27 Apr
Posted as क्रिकेट, क्रिकेट विश्वकप
Tags:क्रिकेट, क्रिकेट विश्वकप, Cricket, cricket world cup, world cup 2007सारा माहौल गरमा गया है, लोग दो खेमों में बँट चुके हैं, पिछले कुछ समय से चलता ये द्वंद युद्ध अपने आखिरी मुकाम में आ ही गया। तटस्थ रहने का मतलब नही बनता इसलिये अब वक्त आ गया है ये बताने का कि आखिर हम किस खेमे में हैं।
एक बार फिर इतिहास अपने को दोहराने चला है लेकिन अभी देखना बाकि है कि परिणाम क्या होता है। अपने शूरवीर तो जंग के शुरूआती दिनों में ही पस्त हो गये थे। वो तो भला हो पड़ोसियों का जो अभी तक मैदान में डंटे हैं, हमारा भी पड़ोसी धर्म यही कहता है कि हम खूब हल्ला बोलें क्या हुआ जो मैदान में नही जा सकते। घर से तो हल्ला बोल कर सकते हैं, इससे पहले कि आप इधर उधर की सोचनें लगें बता देता हूँ कि हम बात क्रिकेट वर्ड कप के फाईनल की कर रहे हैं। और हमारा खेमा है अपना पड़ोसी श्रीलंका, वार्म-अप के पहले मैच से जो हमने वर्डकप की कमान सभांली थी वो भारत की हार के बाद भी बदस्तूर जारी रही। और क्यों ना रहती आखिर हम भी तो खेल रहे थे हमें भी तो जीतना था और हमारी ये जीत भी सिर्फ एक मैच दूर है।
आस्ट्रेलिया का फिलहाल तो कोई सानी नही लेकिन हम दो ध्रुवों के पक्षधर हैं, इसलिये यही चाहेंगे हमारा खेमा जीते चाहे कुछ रनों के अंतर से ही, लेकिन जीते। अब क्या होगा ये तो शनिवार को पता चलेगा। लेकिन तब तक श्रीलंका के सभी शूरवीरों को हम यही आशीर्वाद देंगे- विजयी भवो: वत्स!
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13 Responses
Dinesh
April 27th, 2007 at 6:16 am
1Australia is really a champ but still me too want Sri lanka to win cricket world cup 2007. I hope they will beat Australia just like 1996 cricket world cup.
अभय तिवारी
April 27th, 2007 at 7:53 am
2हम तो घबरा ही गये थे कि आप भी..
गौरी
April 27th, 2007 at 8:14 am
3अच्छी सस्पेंस थ्रिलर लिख सकते हैं आप…
आशीष
April 27th, 2007 at 8:54 am
4अईयो, खोदा पहाड़ निकली चुहीया, वो भी मरी हुयी !
खैर हम भी जै श्रीलंका वाले ही है!
kakesh
April 27th, 2007 at 9:00 am
5भईया आपने तो चौका ही दिया था . हम भी सोचे कि इस गरम माहोल में आप भी गरमी फैलाने आ ही गये .. बहुत हिट्स पाओगे गुरु .. विजयी भवो: वत्स …
masijeevi
April 27th, 2007 at 9:01 am
6उ फ्फ…
हमें तो लगा…
चलो जाने दो…श्रीलंका तक हमारी भी शुभकामनाएं पहुँचा दें।
उन्मुक्त
April 27th, 2007 at 9:14 am
7हम भी श्रीलंका के खेमे में हैं।
अरुण
April 27th, 2007 at 9:23 am
8भाई वाह मजा आ गया
एक शेर अर्ज है
“बडा शोर सुनते थे हाथी की दुम का
पलट के जॊ देखा तो सुतली बंधी थी”
अब वाह वाह इ:मेल कर दीजीयेगा
ghughutibasuti
April 27th, 2007 at 9:40 am
9यों लोगों को डराया मत कीजिये ! हम तो युद्ध होता देख जा रहे थे फिर सोचा चलो देख ही लेते हैं । बहुत अच्छा लिखा है आपने । जो अच्छा खेले वही विजयी हो ।
घुघूती बासूती
शशि सिंह
April 27th, 2007 at 9:54 am
10शुरू में तो हम भी कुछ-कुछ घबरा से गये… शायद माहौल का असर था। बाकी सब ठीक है…
अतुल शर्मा
April 27th, 2007 at 11:03 am
11जोर का झटका, धीरे से लगे…
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
April 28th, 2007 at 5:39 am
12पाठकों को नए नए तरीकों से झटका देने लगे हैं आप, खूब इशटाइल है।
Divyabh
April 28th, 2007 at 11:12 pm
13क्या हो भाई अभी बारिश हो रही है…देखे इसबार करम किसका बड़ा है…।उलटा भी हो सकता है…:)
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