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नोटपैड की महिमा

आओ सुनाये प्यार की एक कहानी, एक था लड़का एक थी नोटपैड…, ये कब हुआ, कैसे हुआ हमको तो होने के बाद ही पता चला। शुरूआत में तो हम नोटपैड को तुच्छ ही समझते आये थे, कभी कभार एक नजर मार ली तो मार ली लेकिन अब तो ये आलम है कि इसके बिना जीना दूभर हो गया है। एक भी दिन ना देखें तो लगता है जैसे कुछ मीसिंग सा है।

शायद प्यार होता ही कुछ ऐसे है चोरी चोरी चुपके चुपके। हमें अब भी याद है जब पहली बार नोटपैड को देखा था, देखते ही लगा ये भी कोई देखने की चीज है ना रंग ना रूप। फिर धीरे धीरे ये परिवर्तन कैसे हुआ हमको खुद ही नही पता। कब सादगी अच्छी लगने लगी पता ही नही चला बस गुनगुनाने लगे, “सभी अंदाजे हुस्न प्यारे हैं, हम मगर सादगी के मारे हैं“। हमें सादगी भरे गीत ज्यादा अच्छे लगने लगे, “कहीं एक मासूम नाजुक सी लड़की, बहुत खुबसूरत मगर सांवली सी” टाईप के गीत अच्छे लगने लगे।

सादगी ही नही बदन भी इतना कोमल और नाजुक था कि कैसे भी ढाल लो गोया कोई कह उठे, “नाजुक नाजुक बदन कोमल कोमल नयन तेरे मुखड़े पे चंदा गगन का गढ़ा, बड़े मन से विधाता ने तूझको गढ़ा“। निठल्ले! जरा एक मिनट रूक जा लिखने दे, हमने निठल्ले को लगभग डांट ही दिया जो हमें हिलाय जा रहा था। अच्छे खासे मूड का कबाड़ा ना कर दे इस बात का डर था। तो जनाब हम कह रहे थे अब आलम ये है कि अपनी सुबह नोटपैड को देखकर शुरू होती है शाम उसी को देखकर खत्म।

लगता है ये निठल्ला अपनी सुनाई बिना नही मानेगा, जरा एक मिनट रूकिये पहले इसकी सुन लें फिर अपनी कहेंगे। <इसे थोड़ी देर का सन्नाटा समझ लीजिये> अरे बाप रे! इस निठल्ले ने तो झटका सा दे दिया सारे चिट्ठेकार खासकर महिला चिट्ठाकर तो हमें अब तक कहीं मनचला ना घोषित कर चुकी हों। इस निठल्ले ने बात ही ऐसी बतायी है इसलिये अब ये जरूरी हो जाता है कि आगे कुछ कहने से पहले हम थोडा पिक्चर को क्लियर कर लें। निठल्ले ने बताया कि इस चिट्ठाजगत में नोटपैड नामकी चिट्ठाकारा हैं इसलिये हमें या तो अपनी जुबान को संयत करना चाहिये या सब कुछ साफ शब्दों में बता देना चाहिये कि हम बात क्या कर रहे हैं।

कहीं ऐसा ना हो कि चिट्ठाकारों की दुनिया के पहले चिट्ठाकार ना हो जाओ जिसे टिप्पणी के जगह पर जूते और सैंडिल पडे।

इसलिये हम आपको पहले ये बता देते हैं कि हम माइक्रोसोफ्ट के विंडोज नामके ओपरेटिंग सिस्टम में पाये जाने वाले नोटपैड की बात कर रहे हैं, जिसका पूरा नाम नोटपैड डॉट ईएक्सई है। अगर आपने इसे देखा होगा तो पाया होगा कि ये बहुत ही सादगी भरा सोफ्टवेयर प्रोग्राम है ना कोई टूलबार ना कोई चमकती ईमेज कुछ भी नही। और हम इसी सादगी की बात कर रहे थे, कोमल लचक भरे बदन से हमारा मतलब था कि आप इसे किसी भी आकार में ओपन कर सकते हैं मतलब है कैसे भी रि-साईज कर सकते हैं।

उसी की बात कर रहे थे, जब विंडोज से रूबरू हुए थे तब बाकि इतने सारे चमक धमक वाले सोफ्टवेयर थे कि इसे बिल्कुल ही बकवास समझ किनारे कर दिया। फिर धीरे धीरे इसकी उपयोगिता पता चलने लगी, जब एएसपी (एक्टिव सर्वर पेजेस) पर काम करने का पहला पहला मौका मिला तो जानकारों ने बताया कि कोड लिखने के लिये नोटपैड यूज करो ए एस पी के लिये सबसे बेस्ट है। फिर जब इधर का माल उधर करने की नौबत आयी, तब भी कहा गया कि नोटपैड यूज करो, इधर का माल उधर नही समझे अरे डेटा ट्रांसफर। डेटाबेस से डेटा भेजना था ई-मेल की थ्रू तो जिसे माल रिसिव करना था उसने ही बोला टेक्सट फोर्मेट में भेजना यानि कि बार बार नोटपैड यूज में लाना था डेटा देखने के लिये।

