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हरि अनंत हरि कथा अनंता

April 17th, 2007 | 13 Comments | Posted in खालीपीली

मुझे याद नही पड़ता ये किस ने कहा है शायद तुलसीदास या शायद कोई और दास, खैर शेक्सपियर की मानें तो नाम में क्या रखा है सीधे मुद्दे पर आते हैं।

जाहिर सी बात है, पढ कर तो यही लगता है कि हरि के लिये ही कहा होगा आज तक सभी यही बताते भी आये हैं कि हरि के लिये ही कहा है। अब अगर थोड़ी देर के लिये आप हरि का मतलब भगवान होता है ये भूल जायें तो या आपके दिमाग की जलती-बुझती ट्यूब लाईट झकास सी जल जाये तो?

तो क्या, आपको भी लगने लगेगा अरे ये तो किसी के लिये भी हो सकता है। उन लोगों के लिये भी जो कल ही किसी न्यूज चैनल (स्टार) के दफ्तर में तोड़ फोड़ मचा कर आये हैं, उन लोगों के लिये भी जो काश्मीर में उत्पात मचाये हुए हैं। अगर ईराक में दहशत फैलाते समूहों के लिये आप ये कह सकते हैं तो अफ्रीका में नर संहार कर रहे अति वादियों के लिये भी। इस तरह के समूह भी तो अनंत हैं, हर नयी घटना के साथ एक नये समूह के बारे मे पता चलता है। इनकी कथायें भी अनंत हैं, कभी खत्म ही नही होती।

थोड़ा और सोचें तो लगेगा, ये तो हम नेताओं के लिये भी कह सकते हैं। जब आपको लगता है कि खराब नेता गया चलो अगला अच्छा आयेगा तो दो खराब नेता आ धमकते हैं। आप सोच के बैठते हैं, नेहरू गये, इंदिरा गयी, राजीव गये चलो अब कोई किसी और परिवार का बंदा आयेगा लेकिन ये क्या हुआ ये तो राहुल आ गये। बयान भी ऐसे देने लगे जो किसी ने सोचे भी ना होंगे। यानि की खराब, बेकार नेता भी अनंत इनके बयान भी अनंत। तभी तो कह रहा हूँ नेताओं के लिये भी कहा जा सकता है, हरि अनंत हरि कथा अनंता।

धार्मिक संगठनों के कट्टरपंथियों और उनके बयानों को पढ़कर सुनकर भी शायद आपको कभी कहीं कोई आशा की किरण दिखती हो कि हो सकता है अगला कोई उदारवादी आये लेकिन ऐसा होता नही। तू शेर तो मैं सवा शेर की तर्ज पर ही उत्तराधिकारी आते रहते हैं, यानि कि ये भी अनंत और इनकी कथा भी अनंता।

चलो एक नजर अपने पर भी मार लेते हैं, अपने देश की बढ़ती जनसंख्या भी तो अनंत ही है और हर एक व्यक्ति की अपनी अलग अलग कहानी यानि कि फिर से कथा अनंता। तो हम अपने लिये भी कह सकते हैं, हरि अनंत हरि कथा अनंता।

अपने देश की बात चल ही गयी है तो थोड़ा चैनलों में दिखाये जाने वाली सास-बहू की बात भी क्यों ना कर ली जाये। जब पहला सास-बहू टाईप सीरियल १ साल चला होगा तो आप लोगों ने जरूर सोचा होगा कि अब कुछ दिनों में ये खत्म हो जायेगा। लेकिन ऐसा हुआ नही ५-६ साल होने को है, अब भी चल रहा है, है ना? यही नही, सैकड़ों और आ गये और कुछ कतार में हैं। हर किसी का यही दावा कि उनकी कहानी अलग है यानि कि फिर से वही, हरि अनंत हरि कथा अनंता।

जिस गति से ब्लॉगर बढ़ रहे हैं (हम किसी विशेष भाषा की बात नही कर रहे हैं), उनके लेखन की विविधता बढ़ रही है, हर दिन आने वाली उनकी पोस्ट बढ़ रही हैं, हर एक का लेखन का अंदाज अलग अलग है। ये सब देख कर अगर आप आज इनके लिये ये कहने से बच भी रहे हैं लेकिन आने वाले वक्त में जरूर इनके लिये भी आप यही कहियेगा – हरि अनंत हरि कथा अनंता।

अगर किसी के लिये अभी ये नही कह सकते हैं तो वो होगें हमारी इस पोस्ट को पढ़ने वाले ब्लॉगर और उनकी टिप्पणियां। लेकिन इस बात की गारंटी तो दे ही सकते हैं कि अगर इस पोस्ट में टिप्पणियां ५० को पार कर गयी तो अपनी इस पोस्ट के लिये, दिल को बहलाने के लिये इतना तो कह ही सकते हैं “चिट्ठाकार अनंत इनकी टिप्पणियां अनंता।”

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13 Responses to “हरि अनंत हरि कथा अनंता”

  1. समीर लाल Says:

    कम से कम आपकी पोस्टों और उनकी टिप्पणियों के लिये कहे देता हूँ:

    हरि अनंत हरि कथा अनंता!!!

    इस अनंत टिप्पणी यज्ञ में हमारी प्रथम आहूति. :) शुभकामनायें ५० पार करने के लिये.

  2. रवि Says:

    किसी चिट्ठे पर 50 पार हुई है क्या? 100 के लिए तो लगता है हिन्दी चिट्ठाजगत को दो-चार साल इंतजार करना होगा :(

  3. समीर लाल Says:

    रवि भाई

    हम दो बार पार कर चुके हैं यह ५० का आंकड़ा. खैर, १०० वाली के लिये आपकी बात सही है. :) मान लेते हैं.

  4. अनूप शुक्ला Says:

    सही है। निठल्ले अनंत उनके चिंतन अनंता!

  5. अभय तिवारी Says:

    आपके पचास में एक हमारी..

  6. अतुल शर्मा Says:

    एक टिप्पणी मेरी भी…

  7. संजय बेंगाणी Says:

    एक हमरी भी जोड़ ल्यो भाई. कित्ती हुई… दस भी पार नहीं हुई!
    कोई बात नहीं अभी भी अनंत सम्भावनाएं बाकि है.

  8. उन्मुक्त Says:

    अरे भाीई एक मेरी भी।

  9. गौरी Says:

    लीजिए,एक टिप्पणी हमारी भी।
    गौरी

  10. गौरी Says:

    लीजिए,एक टिप्पणी हमारी भी।
    ठीक कहा आपने…
    गौरी

  11. Divyabh Says:

    Hi Tarun,
    समेटा अनंत नाटकों को शब्द है इसके अनंता…
    व्यंग भी है यहाँ और उसपर निठल्ला चिंतन अनंता…।

  12. नीरज दीवान Says:

    सिर्फ़ पचास से क्या होगा.. यह मुखपृष्ठ बना लो दादा. इससे रोज़ टीप आती रहेंगी अनंतकाल तक.
    वैसे मज़े मौज़ में कटाक्ष कर गए गुरू. जिस जिस को मारे हो वो अनंतकाल तक नहीं छोड़ेंगे आपको.

  13. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    हमरी टिप्पणी भी लो भाई। बाकी लेख लंबा है आकर पढ़ेंगे। :)

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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