, zee tvहिन्दू देवताओं के बारे में जरा सा भी इधर का उधर कहे जाने पर, या किसी फोटो का वैसा कर दिये जाने पर हत्थे से उखड़ जानी वाली पार्टी और बौखला जाने वाले कार्यकर्त्ता खुद कितने पानी में हैं उसकी ताजा मिसाल राजस्थान में देखने में आयी।
कल न्यूज देखने में पता चला कि भारतीय जनता पार्टी के चापलूस नेताओं ने मुख्यमंत्री समेत काफी सारे नेताओं (या मंत्रियों) को हिन्दू देवी देवता बना डाला। जितने चापलूस छुटभैये उतने ही चापलूसी पसंद बड़े नेता, ये नही कि इस बात पर उन्हें लताड़ा जाय खुश हो गये। हों भी क्यों ना अब वो भारतीय जनता पार्टी के नेता की जगह भारतीय देवता पार्टी के नेता ही कहलायेंगे ना।
अब अगर ये नेता आज देवी देवता के वस्त्र धारण कर उछल रहे हैं तो अगर कल कोई इनके कपड़े उतार पेंटिंग बना देगा तो भी क्या ये ऐसे ही खुश होंगे? शायद नही, तब कहीं ना कहीं विरोध में चक्का जाम होगा, कुछ सरकारी या प्राइवेट संपत्ति फूंकी जायेगी।
आजकल हर राजनीतिक पार्टी आचरण के मामले में नीचे की तरफ ही जा रही है, अगर ग्रन्थों की बात माने तो नीचे यानि पाताल। फिलहाल तो भारतीय जनता पार्टी के ही किसी कार्यकर्त्ता (जसवंत सिंह की पत्नी, शायद)ने कोई याचिका दायर की है अब देखना ये है कि इस बात को मीडिया कितनी हवा देता है।
अगर आप सोच रहे हैं हमने मीडिया को क्यों लपेटे में ले लिया तो हम बता दें, इस खबर को आधे घंटे के समाचार में शायद ५-१० मिनट की ही जगह मिली थी। अभी लगभग ५-६ दिन पहले इस आधे घंटे के समाचार में पूरे आधे घंटे एक ही खबर दिखायी। अब आप जानना चाहेंगे कि वो खबर क्या थी, खबर ये थी कि बिहार में किसी शादी में, सुहागरात से ठीक पहले टामा (चकमा) देकर कोई दुल्हन अपने यार-दोस्त के साथ भाग गयी। बस अपना ये चैनल आधे घंटे के समाचार कार्यक्रम में आधे घंटे तक ये ही दिखाता रहा। यहाँ तक कि समाचार वाचिका को दर्शकों से विदा लेने का मौका भी ना मिला।
क्या कहा आपने चैनल कौन सा, अरे वो ही जी टीवी। लगता है इस जी टीवी के न्यूज ऐडिटर को २४ घंटे के न्यूज चैनल और आधे घंटे की न्यूज का फर्क नही मालूम। खैर वापस भारतीय देवता पार्टी की तरफ आते हैं, तो जनाब राजस्थान के चापलूसों ने खुश होकर जनता पार्टी को देवता पार्टी बना डाला। अब देखना ये है कि इस बात का कितना और कौन कहाँ कहाँ विरोध करता है।
6 Responses
समीर लाल
May 28th, 2007 at 7:07 am
1सब मौके के नजाकत को समझते हैं, जानते हैं कि किस बात का विरोध करना है और किस पर समर्थन में नारे बुलंद करना है.. एक ही बात एक जगह चमत्कार, एक जगह नमस्कार, एक जगह फटकार!!! जब जैसा दिखा और जरुरत हुई.
sanjay bengani
May 28th, 2007 at 10:17 am
2मुझे तो हास्तास्पद लगा. चमचे की बेवकुफी
सागर चन्द नाहर
May 28th, 2007 at 10:36 am
3वो कहते है ना ” एक ही उल्लू काफी है…….. यहाँ तो (देवता पार्टी में) हर शाख पे उल्लू बैठा है।
अब अंजाम तो यही होना है।
वैसे यह नई बात नहीं है इससे पहले लालू चालीसा, लालू पचासा और लालू साठा भी लिखी गई थी।
श्रीश शर्मा
May 28th, 2007 at 3:09 pm
4सब अपना उल्लू साध रहे हैं भाया, बेवकूफ कोई नहीं।
vishal
May 28th, 2007 at 3:55 pm
5चमचे की बेवकूफी ही कहिए. मामला राजनीतिक है तो तूल् पकड रहा है. वैसे हमारे यहां इन्सान भगवान का भेष धारण कर ले तो इसे अजूबा नहीं माना जाता.. हर साल रामलीला में और शिवरात्री में लोग भगवान का भेष धरते हैं.
rishi
June 9th, 2007 at 9:54 am
6आपकी बातों मैं दम है | आज कल राजनीति और उसका मीडिया कवारेज़ बहुत ही हास्यास्पद हो गया है |
ऋषि
हिंदी मैं लिखें, अब quillpad.in से
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