इतने पर भी बात नही थमी, कभी भी किसी फोर्मेटेड टेक्सट को बगैर फोर्मेट के चाहिये होता था नोटपैड ही काम आता था, कोई रीडमी फाईल पढ़नी हो तो नोटपैड, किसी कनफिग (सोफ्टवेयर की सेटिंग वाली फाईल) फाईल में सेटिंग देखनी या लिखनी हो तो नोटपैड। और तो और ए एस पी छोड जब एएसपी डॉट नेट पर काम करने का वक्त आया था तब भी जल्दी से कभी किसी वेब डॉट कनफिग में बदलाव लाना होता था तो झट से नोटपैड में ओपन कर लेते थे, आसानी और तुरंत सारा काम हो जाता था। अब जब ब्लागिंग करने लगे हैं तो इसकी पी.एच.पी की फाईल में कोई भी संसोधन करना हो तो फिर से नोटपैड या कोई नयी एच.टी.एम.एल की फाईल लिखनी हो तो नोटपैड।

मुझे पता है आप में से कई लोगों के बहुत कुछ समझ नही आया होगा तो उनके लिये संक्षेप में बता दूँ नोटपैड यानि बिहारी के दोहे जैसी “देखन में छोटी लगे घाव काम करे गंभीर“। हम आज भी नोटपैड को बहुत यूज करते हैं डेटा दिखाने का तरीका बदल गया फिर भी नोटपैड काम आ ही जाता है यानि कि एक्स.एम.एल. वाले फोर्मेट के डेटा को देखने के लिये भी नोटपैड यूज कर सकते हैं। वैसे अब काफी लोगों ने नोट किया होगा कि नोटपैड का भी मेकओवर हो गया है और अलग अलग तरह के नोटपैड आ गये हैं। लेकिन कितना भी मेकओवर क्यों ना हो जाये रहेंगे तो सब नोटपैड ही ना, बस जब तक नोटपैड हमारा तारनहार बना हुआ है हम नोटपैड की यूँ ही महिमा गाते रहेंगे। अगर आप अभी तक इससे रूबरू नही हुए हैं तो जल्दी से हो जाईये क्या पता कभी आपके भी काम आ जाये।

नोटपैड से क्षमा याचना सहित :) अब ये मत पूछियेगा कौन नोटपैड ;)

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18 Responses to “नोटपैड की महिमा”

  1. समीर लाल Says:

    अब लिख दिये हो तो बच कर चलना. हेलमेट लगा ही लो. नोटपेड के लिये लिखे हो, तो इंतजार करो जवाब का. :) अब तुम्हारी वजह जो भी रही हो, अटक तो गये ही हो!!! :)

    लिखो नोटपेड……हम इंतजार कऱ रहे हैं!!

  2. Tarun Says:

    अरे बाप रे! तो हमने बीच में ही कह दिया था, आपकी बात सुनकर लगता है हैलमेट से काम नही चलेगा इसलिये कुछ दिनों के लिये गायब ही हो जाते हैं, जब लिखने बैठे थे तब ख्याल ही नही था ;) बीच में आया तो सोचा अब पूरा तो कर ही देते हैं। लेकिन हैल्मेट में पडने वाली मार को एक लाईन जोड के थोडा कम करने की कोशिश करके देखते है। :)

  3. Cuckoo Says:

    I agree with Sameer.
    Ab aap bach nahi sakte, abhi abhi notepad aapka pata pooch kar gayi hain. Maine unko bata diya hai. Unke haath me na jaane kya-2 hathiyaar the. :D

    I am sorry agar aapko meri Hindi ki writing ya spelling me galti nazar aaye. ;) Dar ki wajeh se maine notepad ka istemaal nahi kiya aaj. :P

  4. आशीष Says:

    ये स्टाईल काफी अच्छा है। वैसे अमरीका मे हेलमेट सस्ते मिलते है या मै भारत से भीजवा दूं ? :-)

    वैसे नोटपैड की जो बात मुझे सबसे अच्छ लगती है कि वो बहुत ही हलकी है(मतलब कि lightweight) :-D

  5. Anunad Singh Says:

    यूनिकोडित हिन्दी टेक्स्ट को ‘जतन’(सेव) करने के लिये भी नोटपैड बहुत उपयोगी है। लेकिन समस्या तब होती है जब रोमन और देवनागरी का मिश्रित टेक्स्ट जतन करना हो। इसके लिये मैने ‘वर्ड पैड’ को अति उपयोगी पाया है।

  6. पंकज बेंगानी Says:

    इस बार आपकी ट्रिक काम कर गई. ;-)

    वैसे लालाजी की सलाह अब मानकर चलें.. आजकल बहुत से पत्रकार छुट्टे घुम रहे हैं.. लपेट लेंगे. :)

  7. अतुल शर्मा Says:

    आप समीरजी का कहना मान लें।

  8. अनूप शुक्ला Says:

    सही है! नोड्पैड से ये प्यार बना रहे!

