20 Apr
Posted as बस यूँ ही, जरा हट के
Tags:जरा हट के, बस यूँ ही, hindi songs, Hum Aapke Hain Kaun, Lata Mangeshkar, Maye Ni Mayeलता मंगेशकर को तो सभी जानते हैं, हजारों गाने वो गा चुकी हैं लेकिन वो ऐसी गलती कर सकती हैं यकीन नही होता। किसी की तो है या तो लताजी की या फिर उस गीतकार की जिसने ये गीत लिखा। कई लोगों की तरह वो हमारी भी पसंदीदा गायिकाओं में से हैं, इसलिये हमें तो कतई यकीन नही हो रहा। लेकिन कुछ तो चक्कर है, हमारी समझ में तो नही आया, क्या आपमें से किसी को पता है या बुझ सकता है?
नेपाली गोरखाओं का साहब जी को शाहब जी (शाब जी) कहना किसी से नही छुपा है, यहाँ तक कि अगर आपके कोई पहाड़ी दोस्त हों तो कभी कभी उनके मुँह से भी “स” की जगह पर हो सकता है आप “श” सुन लें।
लेकिन किसी हिन्दी गायक के मुँह से और वो भी लताजी जैसी गायक, थोड़ा अटपटा लगता है ना। आप में से किसी ने कभी क्या ये नोट किया? आप भी “हम आपके हैं कौन” का ये गीत ध्यान से सुनिये फिर बताईये, इस गाने में लता जी ने कहाँ कहाँ पर “स” को “श” कह कर बोला या गाया है। गौर देने लायक है कि मैने कहाँ कहाँ कहा, इसका मतलब है ये एक से ज्यादा जगह पर हुआ है।
(प्ले के साईन पर डबल क्लिक करिये)
उसके बाद इसी गीत को एक बार फिर ध्यान से सुनिये लेकिन इस बार नीचे वाला गाना चलायें, यहाँ सब कुछ ठीक ठाक सुनायी देता है। इस गीत की साउंड क्वालिटी थोड़ा अच्छी नही है लेकिन मकसद हल हो जाता है।
(प्ले के साईन पर डबल क्लिक करिये)
अब सवाल उठता है कि पहले वाला गीत किस की आवाज में है? लगती तो लताजी की ही है, तो फिर क्या ये गीत दो बार रिकार्ड किया गया? कोई थोड़ी से रोशनी डाल सकता है क्या, भैया हमें भी बताओ ये माजरा क्या है?
7 Responses
kakesh
April 20th, 2007 at 6:57 am
1तरुण जी ,
गाने सुनने से तो आप की बात स्पष्ट हो जाती है लेकिन यहाँ पर गाने के स्रोत का उल्लेख करना आवश्यक है . ये गाने आपको कहां से मिले और क्या इस बात की गारंटी है कि ये गाने टैम्पर्ड नहीं किये गये . मुझे तो दोनों गाने टैम्पर्ड किये हुए लगते हैं . आजकल ऎसे सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जिनसे आप गाने की एक एक बीट बदल सकते हैं . इसलिये इस विवाद में ना ही पड़ें तो अच्छा.
समीर लाल
April 20th, 2007 at 7:22 am
2छोडो यार, पहला वाला कुछ बदमाशी का नतीजा लगता है. लता जी जैसी गायिका और इस तरह का वाकया, गले से उतारने के पहले तीन पैग उतारने होंगे…कोई नौसिखाया भी ऐसी गल्ती होश हवास में नहीं करेगा.
जाने दो न भई…मिले कहाँ ये दोनो तुम्हें या कम से कम पहले वाला???
:)
जाने देते हैं इस पर बातचीत, ठीक है??
समीर लाल
April 20th, 2007 at 7:24 am
3हमरे मित्र काकेश
ठीक ही कह रहे हैं…बहुत आराम से यह काम हो सकता है. जगजीत की गज़ल में की जाये क्या??
Tarun
April 20th, 2007 at 7:25 am
4काकेश जी, विवाद में पड़ने के मकसद से नही डाला है ये सब, सिर्फ जानने के लिये कि क्या वजह हो सकती है। पहला वाला गाना जिसकी आवाज ज्यादा स्पष्ट है वो अपने i-pod के लिये एक दोस्त से लिया था।
नीरज दीवान
April 20th, 2007 at 3:44 pm
5चाहे जो हो. लाए हो ढूंढकर. होता है.. बड़ी बड़ी हस्तियों से छोटी छोटी ग़लतियां हो जाती हैं.
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
April 20th, 2007 at 8:27 pm
6अरे साफ पता लगता है जी कि जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है। वरना एकध बार तो गलती हो सकती थी इतनी बार नहीं।
वैसे आजकल आप भी ऑडियो-वीडियो खूब डायरेक्ट कर रहे हो, कहीं आप अपनी तकनीकी कुशलता तो नहीं दिखा रहे।
rajneesh mangla
April 21st, 2007 at 4:46 am
7मेरे हिसाब से यह data conversion software की कमी के कारण हुआ है। cd को mp3, rm आदि फ़ार्मेट में बदलने के लिए अनगिनत साफ़्टवेयर उपलब्ध हैं। यहां शायद किसी घटिया साफ़्टवेयर का उपयोग किया गया है। या फिर अनजाने में कोई audio effect घुस आया है।
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The difference between 'involvement' and 'commitment' is like an eggs-and-ham breakfast: the chicken was 'involved' - the pig was 'committed' - unknownCategories
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