सारा माहौल गरमा गया है, लोग दो खेमों में बँट चुके हैं, पिछले कुछ समय से चलता ये द्वंद युद्ध अपने आखिरी मुकाम में आ ही गया। तटस्थ रहने का मतलब नही बनता इसलिये अब वक्त आ गया है ये बताने का कि आखिर हम किस खेमे में हैं।

एक बार फिर इतिहास अपने को दोहराने चला है लेकिन अभी देखना बाकि है कि परिणाम क्या होता है। अपने शूरवीर तो जंग के शुरूआती दिनों में ही पस्त हो गये थे। वो तो भला हो पड़ोसियों का जो अभी तक मैदान में डंटे हैं, हमारा भी पड़ोसी धर्म यही कहता है कि हम खूब हल्ला बोलें क्या हुआ जो मैदान में नही जा सकते। घर से तो हल्ला बोल कर सकते हैं, इससे पहले कि आप इधर उधर की सोचनें लगें बता देता हूँ कि हम बात क्रिकेट वर्ड कप के फाईनल की कर रहे हैं। और हमारा खेमा है अपना पड़ोसी श्रीलंका, वार्म-अप के पहले मैच से जो हमने वर्डकप की कमान सभांली थी वो भारत की हार के बाद भी बदस्तूर जारी रही। और क्यों ना रहती आखिर हम भी तो खेल रहे थे हमें भी तो जीतना था और हमारी ये जीत भी सिर्फ एक मैच दूर है।

आस्ट्रेलिया का फिलहाल तो कोई सानी नही लेकिन हम दो ध्रुवों के पक्षधर हैं, इसलिये यही चाहेंगे हमारा खेमा जीते चाहे कुछ रनों के अंतर से ही, लेकिन जीते। अब क्या होगा ये तो शनिवार को पता चलेगा। लेकिन तब तक श्रीलंका के सभी शूरवीरों को हम यही आशीर्वाद देंगे- विजयी भवो: वत्स!

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