  9. सागर चन्द नाहर Says:

    इसे कहते हैं वफादारी, भगवान करे आपके और नोटपैड के प्यार को कभी नजर ना लगे।:)

  10. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    अरे भाईसाहब नोटपैड से तो अपना भी पुराना लगाव है। पुराने टाइम में इंटरनेट पर से सारी जानकारी लिंक्स आदि सहित नोटपैड पर ही टैक्स्ट फाइल में सेव करता था, फिर फायरफॉक्स में आया तो इस काम के लिए Clippings नामक एक्सटेंशन मिल गई जिसने की मेरी जिंदगी से नोटपैड को जरा दूर कर दिया। लेकिन अब भी अक्सर टैक्स्ट को बिना फॉर्मेट के कॉपी पेस्ट करने के लिए नोटपैड का ही उपयोग करता हूँ।

    बीच में नोटपैड के दसियों विकल्प आजमाए जैसे Notepad++, Notepad 2, Professional Notepad, Editor 2 आदि आदि पर नोटपैड जैसी सादगी कहीं देखने को न मिली। और हाँ जैसा आशीष भाई ने कहा हल्की बोले तो लाइटवेट तो है ही।

    और हाँ अब इंसानी नोटपैड से बचकर रहिएगा, बहुत धांसू लिखती हैं। :)

    अनुनाद सिंह ने लिखा:

    यूनिकोडित हिन्दी टेक्स्ट को ‘जतन’(सेव) करने के लिये भी नोटपैड बहुत उपयोगी है। लेकिन समस्या तब होती है जब रोमन और देवनागरी का मिश्रित टेक्स्ट जतन करना हो। इसके लिये मैने ‘वर्ड पैड’ को अति उपयोगी पाया है।

    ऐसा तो नहीं है नोटपैड में भी रोमन और देवनागरी का मिश्रित टैक्स्ट लिखा जा सकता है, बस सेव करते हुए Save As विंडो में सबसे नीचे वाले बक्से में Enconding बदलकर UTF-8 कर दीजिए।

  11. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    तरुण भैया दांई साइड में MyBlogLog वाला विजेट खिसक कर तीसरे कॉलम में चला गया है जिससे लेआउट गड़बड़ हो रही है, साथ ही वह अक्सर दिखाई भी नहीं देता। उसे साइडबार में ही नीचे लगा दीजिए।

  12. mohinder kumar Says:

    Sub Jaan Gaye Bhaiye kaun se Note Pad Ki Baat Kiye ho Aap..

    Ye Raaste Blog ke… Chalana Sambhal Sambhal Ke

  13. आशीष Says:

    नोटपैड की एक मजेदार बात
    १. नोटपैड खोलें
    २.Bush hid the facts यह पंक्ति लिख कर , फाईल सेव करें
    ३. इस फाईल को नोटपैड मे खोलें

    ४.क्या हुआ ?

    मेरी भी समझ से बाहर है, लगता है जार्ज बुश मे बिल्लू भैया को धमका कर रखा है।

  14. मालिक Says:

    टाइम नहीं था इसलिये हमने सिर्फ पहले 3 पैरा ही देखे
    गुरू बीवी को पता चलने दो फिर ब्लागिंग बन्द! :-)

  15. मालिक Says:

    वैसे नोटपैड को स्त्रीलिंग क्यों बना रखा है?

  16. ASHISH Says:

    गुरू,
    मुझे मेल करें। एक ब्लॉग और साथ में हिंदी वेबसाइट बनाना चाहता हूं, लगता है आपकी कंप्यूटर जानकारी अच्छी है। दरअसल मेरी जानकारी बेहद सीमित है। संभव हो तो फोन नंबर छोड़ें।
    987169 7234

  17. अंकुर गुप्ता Says:

    वाकई नोट्पैड काम का साफ़्टवेयर है पर अगर आपको ए एस पी . नेट पर काम करना है तो बेहतर है कि विजुअल स्टूडियो का प्रयोग करें.

  18. Tarun Says:

    Apni to jindagi VS pe kaam karte karte kat gayi…..:)

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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